नेपाल में आम चुनाव की सुगबुगाहट तेज होती जा रही है। पुराने जमे—जमाए और जनता से दुत्कारे मुख्य दल बेशर्मी के साथ नए-नए समीकरण बनाकर चुनाव में उतरने का मन गना चुके हैं। तो उधर जेन जी के अगुआ भी इस जंग में अपनी जीत दर्ज कराने की भरसक कोशिश में लग गए हैं। ताजा जानकारी के अनुसार, काठमांडू शहर के मेयर बालेन शाह को भी आरएसपी की तरफ से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया है। भंग हुई संसद की चौथी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी, आरएसपी या राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने आने वाले संसदीय चुनावों में मेयर बालेन शाह को उतारकर हिमालयी देश में सरगर्मी बढ़ा दी है। यह वही बालेन शाह हैं जिन्हें जेन जी आंदोलन के बाद देश का कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनाने की मांग ने जोर पकड़ा था, लेकिन बालेन ने शायद वातावरण को भांपकर पद न लेने की इच्छा जताई थी और खुद को ‘त्याग’ करने वाला दिखाने की कोशिश की थी। लेकिन अब प्रधानमंत्री पद के लिए अपना नाम आगे करके बालेन ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को सार्वजनिक कर दिया है।
दरअसल, आरएसपी के अध्यक्ष रबी लामिछाने और बालेन शाह, दोनों ही काठमांडू में लोकप्रिय माने जाते हैं। दोनों के बीच कल सुबह लंबी बातचीत के बाद समझौते पर पहुंचा गया है। इस समझौते का विस्तार बताता है कि दोनों पक्ष एक राजनीतिक पार्टी RSP के झंडे तले आने और आगे सत्ता साझा करने के लिए तैयार हुए हैं। यानी अगर बालेन के हाथ देश की कमान आई तो लामिछाने को भी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

समझौते के सात बिंदु हैं। इनमें प्रमुख शर्तें हैं कि लामिछाने RSP के केन्द्रीय अध्यक्ष के नाते काम देखेंगे, जबकि बालेन शाह संसदीय दल के नेता और आगामी चुनाव में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। यानी अब बालेन ने एक शहर के मेयर के अपने पद से राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में उतरने को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है।
आम चुनाव 5 मार्च 2026 को होने तय हैं। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों में उक्त दोनों पक्षों के बीच लंबी बातचीत हुई थी, जिसका मकसद पुरानी राजनीतिक पार्टियों से टक्कर लेने के लिए अपनी स्थिति मजबूत करना है। दोनों पक्षों ने इस समझौते को राजनीतिक एकता की ओर एक कदम बताया है।
बालेन शाह अभी तक राजनीतिक गलियारों से दूरी बनाते आए थे और मीडिया में भी बहुत कम ही दिखते हैं। बालेन ने पुरानी राजनीतिक पार्टियों के ‘भ्रष्ट’ नेतृत्व की खुलकर आलोचना की है। शायद इसीलिए उस देश के युवाओं के बीच उनकी एक खास छवि बनी है। वे पेशे से आर्किटेक्ट और रैपर हैं। बालेन को ही सितंबर की शुरुआत में Gen Z आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार बनाने में ‘किंगमेकर’ माना गया था। हालांकि अपने बयानों में बालेन शाह भारत विरोधी भावनाएं झलका चुके हैं इसलिए अगर वह प्रधानमंत्री चुने जाते हैं तो भारतीय कूटनीति को बदली परिस्थितियों के अनुसार व्यवहार करना होगा।
कभी पत्रकार रहे लमिछाने की भी युवाओं में अच्छी पकड़ थी, लेकिन राजनीति में आने के बाद उन पर कोऑपरेटिव संस्थाओं से जुड़े भ्रष्टाचार में शामिल होने के आरोप लगे थे और इसके लिए उन्हें जेल भी हुई थी। लेकिन पिछले दिनों कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें बेल पर रिहा किया गया है। तब से वह चुनाव से पहले अपनी पार्टी की स्थिति मजबूत करने के लिए Gen Z नेताओं और नई राजनीतिक ताकतों को साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं।
नेपाल के राजनीतिक विश्लेषक अरुण सुबेदी का मानना है कि अगर बालेन शाह और लामिछाने ने आने वाले चुनाव के लिए हाथ मिलाया है तो वे एक मजबूत राजनीतिक ताकत के तौर पर उभर सकते हैं। इससे नेपाल की राजनीति में सत्ता का समीकरण बदल सकता है, जिससे पुरानी पार्टियों का दबदबा कम हो सकता है।
समझौते में यह भी तय हुआ है कि राजनीतिक दल RSP नाम से काम करती रहेगी। समझौता कहता है कि पार्टी के अंदर जिम्मेदारियां युवा एक्टिविस्ट और अनुभवी विशेषज्ञों को समानुपातिक रूप से दी जाएंगी। दोनों पक्ष खुशहाली और सामाजिक न्याय के लक्ष्यों को पाने के लिए आवश्यक नीति, इंस्टीट्यूशनल और ढांचागत सुधारों को आगे बढ़ाने पर भी सहमत हुए हैं, जिससे आर्थिक और सामाजिक तरक्की और स्वच्छ राजनीति की नींव रखी जा सके।

















