इजरायल और अमेरिका के द्वारा ईरान के खिलाफ छेड़े गए युद्ध के बाद इन दोनों ही देशों पर दबाव बनाने की नीयत से ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया। वहां से किसी भी जहाज के गुजरने पर रोक लगा दी। इसके बाद से मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ता ही जा रहा है। इस बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियन से फोन पर बातचीत की। साथ ही ऊर्जा और सामान की सप्लाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
इसको लेकर पीएम मोदी ने एक्स पर जानकारी दी। उन्होंने पोस्ट किया, राष्ट्रपति पेजेश्कियन से क्षेत्र में बनी गंभीर स्थिति पर बात की। साथ ही बढ़ते तनाव, आम नागरिकों की जान-माल की हानि और नागरिक ढांचे को हुए नुकसान पर गहरी चिंता जताई। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि तनाव के इस वक्त में भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता है कि पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीय नागरिक सुरक्षित रहें और ऊर्जा व सामान की सप्लाई बिना रुकावट चले।
संवाद और कूटनीति की अपील
साथ ही पीएम मोदी ने भारत की शांति और स्थिरता के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने सभी पक्षों से अपील की कि वे संवाद और कूटनीति के रास्ते पर लौटें, ताकि हालात सामान्य हो सकें। दोनों नेताओं ने संपर्क में बने रहने पर भी सहमति जताई।
यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष चरम पर पहुंच गया है। पिछले कुछ हफ्तों में हमले तेज हो गए हैं, जिससे पूरा पश्चिम एशिया प्रभावित है। आम लोगों की मौतें हो रही हैं, स्कूल जैसे नागरिक ठिकानों पर भी असर पड़ रहा है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसका बुरा असर दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक इलाकों की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है।
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होर्मुज का इस्तेमाल इजरायल के खिलाफ
ईरान की तरफ से नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अपना पहला बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान अपने खाड़ी अरब पड़ोसियों पर हमले जारी रखेगा और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने जैसे रणनीतिक फायदे का इस्तेमाल अमेरिका व इजरायल पर दबाव बनाने के लिए करेगा। उन्होंने एक स्कूल पर हुए हमले में मारे गए 165 लोगों समेत युद्ध में जान गंवाने वालों का बदला लेने की बात कही। ईरानी राष्ट्रपति ने भी कहा कि जब तक ईरान को सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती, तब तक उसके हमले रुकने वाले नहीं हैं।
दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वे ‘काम पूरा’ करेंगे और दावा किया कि ईरान लगभग पूरी तरह नष्ट हो चुका है। ऐसे में मोदी जी की यह बातचीत भारत की चिंता और शांति की कोशिश को दिखाती है, जहां भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता सबसे आगे है।
पहले भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों ने की थी बात
गौरतलब है कि इससे पहले भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष अराघची से बात की थी। इसके बाद आईआरजीसी ने भारतीय टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से निकलने की अनुमति दी थी।

















