देहरादून । देवभूमि के जनपद चमोली के सलूड-डूंगरा गांव में आज विश्व प्रसिद्ध ‘रम्माण’ मेला भव्य और ऐतिहासिक रूप से संपन्न हुआ। उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने के लिए श्रद्धालुओं और पर्यटकों का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
पौराणिक रामायण की कथा पर आधारित इस अनूठे लोकनाट्य में पारंपरिक मुखौटा शैली, भोजपत्र से बने 18 मुखौटे, और 12 ढोल-दमाऊ, 18 ताल व 8 भंकोरों की गूंज ने पूरे वातावरण को भक्ति और आनंदमय बना दिया।
श्रीराम जन्म, वनगमन, सीता हरण और लंका दहन जैसे प्रसंगों का जीवंत मंचन दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर गया। वर्ष 2009 में यूनेस्को द्वारा ‘रम्माण’ को विश्व सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा मिलना उत्तराखंड की समृद्ध लोकपरंपरा का वैश्विक सम्मान है। यह आयोजन स्थानीय आराध्य भूम्याल देवता को समर्पित है।

















