अमेरिका के साथ चल रही वार्ता के फेल होने के बाद अब ईरान ने अमेरिका को एक नया शांति वार्ता प्रस्ताव भेजा है। यह प्रस्ताव पाकिस्तान के रास्ते पहुंचा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अगर अमेरिका अपने आक्रामक रवैये, धमकियों और उकसावे वाली कार्रवाइयों को रोक दे तो तेहरान बातचीत का रास्ता अपनाने को तैयार है। प्रस्ताव का मुख्य मकसद होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री आवाजाही को फिर से सामान्य करना है। वो अलग बात है कि ट्रंप इसे मानने से इंकार कर रहे हैं।
ट्रंप का जवाब
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को मंजूर नहीं किया। उन्होंने कहा कि ईरान कुछ ऐसी चीजें मांग रहा है जिन पर सहमति नहीं हो सकती। ट्रंप ने विस्तार से तो नहीं बताया, लेकिन यह जताया कि वे ईरानी नेतृत्व से निराश हैं। उनके अनुसार, ईरान के अंदर भी लोग आपस में बंटे हुए हैं। वे समझौता चाहते हैं लेकिन उलझन में हैं। ट्रंप ने साफ कहा कि ईरान को परमाणु हथियार वाला देश नहीं बनने दिया जाएगा।
हथियारों की सप्लाई और तैयारी
इस बीच अमेरिका ने इजरायल को करीब 6500 टन हथियारों की नई खेप भेजी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने ट्रंप को ईरान पर नए हमलों के विकल्प सुझाए हैं, जिनमें हाइपरसोनिक मिसाइल ‘डार्क ईगल’ का इस्तेमाल भी शामिल है। व्हाइट हाउस में ट्रंप और सैन्य अधिकारियों की करीब 45 मिनट की बैठक हुई जिसमें इन योजनाओं पर चर्चा हुई।
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ईरान अपनी ताकत वापस बना रहा है
40 दिनों के संघर्ष के बाद भी ईरान ने अपनी क्षमता को दोबारा खड़ा करना शुरू कर दिया है। जिन भूमिगत ठिकानों पर हमले हुए थे, वहां से हथियारों को मलबे में से निकालकर दोबारा तैनात किया जा रहा है। तेहरान में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय है। ईरान मौजूदा युद्धविराम का फायदा उठाकर ड्रोन और मिसाइल क्षमता को तेजी से मजबूत कर रहा है, ताकि अगर स्थिति फिर बिगड़ी तो जवाब देने के लिए तैयार रहे।
ईरान की स्थिति
ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि उनकी सेना किसी भी खतरे से देश की रक्षा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रस्ताव के बावजूद दोनों तरफ सैन्य तैयारियां जारी हैं। अमेरिका-इजरायल की तरफ से हथियारों की सप्लाई और हमले की समीक्षा चल रही है, जबकि ईरान अपनी डिफेंस और हमले की क्षमता को मजबूत करने में लगा हुआ है।

















