SIR से क्यों घबराईं ममता बनर्जी? जानिए कैसे बिहार-दिल्ली के चुनाव नतीजों ने बढ़ाई टेंशन..?
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SIR से क्यों घबराईं ममता बनर्जी? जानिए कैसे बिहार-दिल्ली के चुनाव नतीजों ने बढ़ाई टेंशन..?

Mamata Banerjee का Kolkata में धरना, पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के Election Commission of India द्वारा किए जा रहे SIR के खिलाफ विरोध। बिहार 2005 और दिल्ली 2025 के चुनावी उदाहरणों के बीच उठे सवाल— क्या SIR से बदल सकते हैं चुनावी नतीजे?

Written byअभय कुमारअभय कुमार — edited by Shivam Dixit
Mar 11, 2026, 02:57 pm IST
inभारत, विश्लेषण
ममता बनर्जी (फोटो साभार: गोर्क)

ममता बनर्जी (फोटो साभार: गोर्क)

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शुक्रवार से कोलकाता में चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल में कराये गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआइआर ) में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ धरना पर हैं. सवाल यह हैं कि ममता बनर्जी एसआइआर से आखिर इतना परेशान क्यों हैं ? क्या ममता बनर्जी बिजर और नई दिल्ली प्रदेशों में एसआइआर के बाद होने वाले चुनावी परिणामों से परेशान हैं ?

2005 के बिहार विधानसभा चुनाव और राजनीतिक पृष्ठभूमि

बिहार में साल 2005 के फरवरी माह में विधानसभा के चुनाव हुए और लालू यादव की राष्ट्रीय जनता दल सबसे बड़ी पार्टी बनी. इस चुनाव परिणाम के बाद कोई भी दल या गठबंधन आवश्य्क बहुमत हासिल नहीं कर सका और बिहार विधानसभा को भंग करना पड़ाऔर राज्य में राष्ट्रपति शाशान लागु किया गया. उस समय केंद्र में यूनाइटेड प्रोग्रेसिव गठबंधन नीत मनमोहन सिंह की सरकार थी और बूटा सिंह बिहार के राज्यपाल थे.

के जे राव के नेतृत्व में मतदाताओं का पुनर्निरीक्षण

2005 फरवरी चुनाव के बाद चुनाव आयोग ने के जे राव को बिहार में विशेष चुनाव पर्यवेक्षक बनाकर भेजा.के जे राव ने बिहार में मतदाताओं का पुर्ननिरिक्षण कराया. इस पुर्ननिरिक्षण के बाद बिहार में 1301772 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से अलग अलग कारणों से हटाए गए. बिहार में 2005 फरवरी में जहाँ 52687663 मतदाता थे वही 2005 नवंबर विधानसभा चुनाव में 51385891 मतदाता बचे थे.

पुनर्निरीक्षण के बाद बिहार की सत्ता में बदलाव

यह पुर्ननिरिक्षण यूपीए सरकार के कार्यकाल में बूटा सिंह के राज्यपाल रहते हुए बिहार में के जे राव के देखरेख में हुआ था.के जे राव को इस चुनाव में अच्छे काम के परिणामस्वरूप कांग्रेस पार्टी ने इंडियन यूथ कांग्रेस के आंतरिक चुनाव के लिए के.जे. राव को चुनाव प्रभारी नियुक्त किया था. पुर्ननिरिक्षण मतदाता सूची से चुनाव कराने के बाद लालू यादव परिवार जिसका बिहार में 1990 से लगातार 15 वर्षों का साषाण था वो चुनाव हार गए और नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में पहली बार एनडीए नीत सरकार का गठन हुआ.

क्या बिहार में राजद की हार का कारण मतदाता सूची पुनर्निरीक्षण था?

