मध्य प्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड- UCC) को मंजूरी देकर एक बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगी। सरकार का कहना है कि इस कानून का मकसद सभी नागरिकों के लिए एक जैसे नियम लागू करना है, ताकि शादी, तलाक और परिवार से जुड़े मामलों में सभी के साथ समान व्यवहार हो। अब इस बिल को विधानसभा में पेश किया जाएगा। अगर यह पास हो जाता है, तो मध्य प्रदेश UCC लागू करने वाले राज्यों में शामिल हो जाएगा।
10 लाख से ज्यादा लोगों ने दिए सुझाव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, UCC का मसौदा तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई थी। समिति ने सोशल मीडिया, एसएमएस और अन्य माध्यमों से लोगों के सुझाव लिए। सरकार का दावा है कि 10 लाख से ज्यादा लोगों ने अपनी राय दी, जिनमें करीब 94 प्रतिशत लोगों ने UCC का समर्थन किया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सुझाव देने वालों में लगभग 80 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं और 40 प्रतिशत मुस्लिम पुरुषों ने भी इस कानून के पक्ष में अपनी राय रखी।
शादी और लिव-इन के लिए होंगे नए नियम
सरकार के मुताबिक, UCC लागू होने के बाद राज्य में हर शादी का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। शादी के लिए दूल्हे की न्यूनतम उम्र 21 साल और दुल्हन की उम्र 18 साल तय रहेगी। कोई भी व्यक्ति कानूनी तलाक के बाद ही दूसरी शादी कर सकेगा। इसके अलावा लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए भी रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा। सरकार का कहना है कि इससे लोगों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे और कानूनी विवाद कम होंगे। कानून में यह भी प्रावधान है कि शादीशुदा व्यक्ति के किसी अन्य व्यक्ति के साथ संबंध बनाने पर पांच साल तक की जेल की सजा हो सकती है।
आदिवासी समुदाय को छूट, अन्य कानूनों को भी मंजूरी
सरकार ने आदिवासी समुदाय की परंपराओं का सम्मान करते हुए उन्हें UCC के दायरे से बाहर रखा है। इसके अलावा कैबिनेट ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट, फायर सेफ्टी एक्ट, हेल्थ यूनिवर्सिटी एक्ट और मध्य प्रदेश हाईवेज 2026 बिल को भी मंजूरी दी है। सरकार का मानना है कि इन फैसलों से राज्य के विकास को नई गति मिलेगी। वहीं, UCC को लेकर अब सभी की नजर विधानसभा पर रहेगी, जहां इस बिल पर चर्चा के बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा।

















