अनुसूचित समाज के अधिकारों पर डाका नहीं डालने देंगे : विहिप
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अनुसूचित समाज के अधिकारों पर डाका नहीं डालने देंगे : विहिप

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि यह निर्णय संविधान की मूल भावना, सामाजिक न्याय और विधि के शासन को सुदृढ़ करने वाला है।

Written byPanchjanyaPanchjanya
Apr 1, 2026, 08:03 am IST
inभारत, विश्लेषण
विहिप के संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन

विहिप के संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि यह निर्णय संविधान की मूल भावना, सामाजिक न्याय और विधि के शासन को सुदृढ़ करने वाला है। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि कन्वर्जन के पश्चात कोई भी व्यक्ति अनुसूचित जाति (एससी) की संवैधानिक श्रेणी में नहीं आता और ऐसे में उसे एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत संरक्षण प्राप्त नहीं हो सकता। यह निर्णय संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 की भावना के भी अनुरूप है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि केवल हिंदू, सिख और बौद्ध मत के अनुयायी ही अनुसूचित जाति की श्रेणी में आते हैं।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय उन प्रवृत्तियों पर अंकुश लगाने वाला है, जिनमें कुछ लोग कन्वर्जन के बाद भी पूर्व जातिगत पहचान के आधार पर संवैधानिक लाभ प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। इस निर्णय से कन्वर्जन माफिया पर गहरी चोट लगी है। ईसाई व मुस्लिम नेता एक ओर तो कहते हैं कि उनका पंथ समतावादी है, उनके यहां जाति-पाति की व्यवस्था नहीं है वहीं, दूसरी ओर वे दलित ईसाई व दलित मुस्लिम जैसे शब्दों की रचना करके उनके लिए आरक्षण की मांग करते हैं जिससे उनके कन्वर्जन के कुचक्रों को गति मिल सके। डॉ. जैन ने कहा कि अब भारत की धरती में उनके कुचक्र नहीं चल सकेंगे।

उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति के अधिकार और संरक्षण का उद्देश्य ऐतिहासिक सामाजिक अन्याय को दूर करना है, जो विशेष रूप से हिंदू समाज की संरचना में उत्पन्न हुआ था। अतः जब कोई व्यक्ति स्वेच्छा से कन्वर्ट होता है, तो वह उस सामाजिक संदर्भ से भी स्वयं को अलग कर लेता है, जिसके आधार पर ये विशेष अधिकार प्रदान किए गए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति पुनः हिंदू, सिख या बौद्ध पंथ में लौटता है और समाज द्वारा उसे स्वीकार किया जाता है, तभी वह पुनः अनुसूचित जाति के अधिकारों का पात्र बन सकता है।

डॉ. जैन ने कहा कि यह निर्णय देश में सामाजिक समरसता, पारदर्शिता और न्याय की स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विहिप के कार्यकर्ता देशभर में ऐसे लोगों की सूची बनाएंगे जिन्होंने अनुसूचित समाज के अधिकारों पर डाका डाला है और उनसे वे अधिकार छीनकर उन लोगों को दिलाएंगे जो उनके वास्तविक अधिकारी हैं।

Topics: अधिकार और संरक्षणकन्वर्जन माफियास्वेच्छा से कन्वर्जनFEAUREDपारदर्शिता और न्यायसंविधान की मूल भावनाविधि का शासनसंवैधानिक श्रेणीऐतिहासिक सामाजिक अन्यायधर्मांतरण और विरोधसामाजिक न्यायसमतावादी पंथधर्म परिवर्तनईसाई या इस्लामपाञ्चजन्य विशेषदलित ईसाई/मुस्लिमघरवापसी
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