भारत के पड़ोसी देश नेपाल में Zen-Z आंदोलन के बाद हाल ही में आम चुनाव संपन्न हुए हैं। इसमें बालेन शाह की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने बड़ा बहुमत हासिल कर लिया है। इसी के साथ उनकी सरकार बनना तय हो गया है। इस पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोदी ने नेपाल के लोगों और सरकार को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि ये ऐतिहासिक पड़ाव नेपाल की लोकतांत्रिक यात्रा में गर्व का पल है। साथ ही नई सरकार के साथ मिलकर काम करने की बात भी कही है।
Zen-Z प्रदर्शनों के बाद पहला चुनाव
दरअसल, ये चुनाव नेपाल के लिए इसलिए खास मायने रखते हैं क्योंकि ये पिछले साल हुए हिंसक जनरेशन-जेड विरोध प्रदर्शनों के छह महीने बाद हो रहे हैं। उन प्रदर्शनों में काफी हिंसा हुई थी और 77 लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद पुरानी सरकार गिर गई थी। अब चुनावों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के नेता बलेंद्र शाह (जिन्हें बालेन शाह भी कहते हैं) की पार्टी को भारी बहुमत मिलता दिख रहा है । बलेंद्र शाह पहले काठमांडू के मेयर रह चुके हैं और एक रैपर से राजनीतिज्ञ बने हैं। अभी वोटों की गिनती चल रही है, लेकिन आरएसपी का दबदबा साफ दिख रहा है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान
पीएम मोदी ने एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट करके लिखा – “मैं नेपाल के लोगों और सरकार को चुनावों के सफल और शांतिपूर्ण आयोजन के लिए हार्दिक बधाई देता हूं। मेरे नेपाली बहनों और भाइयों को अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इतने जोश से इस्तेमाल करते देख बहुत अच्छा लग रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “ये ऐतिहासिक पड़ाव नेपाल की लोकतांत्रिक यात्रा में गर्व का क्षण है। भारत एक करीबी दोस्त और पड़ोसी के रूप में नेपाल के लोगों और उनकी नई सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है। दोनों देश मिलकर शांति, प्रगति और समृद्धि की नई ऊंचाइयों को छू सकें, इसके लिए भारत का साथ अटल रहेगा।”
कौन हैं बलेंद्र शाह
बलेंद्र शाह 35 साल के हैं और अपनी पार्टी को ‘नेपाल फर्स्ट’ के नारे के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। वो हाइपर-नेशनलिस्ट अंदाज में दिखते हैं और कहते हैं कि नेपाल किसी भी बड़े देश के प्रभाव में नहीं आएगा – चाहे वो भारत हो, चीन हो या अमेरिका। पिछले साल उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट में तीनों देशों पर निशाना साधा था, लेकिन बाद में वो पोस्ट डिलीट कर दी। 2023 में उन्होंने अपने मेयर ऑफिस में ‘ग्रेटर नेपाल’ का नक्शा लगाया था, जिसमें भारत के कुछ इलाके नेपाल का हिस्सा दिखाए गए थे। ये कदम नेपाल की संसद में लगे अशोक साम्राज्य के नक्शे के जवाब में माना गया। उनकी पार्टी का कहना है कि वो बड़े देशों के साथ संतुलित रिश्ते रखेगी, लेकिन किसी के आगे नहीं झुकेगी।

















