भारत की असैन्य परमाणु यात्रा में सोमवार का दिन ऐतिहासिक रहा। कल्पक्कम में स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित ‘प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ (PFBR) ने ‘क्रिटिकैलिटी प्राप्त कर ली है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इसकी जानकारी दी।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया के जरिये वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई देते हुए कहा कि आज, भारत ने अपनी असैन्य परमाणु यात्रा (Civil Nuclear Journey) में एक निर्णायक कदम उठाया है, जिसके साथ ही हमारे परमाणु कार्यक्रम का दूसरा चरण आगे बढ़ गया है। कल्पक्कम में स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित ‘प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ (PFBR) ने ‘क्रिटिकैलिटी’ (Criticality) प्राप्त कर ली है।
यह उन्नत रिएक्टर, जो अपनी खपत से अधिक ईंधन पैदा करने में सक्षम है, हमारी वैज्ञानिक क्षमता की गहराई और हमारे इंजीनियरिंग कौशल की शक्ति को दर्शाता है। यह कार्यक्रम के तीसरे चरण में हमारे विशाल थोरियम भंडारों का उपयोग करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। भारत के लिए एक गर्व का क्षण। हमारे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बहुत-बहुत बधाई।”
क्या है क्रिटकैलिटी का मतलब
इसका मतलब है कि रिएक्टर के अंदर परमाणु विखंडन (Nuclear Fission) की श्रृंखला अभिक्रिया (Chain Reaction) अब स्थिर और नियंत्रित हो गई है। परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अनुसार परमाणु रिएक्टर की वह अवस्था क्रिटिकैलिटी कहलाती है जब विखंडन द्वारा इतने न्यूट्रॉन उत्पन्न हो जाते हैं कि रिसाव या अवशोषण के कारण नष्ट हुए न्यूट्रॉन की भरपाई हो जाती है, जिससे विखंडन में उत्पादित न्यूट्रॉन की संख्या स्थिर बनी रहती है।
सफलता का प्रमाण: यह साबित करता है कि वैज्ञानिकों ने रिएक्टर को जिस तरह डिजाइन और बनाया है, वह पूरी तरह सही काम कर रहा है।
स्वदेशी तकनीक की जीत: यह दिखाता है कि भारत ने जटिल ‘फास्ट ब्रीडर’ तकनीक पर महारत हासिल कर ली है।
क्यों खास है यह रिएक्टर?
- यह भारत के थ्री स्टेज परमाणु कार्यक्रम का दूसरा चरण है
- यह भविष्य में भारत के विशाल थोरियम भंडार के उपयोग का रास्ता साफ करेगा, जिससे भारत ऊर्जा के क्षेत्र में लाभ मिलेगा

















