होर्मुज जलडमरूमध्य पर भारत से टोल टैक्स लिया जा रहा है या नहीं, इस सवाल का सीधा जवाब ईरान ने खुद दे दिया है। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों और होर्मुज पर नाकेबंदी का ऐलान किया हुआ है। इसके बावजूद ईरान ने साफ कहा है कि भारतीय जहाजों से कोई टोल वसूला नहीं जा रहा है और आगे भी उन्हें सुरक्षित रास्ता मिलेगा।
क्या है पूरा मामला
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का बहुत महत्वपूर्ण रास्ता है। यहां से करीब 20 फीसदी दुनिया का तेल गुजरता है। भारत भी अपना बड़ा हिस्सा तेल इसी रास्ते से आयात करता है। हाल ही में ईरान और ओमान के द्वारा इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों से टोल टैक्स वसूलने की बात कही थी। लेकिन ईरान के भारत में राजदूत मोहम्मद फताली ने इन खबरों को साफ नकार दिया।
दिल्ली में ईरानी दूतावास में पत्रकारों से बात करते हुए फताली ने कहा, “आप भारत सरकार से पूछ सकते हैं कि क्या हमने अब तक कोई रकम वसूली है या नहीं।” उन्होंने यह भी बताया कि इस मुश्किल समय में ईरान और भारत के रिश्ते अच्छे हैं। दोनों देश साझा हित रखते हैं और एक-दूसरे पर भरोसा कर सकते हैं।
भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता
राजदूत फताली ने न्यूज18 से बातचीत में कहा कि भारतीय जहाजों को होर्मुज से सुरक्षित निकलने दिया जाएगा। उन्होंने भारत को समझदार और विश्वसनीय साथी बताया। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक रिश्ते भी गहरे हैं। फताली ने आगे कहा कि भविष्य में भी भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिलता रहेगा। जल्द ही ईरान एक व्यवस्था का ऐलान करेगा, जिसमें जहाजों के निकलने की पूरी प्रक्रिया बताई जाएगी।
इसे भी पढ़ें: US ने शुरू किया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ब्लॉकेड, तेल की कीमतें 100 डॉलर पार
फंसे हुए भारतीय जहाज
बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने बताया कि फिलहाल होर्मुज में 15 भारतीय ध्वज वाले और भारतीय स्वामित्व वाले पोत फंसे हुए हैं। अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने कहा कि विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर इन जहाजों को वापस लाने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। जैसे ही हालात सामान्य होंगे और सुरक्षित गुजरने की अनुमति मिलेगी, इन जहाजों को वापस लाया जाएगा।
दूसरे देशों की स्थिति
अमेरिकी नाकेबंदी को कई देशों ने समर्थन नहीं दिया। ब्रिटेन ने खुलकर कहा कि वह इसका साथ नहीं देगा। जापान ने होर्मुज में माइनस्वीपर भेजने का फैसला टाल दिया। ऑस्ट्रेलिया ने कहा कि अमेरिका की तरफ से उन्हें कोई संदेश नहीं मिला। फ्रांस और ब्रिटेन होर्मुज से जहाजों की सुरक्षित निकासी के लिए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहे हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसकी घोषणा की।
ईरान के राजदूत का बयान ऐसे समय में आया जब अमेरिका-ईरान के बीच तनाव चल रहा है। भारत के लिए यह राहत की बात है क्योंकि देश का बड़ा तेल आयात इसी रास्ते पर निर्भर है। ईरान ने दोहराया कि भारतीय जहाजों से अब तक कोई टोल नहीं लिया गया और संबंध मजबूत बने हुए हैं।

















