नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रणनीतिक मार्गदर्शन में भारत ने देश की संप्रभुता, कानून व्यवस्था और आर्थिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाले भगोड़े अपराधियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है. वर्ष 2019 से 2026 के दौरान भारत सरकार ने विश्व के 36 देशों से रिकॉर्ड 274 भगोड़े अपराधियों को सफलतापूर्वक प्रत्यर्पित (Extradited) कर भारत वापस लाया है.
पूर्ववर्ती सरकारों में राजनीतिक इच्छाशक्ति (Political Will) के अभाव के विपरीत, मोदी सरकार ने भगोड़े अपराधियों के प्रत्यर्पण को अपनी सर्वोच्च ‘राष्ट्रीय प्राथमिकता’ बनाया है. गृह मंत्रालय ने भगोड़ों के खिलाफ एक एकीकृत, खुफिया-आधारित (Intelligence-based) और प्रौद्योगिकी-संचालित (Tech-driven) त्रिस्तरीय मॉडल- वैश्विक संचालन, मजबूत समन्वय और स्मार्ट कूटनीति को सफलतापूर्वक लागू किया है.
‘भारतपोल’ और ‘ऑपरेशन त्रिशूल’: तकनीक से दबोचे गए अपराधी
गृह मंत्री अमित शाह ने भगोड़ों को कानून के शिकंजे में लाने के लिए पूरी प्रक्रिया को ‘मिशन मोड’ में आगे बढ़ाया. इसके तहत कई क्रांतिकारी तकनीकी सुधार किए गए:
- भारतपोल (Bharatpol) का शुभारंभ: मोदी सरकार ने ‘भारतपोल’ लॉन्च कर देश की 1,400 से अधिक जांच एजेंसियों को सीधे इंटरपोल (INTERPOL) नेटवर्क से जोड़ दिया. इससे एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने का समय घटकर मात्र 3 से 10 दिन रह गया है.
- रेड कॉर्नर नोटिस में बढ़ोतरी: पिछले 3 वर्षों में ही इंटरपोल के माध्यम से रिकॉर्ड 401 भगोड़े अपराधियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाए गए.
- ऑपरेशन त्रिशूल (Operation Trishul): इस विशेष ऑपरेशन के माध्यम से विदेशों में नाम और पहचान बदलकर छिपे अपराधियों की जियो-लोकेशन को ट्रैक करने के लिए सैटेलाइट मैपिंग और डिजिटल फुटप्रिंट का आधुनिक उपयोग किया गया.
“भगोड़े अपराधियों का मुद्दा देश की संप्रभुता, आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। भारत अब किसी भी अपराधी के लिए सुरक्षित पनाहगाह नहीं रहने देगा, चाहे वह दुनिया के किसी भी कोने में छिपा हो।” – गृह मंत्रालय का आधिकारिक बयान
भगोड़ों पर नकेल: जानिए 2019 से 2026 तक की मुख्य उपलब्धियां
| प्रमुख मानक / कार्रवाई | आंकड़े और उपलब्धि (2019-2026) |
|---|---|
| भारत वापस लाए गए कुल भगोड़े | 274 अपराधी (36 विभिन्न देशों से). |
| PMLA के तहत जब्त संपत्ति | ₹17,874 करोड़ (सख्ती से लागू कानून द्वारा). |
| सफल आर्थिक वापसी (Restitution) | ₹18,762 करोड़ (बैंकों/देश को पैसा लौटाया गया). |
| रेड कॉर्नर नोटिस (बीते 3 वर्ष) | 401 अपराधियों के खिलाफ जारी. |
| सूचना साझाकरण समय (Bharatpol) | घटकर 3 से 10 दिन हुआ (1,400+ एजेंसियां जुड़ीं). |
कानूनी शिकंजा: नए आपराधिक कानून और ‘Trial in Absentia’
मोदी सरकार ने भगोड़ों को सजा दिलाने के लिए विधायी ढांचे को भी मजबूत किया है. वर्ष 2019 में NIA संशोधन अधिनियम और UAPA संशोधन अधिनियम लाकर जांच एजेंसियों को असीमित अधिकार दिए गए.
ऐतिहासिक कानूनी प्रावधान:
- अनुपस्थिति में मुकदमा (Trial in Absentia): तीन नए आपराधिक कानूनों के तहत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 355 और 356 में पहली बार यह प्रावधान किया गया कि यदि कोई अपराधी विदेश भाग गया है, तो उसकी अनुपस्थिति में भी उस पर मुकदमा चलाकर अदालत द्वारा सजा सुनाई जा सकती है.
- PMLA के तहत भारी जब्ती: प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) को सख्ती से लागू कर 2019 से 2026 के बीच भगोड़ों की कुल ₹17,874 करोड़ की संपत्तियां जब्त की गईं.
- ₹18,762 करोड़ की सफल वापसी: बैंकों और जनता का पैसा लेकर भागे आर्थिक अपराधियों से कुल ₹18,762 करोड़ की सफल वसूली (Restitution) की जा चुकी है.
सरकार के इन कठोर और सुव्यवस्थित कदमों ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि भारत विरोधी गतिविधियों और वित्तीय घोटालों में शामिल अपराधियों के लिए अब दुनिया का कोई भी कोना सुरक्षित नहीं है.













