भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पर्यावरण और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पान मसाला की पैकेजिंग को लेकर नए नियम लागू किए हैं। इसके तहत अब पान मसाला की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक, पीवीसी, को-पॉलिमर और अन्य सिंथेटिक पॉलिमर पर पूरी तरह बैन लगा दिया गया है। इससे संबंधित अधिसूचना 7 अगस्त को जारी कर दी गई है, जिसमें खाद्य सुरक्षा एवं मानक (पैकेजिंग) विनियम, 2018 में संशोधन किया गया है।
नया नियम सोमवार, (10 अगस्त) 2026 से लागू हो चुका है। संशोधित नियम में पान मसाला को कागज, पेपरबोर्ड, सेल्यूलोज या अन्य प्राकृतिक रूप से प्राप्त सामग्रियों का उपयोग करके पैक किया जा सकता है। एफएसएसआई के इस कदम से पान मसाला कंपनियों को बड़ा झटका लगा है।
अब क्या करना होगा?
खाद्य सुरक्षा एवं मानक पैकेजिंग संशोधन विनियम, 2026 के अनुसार, अब पान मसाला कंपनियों को पैकेजिंग के लिए पूरी तरह से इको-फ्रेंडली और प्राकृतिक विकल्पों को ही अपनाना होगा। एफएसएसएआई ने अधिसूचना में स्पष्ट किया है कि पान मसाला की पैकिंग के लिए सिर्फ कागज, पेपर बोर्ड, सेल्यूलोज या प्राकृतिक स्रोतों से बनी सामग्री का ही इस्तेमाल किया जा सकता है। इनमें किसी भी तरह का प्लास्टिक या प्रतिबंधित को-पॉलिमर मिला हुआ न हो। इसके अलावा, कंपनियां टिन के डिब्बों या कांच के कंटेनरों में भी पान मसाला पैक करके बेच सकती हैं।
नए नियम जारी करने के मुख्य उद्देश्य
पैकेजिंग को लेकर कड़े नियम जारी करने का मुख्य उद्देश्य पान मसाला के छोटे-छोटे पाउच से होने वाले प्लास्टिक कचरे पर लगाम लगाना है। प्लास्टिक और मल्टी-लेयर सैशे आसानी से रीसाइकिल नहीं हो पाते हैं, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है। एफएसएसएआई ने अधिसूचना में ‘प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016’ का हवाला देते हुए यह कदम उठाया है, जिसके तहत गुटखा, तंबाकू और पान मसाला को प्लास्टिक के छोटे पैकेटों में रखने या बेचने पर पहले से ही पाबंदी का प्रावधान था। अब इसे सख्ती से लागू किया जा रहा है।
पेपर इंडस्ट्री और पैकेजिंग कंपनियों को इससे फायदा होगा। बाजार में इको-फ्रेंडली पैकेजिंग की मांग बढ़ेगी, जिससे पेपर बोर्ड, सेल्यूलोज और सस्टेनेबल पैकेजिंग सॉल्यूशंस देने वाले स्टार्टअप्स तथा उद्योगों को लाभ होगा।













