खाड़ी युद्ध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच फोन पर बातचीत हुई है। इस दौरान ईरानी राष्ट्रपति ने पीएम मोदी से खास अपील की कि भारत अभी ब्रिक्स का अध्यक्ष और वो अमेरिका और इजरायल पर युद्ध खत्म करने के लिए दबाव डाले। उनका कहना है कि भारत के इन दोनों ही देशों के साथ अच्छे संबंध हैं।
प्रधानमंत्री के साथ बातचीत के दौरान पेजेशकियान ने कहा कि क्षेत्र में युद्ध और अस्थिरता खत्म करने के लिए सबसे पहले अमेरिका और इज़राइल को अपनी सैन्य कार्रवाई तुरंत बंद करनी होगी। साथ ही भविष्य में ऐसी कार्रवाई दोबारा न हो, इसके लिए गारंटी भी देनी होगी। उन्होंने कहा कि ईरान ने कभी परमाणु हथियार नहीं बनाए और न ही बनाने का इरादा है।
उनके पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने धार्मिक और प्रशासनिक रूप से परमाणु हथियारों के खिलाफ सख्त फतवा जारी किया था। अमेरिका का दावा कि ईरान पर हमले इसलिए किए गए क्योंकि वो परमाणु हथियार बना रहा था, उसे उन्होंने खारिज कर दिया। उन्होंने पश्चिम एशिया के देशों के बीच एक क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा बनाने का सुझाव दिया, जिसमें कोई विदेशी हस्तक्षेप न हो।
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भारत ब्रिक्स का बॉस
पेजेशकियान ने पीएम मोदी से कहा कि भारत ब्रिक्स का बॉस (अध्यक्ष) है, इसलिए ब्रिक्स को स्वतंत्र भूमिका निभानी चाहिए। ब्रिक्स को अमेरिका-इज़राइल की तरफ से ईरान पर हो रही कार्रवाइयों को रोकने में मदद करनी चाहिए। इससे क्षेत्रीय और वैश्विक शांति बनी रहेगी। ब्रिक्स में अब 10 सदस्य हैं – ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका के अलावा 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई भी शामिल हो गए। ईरान चाहता है कि ब्रिक्स इस मुश्किल वक्त में मजबूत और रचनात्मक भूमिका निभाए।
पीएम मोदी का रुख
पीएम मोदी ने बातचीत में पश्चिम एशिया में महत्वपूर्ण ढांचों पर हमलों की निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसे हमले क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालते हैं और वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होती है। उन्होंने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आजादी और सुरक्षित आवाजाही पर जोर दिया। मोदी ने कहा कि मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीति ही रास्ता है। उन्होंने ईद और नवروز की बधाई दी और उम्मीद जताई कि ये त्योहार इलाके में शांति, स्थिरता और समृद्धि लाएं। मोदी ने ईरान का शुक्रिया अदा किया कि वो वहां भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का ध्यान रख रहा है।
गौरतलब है कि अमेरिका और इज़राइल ने 28 फरवरी से उस पर हमले शुरू किए, जिसके जवाब में ईरान ने भी कुछ कदम उठाए। इस वजह से इलाके में तनाव बढ़ गया है। खासकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर असर पड़ा है, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल और गैस गुजरता है। अब वहां जहाजों की आवाजाही कम हो गई है।

















