आरफा खानम शेरवानी को यूं तो कई कारणों से जाना जाता है, मगर उनकी मुख्य पहचान मुस्लिम पहचान को लेकर पत्रकारिता करने की है। वे भारत या कहें हिन्दू विरोधी चर्चा का केंद्र भी रहती हैं। सीएए आंदोलन के दौरान उनकी एक तहरीर बहुत प्रसिद्ध है, जिसमें वे खुलकर कहती हैं कि लोगों को अपनी स्ट्रेटजी बदलने की जरूरत है।
हालांकि उन्होंने अपनी स्ट्रेटजी नहीं बदली, वही रही है और वह है भारत विरोध की। उनकी रणनीति एक ही रहती है कि किसी भी प्रकार से भारत और हिंदुओं का विरोध किया जाए। हालांकि इस बार वह और भी आगे चली गई हैं। उनका एक वीडियो आया हुआ है। इस बार वे ईरान के राजदूत से वह उगलवाना चाह रही हैं, जो भारत के हित में नहीं है।
भारतीय जहाजों को मार्ग दे रहा ईरान
यह पूरा विश्व देख रहा है कि कैसे भारत के गैस भरे जहाज भारत आ रहे हैं। उन्हें मार्ग दिया जा रहा है। एक तरफ युद्ध है तो दूसरी ओर भारत के वे जहाज हैं, जो बिना किसी बाधा के भारत आ रहे हैं। यह भारत की कूटनीतिक सफलता है, जो इस स्थिति में भी गैस की आपूर्ति हो रही है। ईरान की तरफ से भी यह कहा जा रहा है कि वह भारत के जहाजों को मार्ग देगा। मगर फिर भी वह कौन सा कारण है जो आरफा खानम शेरवानी को न ही भारत की और न ही ईरान के राजदूत की बात पर विश्वास करने दे रहा है?
आरफा का वीडियो
आरफा का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह ईरान के राजदूत से भारत मे एलपीजी से भरे जहाज की अनुमति के विषय में प्रश्न कर रही हैं। वे किसी न किसी तरह से भारत सरकार की बात को झूठ साबित करना चाह रही हैं। अपने पूरे कथित पत्रकारिता करियर में हिन्दू और भाजपा की सरकारों के खिलाफ अफवाह फैलाने वाली आरफा भारत सरकार की आधिकारिक बात को, भारत सरकार के आधिकारिक बयान को झूठा साबित करना चाहती हैं।
अरफा खानम शेरवानी ईरान के राजदूत से पूछ रही हैं की क्या ईरान ने सच में दो एलपीजी जहाज को इजाजत दी है ? उन्होंने बोला हां दिया है फिर वह दोबारा घुमा फिरा कर पूछ रही है कि आपने इजाजत क्यों दिया? pic.twitter.com/RXLR4CB9Vc
— विश्व संवाद केन्द्र अवध , लखनऊ (VSK Lucknow) (@vskawadh) March 16, 2026
इसमें वे बार-बार पूछ रही हैं कि क्या ईरान ने सच में दो एलपीजी जहाज को इजाजत दी है ? ईरान के राजदूत ने बोला हां दिया है फिर वह दोबारा घुमा-फिराकर पूछ रही हैं कि आपने इजाजत क्यों दी है? वे पूछ रही हैं कि कुछ रिपोर्ट्स यह भी हैं कि ईरान ने अभी तक अनुमति नहीं दी है। इस पर ईरान के राजदूत का कहना था कि कल तक उन्हें यह पता था कि ईरान तैयार था। और चूंकि भारत के लोग बहुत ईमानदार और अच्छे हैं, तो उन्हें कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए।
आरफा की सोशल मीडिया टाइम लाइन
आरफा की सोशल मीडिया की टाइम लाइन पर जाने पर यह दिखाई देता है कि कैसे वह इन दिनों ईरान सरकार के पक्ष में लिख रही हैं। उन्होंने 8 मार्च को ईरान की उन लड़कियों को समर्पित किया, जिनकी मृत्यु स्कूल में अमेरिका के हमले में हुई थी। उन्होंने लिखा कि “इस महिला दिवस पर, मैं अपने विचार ईरान की उन छोटी बच्चियों को समर्पित करती हूं, जिनकी उनके स्कूल पर हुए हमले में जान चली गई। ताकतवर पुरुषों को महिलाओं और बच्चियों को अपने घिनौने युद्धों के बहाने के तौर पर इस्तेमाल करना बंद कर देना चाहिए।“
छोटे बच्चों और महिलाओं पर हिंसा किसी भी समाज और सरकार का सबसे निकृष्ट कदम होता है और इस अपराध की कोई सफाई नहीं है। अमेरिका के इस कदम की जितनी निंदा की जाए उतनी कम है। परंतु यह भी सच है कि ये वही आरफा हैं, जिन्होनें ईरान की उन महिलाओं के पक्ष में एक शब्द भी नहीं बोला है, जिन्हें सिर न ढकने के अपराध के चलते मार डाला गया है या जो लड़कियां ईरान के शासन के तमाम अत्याचारों का शिकार हुई हैं। आरफा की पूरी टाइम लाइन पर एक भी पोस्ट उन बहादुर मुस्लिम महिलाओं के लिए नहीं दिखती है, जो ईरान के शासन की कट्टरता से डरकर दूसरे देशों में रह रही हैं।
विदेशी महिलाओं पर उठाए सवाल
आरफा उन विदेशी महिलाओं पर भी अपनी टाइमलाइन पर प्रश्न उठा रही हैं, जो ईरान की उन बहादुर लड़कियों की आवाज बनी जिन्होंने अनिवार्य हिजाब का विरोध किया था और अपनी जान गंवाई थी। आरफा ने लिखा कि “वे श्वेत नारीवादी, जो ईरानी महिलाओं के विरोध-प्रदर्शनों में खुद को ही केंद्र में रखने से खुद को रोक नहीं पाती थीं-कैमरे के सामने अपने बाल काटती थीं और हर किसी को आज़ादी पर लेक्चर देती थीं-अब एकदम चुप हो गई हैं; ठीक उस समय, जब इज़रायल द्वारा छोटी ईरानी लड़कियों की हत्या की जा रही है। 95 लड़कियां मारी गई हैं! तो अब वे कहां हैं?”
इस पर लोगों ने आरफा को सोशल मीडिया पर आईना दिखाया कि वे उसी स्थान पर हैं, जहां पर आप तब थीं, जब ईरान के तानाशाह ने अपने ही 30 हजार नागरिकों को विद्रोह दमन के नाम पर मार डाला था।
अफगानिस्तान में हमले पर खामोशी
पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में नशा विरोधी अस्पताल पर हमला किया गया और लगभग चार सौ लोग मारे गए। परंतु आरफा का एक भी पोस्ट इस पर नहीं है। उन्होंने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की इस अस्पताल पर निंदा की पोस्ट को अवश्य रीपोस्ट किया है, परंतु उन्होंने इस हमले की निंदा की हो, या फिर यह लिखा हो कि यह किस प्रकार की मानसिकता के लोगों ने किया, ऐसा कुछ नहीं लिखा है।
आरफा ईरान को वर्तमान में इस्लाम जगत का निर्विवाद नेता निर्धारित कर चुकी हैं। परंतु इस नेता के राजदूत की बातों पर विश्वास न करके बार-बार एक ही बात पूछना भी अजीब ही है!

















