महाराष्ट्र में नासिक की टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के बीपीओ में जबरन कन्वर्जन और हिंदू महिलाओं के यौन शोषण मामले में नया खुलासा हुआ है। विशेष जांच दल (SIT) को आरोपी दानिश शेख के मोबाइल से कई संदिग्ध तस्वीरें और वीडियो हाथ लगी हैं। जांच में पाया गया है कि नासिक टीसीएस मामले में फरार चल रही निदा खान नौकरी छोड़ने के बाद भी गिरफ्तार किए गए दूसरे आरोपियों के लगातार संपर्क में थी। निदा खान अन्य आरोपियों से लगातार क्या बातचीत कर रही थी, एसआईटी की टीम इसका पता लगाने में जुट गई है।
कन्वर्जन की बड़ी साजिश का खुलासा
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नासिक की टीसीएस कंपनी में जबरन कन्वर्जन और हिंदू महिलाओं के यौन उत्पीड़न का मामला दिन-ब-दिन और गंभीर होता जा रहा है। जांच में पता चला है कि कंपनी में नौकरी छोड़ने के बाद भी निदा खान इस मामले के दूसरे आरोपियों के संपर्क में थी। मोबाइल कॉलिंग डिटेल्स (CDR) के मुताबिक, निदा खान लगातार आरोपियों से बातचीत कर रही थी। इस बातचीत से यह संदेह और पक्का हो गया है कि कंपनी में कन्वर्जन की बड़ी साजिश रची जा रही थी। एसआईटी को आरोपी दानिश शेख के मोबाइल फोन से अहम सुराग मिले हैं। उन्हें दानिश के फोन में कई संदिग्ध फोटो और वीडियो मिले हैं, जिसका गहराई से विश्लेषण किया जा रहा है।
27 अप्रैल को होगी सुनवाई
एसआईटी फिलहाल इन डिजिटल सबूतों का गहन विश्लेषण कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क और साजिश की परतें खोली जा सकें। इस बीच इस केस में मुख्य आरोपी और फरार निदा खान की जमानत याचिका पर 27 अप्रैल को कोर्ट में सुनवाई होगी। ऐसे में यह देखना जरूरी होगा कि आरोपियों को जमानत मिलेगी या उनकी पुलिस कस्टडी बढ़ाई जाएगी।
दानिश के मोबाइल में अहम सबूत
दानिश एजाज शेख (32) ने टीसीएस कंपनी में हिंदू महिलाओं के यौन शोषण और कन्वर्जन मामले में जांच को गुमराह करने के लिए डिजिटल तकनीक का सहारा लिया, लेकिन उसे नासिक पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने तोड़ दिया। फॉरेंसिक टीम (FSL) ने दानिश के मोबाइल का फेस आईडी अनलॉक कर लिया है और जल्द ही इस साजिश में कौन-कौन शामिल था, उसका खुलासा हो सकता है।
बताया जा रहा है कि दानिश शेख ने अपने मोबाइल में हर फाइल, चैट और एप्लीकेशन के लिए अलग-अलग पासवर्ड व एक एडवांस्ड फेस आईडी सिक्योरिटी सिस्टम एक्टिवेट कर रखा था। इस वजह से रीजनल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) को विश्लेषण करने में मुश्किलें आ रही थीं। पासवर्ड न पता लगा पाने की वजह से जांच की रफ्तार धीमी हो गई थी।
एसआईटी चीफ और असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर संदीप मिटके ने मामले की जांच के लिए मोबाइल डेटा इकट्ठा करने के लिए कोर्ट से विशेष अनुमति मांगी थी। कोर्ट के आदेश के अनुसार, दानिश को शुक्रवार (24 अप्रैल) शाम को डिंडोरी रोड पर स्थित फोरेंसिक लैब ले जाया गया। वहां, कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए संदिग्ध के असली फेस आईडी का इस्तेमाल करके मोबाइल को सफलतापूर्वक अनलॉक किया गया। अब, मोबाइल से व्हाट्सएप चैट, ईमेल, फोटो और वॉयस रिकॉर्डिंग का विश्लेषण शुरू हो गया है।

















