ईरान के साथ युद्ध के बीच भू राजनीति पल-पल बदल रही है। जहां, एक तरफ तो ईरान खाड़ी देशों पर लगातार हमले करके तबाही मचा रहा है और सहयोगियों के जरिए अमेरिका पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी तरफ अब उसने खाड़ी देशों से अपने कृत्य के लिए माफी भी मांग ली है। हालांकि, राष्ट्रपति मसूद पजेशकियान ने स्पष्ट किया है कि वो खाड़ी देशों पर अगला हमला तब तक नहीं करेंगे, जब तक कि ईरान पर वहां से हमले नहीं किए जाते हैं।
द गॉर्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, पजेशकियान ने ये भी कहा है कि वो इन देशों में स्थित इजरायली और अमेरिकी ठिकानों पर हमला जारी रखेंगे। इसके साथ ही वो देश जहां पर अमेरिकी और इजरायली बेस नहीं हैं, वहां ईरान हमला नहीं करेगा और सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में भी ऐसा न हो।
ट्रंप पल-पल बदल रहे अपना बयान
वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गिरगिट की तरह ही हर पल अपना बयान बदल रहे हैं। पहले उन्होंने ईरान में जमीनी सेना उतारने से मना कर दिया था। लेकिन अब उन अटकलों को तेज कर दिया है कि वो कभी भी ईरान में अमेरिकी सैनिकों को उतार सकते हैं। अपने एय़रफोर्स वन विमान में पत्रकारों से बात करते हुए ग्राउंड ट्रूप्स भेजने को लेकर कहा, “यह सही सवाल नहीं है। इसके लिए बहुत अच्छा कारण होना चाहिए। अगर कभी ऐसा हुआ तो वे इतने तबाह हो जाएंगे कि जमीन पर लड़ ही नहीं पाएंगे।”
ईरान के परमाणु ठिकानों से परिष्कृत यूरेनियम सुरक्षित करने के लिए जमीनी बल उतारने के मुद्दे पर वह कहते हैं, “हमने अभी इस पर बात नहीं की, शायद बाद में करेंगे। अभी हम उन्हें तबाह कर रहे हैं। अभी नहीं करेंगे, लेकिन बाद में हो सकता है।”
ईरान में स्कूल पर हमले से झाड़ा पल्ला
इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के स्कूल पर की गई बमबारी में मारे गए बच्चों के मामले से कन्नी काट ली है। अमेरिका ने ये स्ट्राइक दक्षिणी ईरान में एक लड़कियों के एलीमेंट्री स्कूल पर किया था, जिसमें कम से कम 175 लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर बच्चे थे। यह हमला पास के आईआरजीसी के नौसैनिक बेस पर अटैक के साथ हुआ। लेकिन बड़ी ही चालाकी से ट्रंप ने इसका आरोप ईरान पर ही लगा दिया है। उनका कहना है कि ये ईरान ने ही किया है, क्योंकि उनकी मिसाइलों में दम नहीं है।

















