स्वतंत्रता के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर पंडित गोविन्द वल्लभ पन्त का सबसे लम्बा कार्यकाल था। मगर अब तस्वीर बदल चुकी है। वर्तमान समय में योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश में सबसे लम्बे कार्यकाल के मुख्यमंत्री हो चुके हैं। योगी आदित्यनाथ ने 9 वर्ष पूरा कर के दसवें वर्ष में प्रवेश कर लिया है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में कानून एवं व्यवस्था एक बड़ा चुनावी मुद्दा था। यूपी का मुख्यमंत्री बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ शब्दों में कहा, “ अपराधी प्रदेश छोड़ दें।” जिन अपराधियों को ये बात नहीं समझ में आई, वे हाफ एनकाउंटर में घायल हुए या फिर मिट्टी में मिल गए।
बुलडोजर ने अपराधियों की अवैध सम्पत्ति को कुचला तो उसी बुलडोजर ने एक्सप्रेस-वे का मार्ग भी प्रशस्त किया। अपराध नियंत्रण हुआ तो प्रदेश में निवेशक आए। विकास ने गति पकड़ी। पर्यटक प्रदेश की तरफ आकर्षित हुए। आज विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश आगे बढ़ रहा है लेकिन साथ में चुनौतियां भी हैं। इस बड़ी आबादी वाले प्रदेश में परिवहन एवं स्वास्थ्य विभाग पर हर समय दबाव रहता है। अपराध नियंत्रण के लिए प्रत्येक दिन उतनी ही सख्ती बरतनी पड़ती है। इन्हीं चुनौतियों का सामना करते हुए योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश में सबसे दमदार नेता के तौर पर स्थापित हो चुके हैं।
“टेंपल इकोनॉमी” की ओर अग्रसर
वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश में 1 अरब 56 करोड़ से अधिक पर्यटकों का यूपी में आगमन हुआ, जिनमें करीब 36 लाख विदेशी पर्यटक शामिल हैं। घरेलू पर्यटन के मामले में यूपी देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के बाद वाराणसी में श्रद्धालुओं की संख्या में 4-5 गुना वृद्धि हुई है। अयोध्या, काशी और प्रयागराज जैसे प्रमुख तीर्थों में ही करीब 1.16 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ, जो कुल पर्यटक संख्या का लगभग 90 प्रतिशत है। गाजियाबाद में कैलाश मानसरोवर भवन का निर्माण भी किया गया है। पर्यटकों की सुविधा के लिए आगरा और मथुरा में हेलीपोर्ट शुरू किए गए हैं, जबकि लखनऊ, प्रयागराज और कपिलवस्तु में हेलीकॉप्टर सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। पर्यटन नीति-2022 के तहत अब तक 36,681 करोड़ रुपये से अधिक निवेश धरातल पर उतर चुका है, जिससे करीब 5 लाख रोजगार सृजित होने की संभावना है। युवाओं को पर्यटन से जोड़ने के लिए शोध, प्रचार और मॉनिटरिंग कार्यों में 40 हजार रुपये मासिक स्टाइपेंड देने की व्यवस्था की गई है।

दुग्ध संग्रहण में बना अग्रणी राज्य
उत्तर प्रदेश की करीब साढ़े तीन लाख ग्रामीण महिलाएं दुग्ध संग्रहण और उससे जुड़े कार्यों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनी हैं। किसानों और महिला समूहों को नियमित एवं पारदर्शी भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई है। दुग्ध व्यवसाय से गांवों में बड़े स्तर पर रोजगार सृजन हो रहा है। इससे महिलाओं की आय तो बढ़ी ही है, इसके साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है। दुग्ध उत्पादन में भी उत्तर प्रदेश नंबर-1 है। 2024-25 के आंकड़ों के मुताबिक दुग्ध उत्पादन में 388.15 लाख मीट्रिक टन के साथ उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्य है, जो लगभग 16.2 प्रतिशत का योगदान देश के कुल दुग्ध उत्पादन में करता है। यूपी को दुग्ध उत्पादन में अग्रणी बनाए रखने के लिए नंद बाबा दुग्ध मिशन लागू है। 2030 तक दुधारू पशुओं की उत्पादकता को दोगुना कर देश में सर्वोच्च बनाने का लक्ष्य है। वहीं निराश्रित गोवंश संरक्षण पर भी ध्यान दिया गया है। कुल 7,451 गो-आश्रय स्थलों में 12,38,181 गोवंश संरक्षित किए गए हैं। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना में 1.82 लाख से अधिक गोवंश पशुपालकों को सुपुर्द किए गए हैं। इनके भरण-पोषण के लिए प्रतिदिन 50 रुपये की दर से डीबीटी के माध्यम से भुगतान किया जा रहा है।
आधी आबादी की सुरक्षा
