आज पश्चिम बंगाल के 16 जिलों के 152 विधानसभा की सीटों पर मतदान हुआ. इस मतदान प्रतिशत ने यह स्पष्ट कर दिया कि 15 वर्षों की सत्ता के बाद अब ममता बनर्जी की विदाई तय है. इतना अधिक मतदान सरकार बदलने की पूरी संभावना देता है. विगत 2021 के विधानसभा चुनाव में इन 16 जिलों के 152 सीटों पर मतदान प्रतिशत 83.19 प्रतिशत था. मगर इस बार का मतदान प्रतिशत 2021 के मतदान प्रतिशत को 8 प्रतिशत से मात देने की ओर अग्रसर है. इसमें ममता बनर्जी की वापसी की कोई संभावना नहीं है.
2021 बनाम 2026 मतदान प्रतिशत (समय अनुसार)
| समय (Time) | 2021 | 2026 |
|---|---|---|
| सुबह 9 बजे | 15.40% | 18.76% ⬆ |
| प्रातः 11 बजे | 33.80% | 41.11% ⬆ |
| दोपहर 1 बजे | 54.80% | 62.18% ⬆ |
| दोपहर 3 बजे | 71.80% | 78.77% ⬆ |
बढ़ा हुआ मतदान और विश्लेषकों पर टिप्पणी
पश्चिम बंगाल में बढ़े हुआ मतदान प्रतिशत ने उन विश्लेषकों को करारा तमाचा जड़ा है जो वर्तमान सरकार के कार्यकाल में बोलने की आज़ादी और व्यक्ति की स्वतंत्रता के मुद्दे पर सरकार को घेरते हैं. बढ़ा हुआ मतदान प्रतिशत उन विश्लेषकों के लिए परिणाम तक एक मौका देगा जो हर मतदान से परिणाम के बीच भाजपा और एनडीए के हार के कारणों की तलाश करते हैं और चुनाव परिणाम में भाजपा और एनडीए की जीत के बाद ईवीएम में गड़बड़ी और अन्य प्रकार के आरोप लगाते हैं. पश्चिम बंगाल के पहले चरण में आज अगर मतदान प्रतिशत कम होता तो यही विश्लेषक इसको भाजपा की कम होती लोकप्रियता और लोकतंत्र के कमजोर होने की दुहाई देते.
अधिक मतदान और सत्ता परिवर्तन का संबंध
देश में अधिकतर मामलो में अधिक मतदान सरकार के प्रति आक्रोश या निराशा की भावना को दर्शाती है. उन चुनावों जिनमें पूर्व से अधिक मतदान होता है उनमें सरकारों के चुनाव हारने की सम्भावना अधिक होती है.
ऐतिहासिक आंकड़ों का विश्लेषण
भारत में 1989 से 2008 के बीच विभिन्न राज्यों में कुल मिलाकर 110 विधानसभा चुनाव सम्पन्न हुए. इन 110 चुनावों में 42 विधानसभा चुनावों में मतदान प्रतिशत उस राज्य में हुए पहले के चुनाव से अधिक था. उन 42 चुनावों में जहां मतदान पहले से ज्यादा हुआ तो उनमें 28 चुनावों में सत्ता परिवर्तन हुआ और सत्तारूढ़ सरकार को हार का सामना करना पड़ा. अधिक मतदान वाले चुनावों में दो तिहाई यानी 66.66 प्रतिशत मामलो में सत्तारूढ़ दलों को हार का सामना करना पड़ा. जिस पार्टी की सरकार थी उसे चुनाव में हार का सामना करना पड़ा.

















