बंगाल में कांग्रेस की ‘डबल गेम’ रणनीति? : ममता की हार में ढूंढ रही जीत! लालू यादव के बाद अब TMC निशाने पर
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बंगाल में कांग्रेस की ‘डबल गेम’ रणनीति? : ममता की हार में ढूंढ रही जीत! लालू यादव के बाद अब TMC निशाने पर

पश्चिम बंगाल चुनाव में कांग्रेस की रणनीति बदली। क्या ममता बनर्जी को कमजोर कर खुद को मजबूत करने की तैयारी में है पार्टी? जानिए पूरा विश्लेषण।

Written byअभय कुमारअभय कुमार — edited by Shivam Dixit
Apr 26, 2026, 08:03 pm IST
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कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार करके पार्टी के लिए खाता खोलने का पूरा प्रयास कर रहे हैं. पश्चिम बंगाल उन छह प्रदेशों में शामिल हैं जहाँ कांग्रेस पार्टी का कोई भी प्रतिनिधि नहीं बचा हैं. इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी का दृष्टिकोण अलग हैं क्योंकि पार्टी अपनी जीत से ज्यादा ममता बनर्जी के हार की तलाश में हैं. कांग्रेस पार्टी ममता बनर्जी की हार में ही अपनी जीत ढूंढ रही हैं. अगर ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में चुनाव हार जाती हैं तो कांग्रेस पार्टी को इसके कई फायदे हैं.

पहला की कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी को तृणमूल कांग्रेस पार्टी और ममता बनर्जी का भाजपा विरोधी इंडि गठबंधन का कमान के लिए कोई भी दुसरा प्रतिद्वंदी नहीं बचेगा. इंडी गठबंधन के कई नेता अलग अलग मौकों पर इस गठबंधन की कमान ममता बनर्जी को सौंपने की वकालत कर चुके हैं.

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तृणमूल कांग्रेस को कमजोर करने की रणनीति

कांग्रेस पार्टी को यह आभास हो चूका हैं की ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस पार्टी के मजबूत रहते पार्टी कभी भी अपने पैरो पर राज्य में खड़ी नहीं हो सकती हैं अतएव कांग्रेस पार्टी ममता बनर्जी को कमजोर करना चाह रही हैं. ममता बनर्जी के मतदाता एक समय कांग्रेस पार्टी के ही मतदाता थे अतएव पार्टी ममता को कमजोर करके ही अपने पुराने मतदाता वर्ग को अपने तरफ खींचने का प्रयास कर सकती हैं.

स्थानीय दलों के खिलाफ कांग्रेस की रणनीति

कांग्रेस पार्टी अच्छे से समझ गई हैं की तृणमूल कांग्रेस पार्टी जैस स्थानीय दलों को समाप्त या कमजोर करके ही कांग्रेस पार्टी अपने को मजबूत कर सकती हैं. ऐसे दलों में बिहार में राष्ट्रीय जनता दल का भी नाम शामिल हैं.लालू यादव ने 2009 के लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस पार्टी को किनारे करके रामविलास पासवान के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था. इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने खुद जितने के बदले लालू यादव और राजद को कमजोर करने की निति पर काम करते हुए 2009 के लोकसभा और 2010 के विधानसभा के चुनावों में राजद को पूरी तरह से कमजोर करने के लिए चुनाव लड़ा ना की अपनी जीत के लिए.

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बिहार मॉडल : 2009 और 2010 का राजनीतिक प्रयोग

2009 के लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने राजद से अलग चुनाव लड़कर पाटलीपुत्र लोकसभा की सीट पर लालू यादव को और उनके सहयोगी रामविलास पासवान को हाजीपुर में चुनावी मात देने में एनडीए की परोक्ष रूप से मदद किया था. फिर 2010 के विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने इन दोनों दलों के खिलाफ उम्मीदवार उतार कर राबड़ी देवी को दो सीटों पर चुनाव हरवाया और राजद इतने सीट भी नहीं प्राप्त कर सकी की वो नेता विपक्ष का हैसियत प्राप्त कर सके. इन दोनों चुनाव के बाद राजद कभी भी कांग्रेस पार्टी से अलग होकर चुनाव लड़ने का साहस नहीं जुटा सकी हैं और कांग्रेस पार्टी राजद से मनमाफिक सीटों का आवंटन करवाकर चुनाव लड़ रही हैं. कांग्रेस पार्टी पश्चिम बंगाल चुनाव में बिहार के 2009 और 2010 के राजनीतिक प्रयोग को दोहराने का प्रयास कर रही हैं.

आम आदमी पार्टी के घटनाक्रम का प्रभाव

कांग्रेस पार्टी के लिए बड़ी खबर बैठे बैठाये आम आदमी पार्टी की ओर से मिला हैं क्योंकि इस पार्टी के सात राज्यसभा सांसदो ने पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए हैं. अब कांग्रेस पार्टी के लिए दिल्ली और पंजाब में मजबूती का रास्ता दिखना शुरू हो गया हैं.

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पश्चिम बंगाल से उत्तर प्रदेश तक रणनीतिक विस्तार

कांग्रेस पार्टी बिहार वाली रणनीति ही पश्चिम बंगाल में इस्तेमाल करके ममता बनर्जी को कमजोर करना चाह रही हैं. कांग्रेस पार्टी की नज़र पश्चिम बंगाल के बाद उत्तर प्रदेश पर टिकी हुई हैं. अगर कांग्रेस पार्टी पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को कमजोर करने में सफल हो जाती हैं तो 2017 में उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव कांग्रेस पार्टी को गंभीरता से लेंगे और गठबंधन में अधिक सीट देने के साथ ही बराबरी का व्यवहार करेंगे. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के बहाने कांग्रेस पार्टी अपने सभी सहयोगियों और भाजपा विरोधी दलों को यह स्पष्ट सन्देश देना चाह रही हैं की कांग्रेस पार्टी को बराबरी की हिस्सेदारी देकर ही भाजपा को मात देने का प्रयास किया जा सकता हैं.

ममता बनर्जी के फैसलों से कांग्रेस को अवसर

ममता बनर्जी ने भी कांग्रेस पार्टी को कई कारण दिए हैं जिससे की वो उनके खिलाफ चुनाव लड़े. पहला की उपचुनाव में निर्वाचित एकलौते कांग्रेस पार्टी के विधायक बायरन बिस्वास को ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी में शामिल करवा लिया. दुसरा की ममता बनर्जी ने कांग्रेस पार्टी के साथ गठबंधन के लिए कोई भी प्रयास नहीं किया.

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Topics: Bengal election analysis HindiRahul Gandhi campaign BengalINDIA alliance politics newsopposition strategy IndiaCongress strategy West BengalMamata Banerjee vs Congress
अभय कुमार
अभय कुमार
अभय कुमार, सीएसडीएस (CSDS ), इप्सोस (IPSOS) सहित कई रिसर्च और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। भारतीय राजनीति सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मामलो से जुड़े मुद्दों पर खास दिलचस्पी है और इसके लिए लिखते रहते हैं। [Read more]
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