कन्या सुमंगला योजना के अंतर्गत अब तक 26.81 लाख बेटियों को लाभान्वित किया गया है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के माध्यम से 1 लाख 5 हजार से अधिक बेसहारा बच्चों को संरक्षण दिया गया। वहीं मिशन वात्सल्य योजना के अंतर्गत 1 लाख से अधिक बच्चों को उनके बिछड़े परिवारों से मिलाया गया है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से 60 लाख माताएं लाभान्वित हुई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसव पर 1400 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 1 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। 2016 में यूपी-112 का जो रिस्पॉन्स टाइम 1 घंटा 5 मिनट था, वह 2025 में घटकर मात्र 6 मिनट 41 सेकंड रह गया है। बलात्कार की घटनाओं में 33.92%, अपहरण में 17.03 प्रतिशत, दहेज हत्या में 12.96 प्रतिशत और घरेलू हिंसा में 9.54 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
यूपी पुलिस में महिलाओं के लिए 20 फीसदी पद आरक्षित किए गए हैं। वर्तमान समय में 44 हजार से अधिक महिलाएं पुलिस बल में नियुक्ति पा चुकी हैं। 3 नई महिला P.A.C. बटालियन का गठन और हर जिले में एंटी रोमियो स्क्वायड की तैनाती की गई है। प्रदेश में महिला सुरक्षा को मजबूत करने के अब तक 5 करोड़ से अधिक व्यक्तियों की जांच, 1.85 करोड़ को चेतावनी और 38,835 लोगों के खिलाफ कानूनी की गई है। महिला संबंधी मामलों में 98.90 प्रतिशत निस्तारण दर के साथ उत्तर प्रदेश देश में शीर्ष स्थान पर है। प्रभावी पैरवी के चलते महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ अपराध के 32,575 मामलों, 14,111 पॉक्सो मामलों और 4,564 बलात्कार के मामलों में दोषियों को सजा दिलाई गई है।
आत्मनिर्भर अन्नदाता
वर्ष 2017 से पहले जो किसान आत्महत्या पर मजबूर था, वह आज कर्ज मुक्त होकर सम्मान के साथ फिर उत्पादक की श्रेणी में खड़ा है। वर्ष 2017 में सत्ता संभालते ही अन्नदाताओं की ऋण माफी के निर्णय से 86 लाख से अधिक किसान लाभान्वित हुए। किसान को आर्थिक सहायता मिली तो यूपी की कृषि विकास दर जो 2016-17 में मात्र साढ़े 8 प्रतिशत थी, 2025-26 में बढ़कर 18 फीसदी हो गई। फसल बीमा योजना, किसान सम्मान निधि, कृषि यंत्र अनुदान, ट्यूबवेल को मुफ्त बिजली जैसी अनेक योजनाओं में किसानों को मजबूत किया गया। देश की कुल कृषि योग्य भूमि का 11 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में है, जबकि खाद्यान्न उत्पादन में उत्तर प्रदेश 21 प्रतिशत का योगदान कर रहा है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 353.14 लाख बीमित किसानों को 5660.33 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति दी गई है। किसान क्रेडिट कार्ड के अंतर्गत 2024-25 तक 437.68 लाख किसान क्रेडिट कार्ड दिए गए, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में फरवरी तक 70.36 लाख किसान क्रेडिट कार्ड विभिन्न बैंकों द्वारा किसानों को वितरित किए जा चुके हैं। उत्तर प्रदेश में 2,88,70,495 किसानों की फार्मर आईडी बनाने का लक्ष्य है। इसके सापेक्ष अब तक 1,99,42,798 फार्मर रजिस्ट्री बनाई जा चुकी हैं। उत्तर प्रदेश में 2016-17 में कृषि व संबद्ध क्षेत्र में सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 2.96 लाख करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 6.95 लाख करोड़ रुपये हो गया। राज्य में कुल उपलब्ध भूमि का 76 फीसदी कृषि कार्य के लिए उपयोग किया जा रहा है।
वैकल्पिक ऊर्जा से बदलेगी तस्वीर
उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति-2017 और 2022 के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य में सौर क्षमता बढ़कर 5 हजार मेगावाट से अधिक हो गई है। प्रदेश में 4 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित हो चुके हैं, जिससे उत्तर प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।
सौर ऊर्जा नीति-2022 के तहत 22 हजार मेगावाट सौर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए बड़े सोलर पार्क, अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट्स और सरकारी भवनों पर उपकरण लगाए जायेंगे। ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं पर भी कार्य शुरू किया गया है। टोरेंट पावर द्वारा गोरखपुर में 0.5 मेगावाट का ग्रीन हाइड्रोजन पायलट प्रोजेक्ट स्थापित किया जा रहा है, जिसकी उत्पादन क्षमता लगभग 9 किलोग्राम प्रति घंटा है। वहीं जीरो फुटप्रिंट इंडस्ट्रीज प्रा लि द्वारा रामपुर में 22.5 किलोग्राम प्रति घंटा क्षमता का ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र स्थापित किया जा रहा है।
