नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया। उसने साफ कहा कि युद्ध केवल उसकी तय शर्तों और समय के अनुसार ही समाप्त होगा।
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक ईरान ने अमेरिकी प्रस्ताव को “भ्रामक” और “तनाव बढ़ाने वाला” बताया। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अमेरिका अलग-अलग कूटनीतिक माध्यमों से बातचीत की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसके प्रस्ताव जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते।
ईरान ने युद्ध समाप्ति के लिए पांच प्रमुख शर्तें रखी हैं
- सभी हमलों और लक्षित हत्याओं को तुरंत रोकना
- भविष्य में हमले न होने की ठोस गारंटी
- युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई
- पूरे क्षेत्र में सभी मोर्चों पर संघर्ष का अंत
- होर्मुज स्ट्रेट पर अपने अधिकार को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाना
तेहरान ने स्पष्ट किया है कि इन शर्तों के पूरा होने से पहले किसी भी प्रकार की वार्ता संभव नहीं है और वह अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा।
क्या है अमेरिकी प्रस्ताव
- ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त नियंत्रण
- यूरेनियम संवर्धन रोकना
- मिसाइल कार्यक्रम सीमित करना
- क्षेत्रीय समूहों से दूरी बनाना
अमेरिका ने इसके बदले प्रतिबंधों में राहत और नागरिक परमाणु सहयोग की पेशकश की है।
भारत मित्र देश है : ईरान
वहीं अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने भारत को लेकर बड़ी बात कही। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने कहा कि भारत मित्र देश है। अपनी संतुलित विदेश नीति और कूटनीति के चलते वह तनाव कम करने और बातचीत को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है। भारत के सभी पक्षों के साथ ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध हैं।
















