देश में पहली बार महाराष्ट्र विधानसभा ने महिला किसानों के लिए सर्वसम्मति से ऐतिहासिक बिल पास किया है। इस कानून के तहत खेती के साथ-साथ डेयरी और पशुपालन से जुड़ी महिलाओं को आधिकारिक तौर पर किसान का दर्जा मिलेगा। सरकार के इस कदम से राज्य की लाखों महिलाओं को समाज में सम्मान मिलने के साथ उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। इससे उन्हें सभी सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सकेगा।
‘महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण बिल’ पशुपालन, मछली पालन, मुर्गी पालन, खेती और उससे जुड़े कामों में शामिल सभी महिलाओं को किसान का दर्जा देता है। गुरुवार (2 जुलाई) को विधानसभा में इस बिल को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई। कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने घोषणा की है कि अगर किसी महिला के नाम पर सातबारा (महाराष्ट्र के राजस्व विभाग द्वारा जारी किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण भूमि अभिलेख) नहीं है, तो भी उसे किसान का प्रमाण पत्र दिया जाएगा।
क्या है महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण बिल 2026?
महाराष्ट्र विधानसभा में पास हुए महिला किसान सशक्तिकरण बिल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में खेती का काम करने वाली महिला मजदूरों को आधिकारिक रूप से किसान का दर्जा देना और उन्हें जमीन का मालिकाना हक दिलाना है। अब तक जमीन पर नाम न होने के कारण महिलाएं कृषि ऋण और सरकारी योजनाओं के सीधे लाभ से वंचित रह जाती थीं। यह कानून महिला किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगा।
जमीन नाम न होने पर भी मिलेगी पहचान
गांवों में महिलाएं घर के काम के साथ-साथ खेतों में बुआई से लेकर कटाई तक पुरुषों के बराबर या उससे अधिक मेहनत करती हैं। इसके बावजूद जमीन पुरुषों के नाम होने के कारण सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें किसान का दर्जा नहीं मिलता था। इसकी वजह से वे बैंक लोन, फसल बीमा या किसी भी सरकारी मदद से वंचित रह जाती थीं। महाराष्ट्र सरकार का यह नया कानून इसी बड़े अंतर को खत्म करने जा रहा है, ताकि मेहनतकश महिलाओं को उनकी असली पहचान और अधिकार मिल सके। सरकार इन सभी महिलाओं को ‘महिला किसान पहचान पत्र’ देगी। इस एक कार्ड की मदद से उन्हें बैंक से कर्ज, फसल बीमा, सरकारी सब्सिडी, बीज, खाद और सीधे मंडियों में अपनी उपज बेचने की सुविधा आसानी से मिलने लगेगी।
महाराष्ट्र स्टेट महिला किसान फंड का मिलेगा लाभ
यह कानून उन लाखों महिलाओं को पहली बार आजाद महिला किसानों के तौर पर कानूनी पहचान देगा, जो अब तक खेतिहर मजदूर थीं। इससे न केवल उन्हें एक नई पहचान मिलेगी, बल्कि राज्य के विकास में उनकी भागीदारी भी पक्की होगी। महिला किसानों को मजबूत बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की अलग-अलग योजनाओं को मिलाकर एक ‘महाराष्ट्र स्टेट महिला किसान फंड’ बनाया जाएगा। इस फंड के तहत महिला किसानों के विकास के लिए अलग-अलग स्कीमों को शामिल किया जाएगा और अगले छह महीनों में जरूरी नियम तय किए जाएंगे। नगर निगम क्षेत्रों को छोड़कर राज्य के सभी ग्रामीण इलाकों की योग्य महिला किसान इन योजनाओं का लाभ उठा सकेंगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई रफ्तार
पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और बेहतर तरीके से चलाने के लिए सरकार एक राज्य स्तरीय विशेष समिति का गठन करेगी, जो इस कानून के क्रियान्वयन पर नजर रखेगी। इसके लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक महिला किसान एम्पावरमेंट काउंसिल, चीफ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में एक स्टेट मॉनिटरिंग कमेटी और एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट में एक अलग महिला किसान एम्पावरमेंट सेल बनाने का प्रावधान किया गया है। इससे महिला किसानों के मुद्दों पर लगातार फोकस करके उनकी मदद की जा सकेगी। यह ग्रामीण महिलाओं के आत्म-सम्मान और आर्थिक स्वतंत्रता को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम होगा। इससे महिलाएं स्वतंत्र किसान के रूप में अपने फैसले खुद ले सकेंगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई रफ्तार मिलेगी।
कृषि क्षेत्र में बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी
हाल के वर्षों में भारत में महिला कार्यबल की भागीदारी दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के अनुसार, महिला श्रम बल भागीदारी दर वर्ष 2017-18 के 23.3 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 40 प्रतिशत तक पहुंच गई। यह परिवर्तन भारतीय अर्थव्यवस्था और समाज दोनों के लिए सकारात्मक संकेत है। कार्यबल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी न केवल समग्र उत्पादकता बढ़ाती है, बल्कि नवाचार को प्रोत्साहित करती है, परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाती है और देश की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को भी बढ़ाती है। महाराष्ट्र में कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए उन्हें आर्थिक सहायता, भूमि के स्वामित्व के अधिकार और उन्नत कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण भारत में लगभग 80 फीसदी कार्यशील महिलाएं कृषि से जुड़ी हैं, लेकिन उनमें से केवल 13-14 फीसदी के पास ही जमीन का मालिकाना हक है। ऐसे में राज्य सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले से ग्रामीण इलाकों में ज्यादा से ज्यादा महिलाएं कृषि क्षेत्र में आने को प्रेरित होंगी।
