निवेशकों की पसंद उत्तर प्रदेश
एमएसएमई सेक्टर में लगभग 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए हैं, जिनसे 1 करोड़ 10 लाख से अधिक युवाओं के लिए रोजगार और सेवायोजन के अवसर सृजित होने की संभावना बनी है। इनमें से लगभग 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं, जिनसे करीब 60 लाख रोजगार के अवसर तैयार हुए हैं। जिसका सीधा लाभ युवाओं को रोजगार के रूप में मिल रहा है। निवेश के साथ उद्योगों के विस्तार से प्रदेश में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।
प्रदेश में 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां हैं जो देश में सर्वाधिक हैं। एमएसएमई क्षेत्र के माध्यम से प्रदेश में 3 करोड़ 11 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के अंतर्गत अब तक 38 हजार से अधिक युवाओं को लाभान्वित किया गया है और 1097.10 करोड़ रुपये से अधिक की मार्जिन मनी वितरित की गई है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के अंतर्गत 32,936 लाभार्थियों को 1105.49 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी दी गई, जिससे 2 लाख 63 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के अंतर्गत 4 लाख 20 हजार से अधिक कारीगरों और पारंपरिक श्रमिकों को लाभान्वित किया गया है।
प्रदेश में डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 5.76 करोड़ से अधिक इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड तैयार किए हैं।
माइक्रोसाइट प्रोजेक्ट के तहत 35 माइक्रोसाइट्स का संचालन किया जा रहा है, जहां 4.4 लाख से अधिक रिकॉर्ड पंजीकृत कर प्रदेश ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। गर्भवती महिलाओं को निःशुल्क अल्ट्रासाउंड के लिए ई-वाउचर की सुविधा दी गई है। जननी सुरक्षा योजना के तहत 13,51,044 लाभार्थियों को लाभ मिला है। बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 8,79,642 बच्चों का उपचार किया गया है 22,681 आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर संचालित हैं। आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट के तहत 13.18 करोड़ से अधिक लोगों का पंजीकरण किया गया है।
चुनौतियां
- उत्तर प्रदेश के 75 जनपदों में विकास के आधार पर काफी असमानता है। यही नहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अपेक्षा पूर्वी उत्तर प्रदेश, विकास की रफ्तार में काफी पिछड़ा हुआ है।
- औद्योगिक विकास में पश्चिमी उत्तर प्रदेश आगे होने के साथ साथ कृषि में भी अग्रणी है। अभी हाल ही में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अपने गृह जनपद देवरिया में कहा कि बहुत प्रयास के बाद भी पूर्वी उत्तर प्रदेश का किसान गेहूं उत्पादन में पश्चिम के मुकाबले काफी पिछड़ जा रहे हैं।
- चीनी मिल आदि को शुरू कराया गया है। निवेशकों को पूर्वी उत्तर प्रदेश में निवेश करने के लिए यूपी सरकार ने सुविधा दी है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के साथ ही हवाई मार्ग से भी कनेक्टिविटी बढ़ाई गई है। टेंपल इकानामी पर भी बल दिया जा रहा है। मगर अभी भी रोजगार की तलाश में लोग मुम्बई, दिल्ली और अन्य महानगरों की तरफ जा रहे हैं।
- योगी सरकार ने 2029-30 तक यूपी को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य है। यह एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है।
- प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव की आवश्यकता है। सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि प्राथमिक स्कूलों में छात्र छात्राओं की संख्या बढ़े। मगर कई ऐसे स्कूल भी हैं जहां छात्र छात्राओं की संख्या बहुत कम है। बहरहाल, यूपी सरकार स्कूलों में दाखिला बढ़ाने के लिए अभियान शुरू करने जा रही है।
- एक समय था जब प्रत्येक छात्र के लिए स्नातक होना एक तरीके से अनिवार्य माना जाता था। आज की तारीख में उच्च शिक्षा का पैटर्न पूरी तरह बदल चुका है। अब इंटरमीडिएट के बाद ही छात्रों का लक्ष्य निर्धारित हो जाता है। ऐसे में विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए बीए, बीकॉम एवं बीएससी जैसे कोर्सेज आने वाले वर्षों में अप्रासंगिक होते चले जाएंगे।

