क्या बिहार में राजद सरकार की हार बिहार में मतदाता सूची का पुर्ननिरिक्षण के कारण हुआ था ? ममता बनर्जी 2005 नवंबर में बिहार में मतदाता सूची का पुर्ननिरिक्षण के बाद हुए चुनाव में हार से खौफजदा हैं क्योंकि उनको एहसास हैं की एसआइआर के बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी की हार होगी.

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम से भी चिंता

इतना ही नहीं बल्कि ममता बनर्जी 2025 में केंद्रशासित प्रदेश दिल्ली में संपन्न विधानसभा के चुनाव परिणाम से भी परेशान हैं क्योंकि दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की सरकार लगातार तीन बार से चुनाव जीत रही थी. मगर 2025 में एसआइआर के बाद चुनाव होने के बाद आप की सरकार बुरी तरह चुनाव हार गई.

नई दिल्ली सीट पर अरविंद केजरीवाल की हार

इतना ही नहीं बल्कि नई दिल्ली विधानसभा सीट पर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल अपना चुनाव भी हार गए. नई दिल्ली विधानसभा सीट पर 2020 विधानसभा चुनाव के अपेक्षा 2025 में लगभग 25 प्रतिशत मतदाताओं के नाम एसआइआर प्रक्रिया में हटाए गए और केजरीवाल लगातार तीन बार इस सीट पर चुनाव जीतने के बाद इस बार यहाँ से हार गए. 2013 में पहली बार चुनाव लड़कर केजरीवाल ने तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को इस सीट पर बड़े मतो के अंतर् से चुनाव में शिकस्त दिया था.

बिहार और दिल्ली के परिणामों से ममता की चिंता

ममता बनर्जी बिहार विधानसभा चुनाव 2005 नवंबर के परिणाम और दिल्ली में 2025 के चुनाव परिणामो से काफी खौफजदा हैं. नई दिल्ली विधानसभा सीट पर केजरीवाल की 2025 में हार से ममता बनर्जी का अन्य कारणों से भी गहरा नाता हैं.

नई दिल्ली सीट से तृणमूल नेताओं का पुराना संबंध

ममता बनर्जी की पार्टी के दो लोकसभा सांसदों क्रीति आज़ाद और शत्रुघ्न सिन्हा का इस सीट से लगाव रहा हैं. 1993 में जब इस सीट का नाम गोल मार्केट था तब क्रीति आज़ाद ने इस सीट से जीत दर्ज़ किया था. अगले दो विधानसभा चुनाव में क्रीति आज़ाद और उनकी पत्नी पूनम आज़ाद इस सीट से उम्मीदवार थी.

नई दिल्ली सीट का राजनीतिक इतिहास

1992 में इस विधानसभा सीट के अंतर्गत आने वाले लोकसभा सीट नई दिल्ली के उपचुनाव में शत्रुघ्न सिन्हा ने कांग्रेस पार्टी के राजेश खन्ना को टक्कर दिया था. अतएव तृणमूल कांग्रेस पार्टी के नेतावो का इस सीट पर अच्छा पकड़ था और ममता बनर्जी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को अपना समर्थन भी दिया था.

इंडि गठबंधन में भी बढ़ी नाराजगी

कांग्रेस पार्टी जो इंडि गठबंधन का हिस्सा थी वो ममता बनर्जी के इस एकतरफा समर्थन से अंदर ही अंदर क्रोधित भी हुई थी. मगर ममता बनर्जी के समर्थन और उनको सांसदों का इस सीट पर गहरा नाता होने के बावजूद भी केजरीवाल की हार से ममता बनर्जी अपने राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव में काफी चिंतित हैं और इसी क्रम में वो धरने पर बैठी हैं.

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अभय कुमार
अभय कुमार
अभय कुमार, सीएसडीएस (CSDS ), इप्सोस (IPSOS) सहित कई रिसर्च और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। भारतीय राजनीति सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मामलो से जुड़े मुद्दों पर खास दिलचस्पी है और इसके लिए लिखते रहते हैं। [Read more]
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