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राजसमढियाला गांव : फेंका कचरा, हुई कार्रवाई

अगर आप राजकोट जिले के राजसमढियाला गांव में जाकर कहीं भी कचरा फेंकते हैं, गाली-गलौज करते हैं या वोट नहीं देते हैं, तो आपको जुर्माना देना होगा।

Written byसोनल अनडकटसोनल अनडकट
Mar 19, 2026, 02:23 pm IST
inभारत, विश्लेषण, पर्यावरण, गुजरात

अगर आप गुजरात के राजकोट जिले के राजसमढियाला गांव में कहीं भी कचरा फेंकते हैं, गाली-गलौज करते हैं या वोट नहीं देते हैं, तो आपको जुर्माना भरना पड़ता है। राजसमढियाला गांव को आदर्श गांव का सम्मान मिल चुका है। यहां की साफ-सफाई, पीने के पानी की व्यवस्था, वॉटर प्यूरीफायर प्लांट जैसी सुविधाएं भी हैं। गांव की सुविधाएं शहरों को भी टक्कर देती हैं।

गांव के अपने नियम कायदे हैं। ये नियम कायदे वर्ष 1983 में बनाए गए थे। पहले वर्ष नियम तोड़ने वाले लोगों से 30,000 रुपए का जुर्माना वसूला गया था। धीरे-धीरे गांव वाले अनुशासन के प्रति सजग होते गए। अब गांव में सभी नियम-कायदों के साथ रहते हैं। गांव के अपने नियमों के साथ-साथ, गांव की अपनी लोक अदालत भी है। अगर किसी के भी घर में कोई समस्या आती है तो पहले उन्हें गांव की लोक अदालत में जाना होता है। वहीं पर सबका निबटारा हो जाता है। वहां के लोगों के अनुशासित रहने का यह प्रमाण है कि स्वतंत्रता के बाद से आज तक राजसमढियाला में एक भी पुलिस केस नहीं हुआ है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गांव में सभी का वोट देना अनिवार्य है। यदि वोट नहीं देते हैं, तो उन्हें जुर्माना भरना पड़ता है। दूसरी तरफ, राजसमढियाला में किसी भी राजनीतिक दल को चुनावी प्रचार करने की भी अनुमति नहीं है। ऐसी व्यवस्था गांव में शांति का माहौल बनाए रखने के लिए बनाया गया है। यहां की एक और विशेषता है कि ग्राम पंचायत चुनाव की आवश्यकता नहीं पड़ती है। जब से पंचायती राज आया है, राजसमढियाला में पंचायत चुनाव में हमेशा सर्वसम्मति से उम्मीदवारों का चुनाव हो जाता है। गांव में शांति और भाईचारे का माहौल बनाए रखने में ‘इलेक्शन के बजाय सलेक्शन‘ का फार्मूला सफल है। ऐसा कहा जाए कि पंचायत समरस बनी रहती है, तो यह अतिशयोक्ति नही होगी।

गांव के सरपंच हरदेवसिंह जडेजा बताते हैं कि गांव में जो पीसीसी रोड बनी है, वह पंद्रह साल से दुरूस्त है। गांव के चारों ओर हरियाली है। वर्ष 1985 में गांव में 5,000 पेड़ थे, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 65,000 हो गए हैं। अगर कोई पेड़ काटता है, तो पंचायत जुर्माना भी लगाती है। पूरे गांव में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इससे लोग सुरक्षित माहौल में जीवन जीते हैं।

गांव के कचरे को इकट्ठा करके उससे जैविक खाद बनाई जाती है। यह खाद यहां के किसानों को खेती के लिए निशुल्क उपलब्ध करवाई जाती है। राजसमढियाला में सभी सरकारी योजनाएं भी लागू की गई हैं। गंदे पानी को साफ करने के लिए एक ग्रे वॉटर प्लांट बनाया गया है, जिसमें गंदे पानी को साफ करके लोगों के उपयोग के लिए आपूर्ति की जाती है। यहां हर घर में शौचालय है। इसके अतिरिक्त, विद्यालय, पीने का पानी जमा करने के लिए चेक डैम जैसी सुविधाएं हैं।

इन सभी सुविधाओं के लिए शत प्रतिशत गांववासी पंचायत को शुल्क देते हैं। सरकार से विकास के लिए जो धन राशि मिलती है उसका उपयोग गांव के अन्य विकास के कामों के लिए किया जाता है। राजसमढियाला को आधुनिक गांव बनाने की यह यात्रा 1983 में शुरू हुई थी, जब हरदेव सिंह पहली बार सरपंच बने थे। तब से गांव की विकास यात्रा निरंतर जारी है। यह गांव अपनी अनूठी पहचान को बनाए रखने के लिए आज भी तत्पर है।

Topics: ग्रे वॉटर प्लांटपाञ्चजन्य विशेषनियम-कायदेग्राम पंचायतआधुनिक गांवसरपंचFEAUREDस्वच्छताजैविक खादसामाजिकअनिवार्य मतदानपर्यावरणगुरु हमारे गांववृक्षारोपणलोक अदालतअनुशासनसमरस पंचायतआदर्श गांव
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