अमेरिका और नाटो के मध्य चल रहे तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जर्मनी से 5,000 सैनिक वापस बुलाने का ऐलान किया है। पेंटागन ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। साथ ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इटली और स्पेन को भी चेतावनी दी है क्योंकि ये देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी अभियानों में मदद नहीं कर रहे।
जर्मनी से सैनिक वापसी
यह फैसला जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान के सामने अमेरिका की स्थिति “अपमानजनक” हो रही है। एक सीनियर पेंटागन अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि जर्मनी के हाल के बयान “अनुचित और मददगार नहीं” थे। अधिकारी के मुताबिक, राष्ट्रपति इन टिप्पणियों पर सही तरीके से प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
वापसी छह से 12 महीने में पूरी होने की उम्मीद है। जर्मनी में मौजूद एक ब्रिगेड कॉम्बैट टीम को वापस बुलाया जाएगा। साथ ही बाइडेन प्रशासन के समय में जर्मनी भेजने की योजना वाले लॉन्ग-रेंज फायर्स बटालियन को अब नहीं भेजा जाएगा। जर्मनी यूरोप में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है। यहां करीब 35,000 सक्रिय ड्यूटी सैनिक तैनात हैं और यह ट्रेनिंग का बड़ा केंद्र भी है।
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इटली और स्पेन पर ट्रंप की प्रतिक्रिया
ट्रंप ने गुरुवार देर रात रिपोर्टरों से कहा कि इटली और स्पेन से सैनिक निकालने पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “इटली ने हमारी कोई मदद नहीं की और स्पेन तो बिल्कुल भयानक रहा है।” इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने कहा कि वे ट्रंप के इस रुख को समझ नहीं पा रहे। उन्होंने साफ किया कि इटली ने समुद्री सुरक्षा में मदद की पेशकश की थी, जिसकी अमेरिकी सेना ने सराहना भी की थी। उन्होंने यह भी कहा कि यूरोपीय जहाजों के हरमुज पार करने का आरोप गलत है। इटली में सात नौसेना अड्डों पर करीब 13,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।
स्पेन की तरफ से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई। स्पेन ने ईरान पर हमलों के लिए अपने संयुक्त अड्डों का इस्तेमाल अमेरिका को नहीं करने दिया था। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ईरान युद्ध के शुरुआती दिनों से ही इसकी आलोचना करते रहे हैं। स्पेन में दो संयुक्त सुविधाओं पर करीब 3,800 अमेरिकी सैनिक हैं।
क्यों नाटो के बीच बढ़ा तनाव
मामला कुछ यूं है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मनमाने तरीके से ईरान पर हमला किया। बदले में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करके दुनिया की ऊर्जा सप्लाई को ठप कर दिया। इससे ट्रंप पर दबाव पड़ रहा है। ट्रंप ने होर्मुज खोलने के लिए यूरोपीय देशों से सहयोग को कहा, लेकिन धमकी भरे अंदाज में। इसी को लेकर नाटो और अमेरिका के बीच चल रहा मतभेद और गहरा हो गया।
बहरहाल, ट्रंप ने जर्मनी से अपनी सेना हटाने का ऐलान कर दिया है। अंतिम वर्ष के आंकड़ों के अनुसार, यूरोप में अमेरिका के कुल 68,000 सक्रिय ड्यूटी सैनिक विदेशी अड्डों पर तैनात थे। जर्मनी, इटली और स्पेन के अड्डे लंबे समय से अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए महत्वपूर्ण रहे हैं।

















