मध्य प्रदेश में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इंदौर नगर निगम से शुरू हुई यह बहस अब पूरे प्रदेश में फैल चुकी है। सीहोर के आष्टा में आयोजित एक सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मुद्दे पर कांग्रेस को जमकर घेरा और राष्ट्रभक्ति के मुद्दे पर कोई भी समझौता न करने की बात कही।
सीहोर के आष्टा में महिला सशक्तीकरण सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर नगर निगम की घटना पर अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने कांग्रेस की नीतियों को विभाजनकारी बताते हुए कहा कि जिस राष्ट्रगीत के सम्मान में क्रांतिकारियों ने अपनी जान न्यौछावर कर दी, उसका अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राष्ट्र के प्रतीकों का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश में रहकर राष्ट्रगीत और राष्ट्र के प्रतीकों का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा, “यदि इस देश का खाते हो तो वंदे मातरम कहना ही पड़ेगा।”
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा तुष्टीकरण और वोट बैंक के लिए राष्ट्र गौरव को दांव पर लगाया है। पहले वंदे मातरम् के टुकड़े किए और फिर देश का बंटवारा करवाया।
पीएम मोदी ने पूरे देश को राष्ट्रवाद के सूत्र में बांधा
सीएम ने कहा कि जहां एक तरफ कांग्रेस के नेता ‘भारत माता की जय’ बोलने में हिचकिचाते हैं, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश को राष्ट्रवाद के सूत्र में बांधा है। राजनीतिक विवाद के बीच मुख्यमंत्री ने आष्टा में प्रदेश की बहनों को सौगात दी। उन्होंने एक सिंगल क्लिक के जरिए प्रदेश की 1.25 करोड़ लाड़ली बहनों के खातों में मासिक किस्त के रूप में कुल 1,836 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। साथ ही क्षेत्र के विकास के लिए लगभग 185 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार महिला सशक्तिकरण और जनकल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।
इंदौर नगर निगम के बजट सत्र से शुरू हुआ विवाद
विवाद की असली शुरुआत इंदौर नगर निगम के बजट सत्र के दौरान हुई। यहां राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर सत्तापक्ष (भाजपा) और विपक्ष (कांग्रेस) के बीच तीखी बहस हुई। भाजपा पार्षदों ने कांग्रेस की दो मुस्लिम महिला पार्षदों फौजिया शेख अलीम और रुबीना इकबाल खान पर राष्ट्रगीत का अपमान करने का आरोप लगाया। दोनों पार्षदों ने वंदे मातरम गाने से इनकार किया।
फौजिया शेख ने क्या कहा
सदन से एक दिन के लिए निष्कासित की गईं पार्षद फौजिया शेख ने मीडिया से कहा कि भारतीय संविधान किसी को भी ‘वंदे मातरम’ या ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए मजबूर नहीं करता। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान गाना जरूरी है, लेकिन किसी गीत को गाना अनिवार्य नहीं है। फौजिया ने मीडिया से बात करते हुए यह भी कहा था कि कुछ लोग इस देश में भारत माता की पूजा करते हैं, लेकिन वह ऐसा नहीं करतीं।
रुबीना इकबाल खान का बयान
वार्ड 39 की पार्षद रुबीना इकबाल खान भी इस विवाद में सक्रिय रहीं। उन्होंने भी फौजिया का समर्थन किया। इसी के चलते सदन का माहौल तनवापूर्ण हो गया और सभापति ने फौजिया शेख को एक दिन के लिए निष्कासित कर दिया। भाजपा का आरोप है कि बहस के दौरान उन्होंने कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं, जिससे सदन का माहौल तनावपूर्ण हो गया और भाजपा पार्षदों ने सदन में जमकर वंदे मातरम और जय श्रीराम के नारे लगाए।

















