भारत के पड़ोसी देश नेपाल में एक बार फिर से लोग सड़कों पर हैं। जो Gen-Z युवा बालेन शाह के समर्थन में सड़कों पर उतरे थे, अब वही उनकी नीतियों के खिलाफ एक बार फिर से सड़कों पर हैं। दरअसल, बालेन शाह की सरकार के एक फैसले ने कई गरीब परिवारों को परेशान कर दिया है। युवा इस बात पर नाराज हैं कि बिना ठीक से पुनर्वास किए लोगों को उनके घरों से हटाया जा रहा है।
प्रदर्शन की शुरुआत और कारण
काठमांडू महानगरपालिका पुलिस ने झुग्गी-बस्तियों को हटाने का काम शुरू किया। सरकार का कहना है कि यह अतिक्रमण हटाओ अभियान है, लेकिन युवाओं का आरोप है कि इसमें इंसानी संवेदनाओं का ध्यान नहीं रखा गया। बिना किसी ठोस पुनर्वास योजना के परिवारों को हटाया गया। उन्हें अस्थायी होल्डिंग सेंटर्स में रखा गया, लेकिन वहां रहने की स्थिति ठीक नहीं बताई जा रही है। युवा कार्यकर्ता कहते हैं कि लोगों को सिर छुपाने की कोई उचित जगह नहीं मिल रही।
बाढ़ की घटना और पुलिस कार्रवाई
शुक्रवार को एक होल्डिंग सेंटर में बाढ़ आ गई। वहां रह रहे करीब 150 लोग फंस गए। जब Gen-Z कार्यकर्ता स्थिति देखने पहुंचे तो पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया। एक कार्यकर्ता का चेहरा बुरी तरह घायल हो गया। इस घटना से युवाओं में गुस्सा बढ़ गया।
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आत्मदाह और गिरफ्तारियां
इस महीने एक 25 साल के युवक गणेश नेपाली ने खुद को आग लगा ली। पुलिस ने कथित तौर पर उनकी मोटरसाइकिल पर व्हील लॉक लगा दिया था, जिससे वो नाराज थे। इस घटना ने भी आंदोलन को तेज किया। कई सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र और पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया। कोशी प्रांत में प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आवाज उठाने वाले 26 लोगों को भी हिरासत में लिया गया। नेपाली कांग्रेस के नेता गगन कुमार थापा ने इन गिरफ्तारियों की निंदा की।
आंकड़ों में पूरा मामला
अप्रैल 2026 से इस अभियान के तहत 2600 से ज्यादा परिवारों को उनके आशियानों से हटाया गया। इससे करीब 15,000 लोग प्रभावित हुए। इनमें से 325 परिवार अस्थायी सेंटर्स में थे। 2 जुलाई को सरकार ने आदेश दिया कि 6 जुलाई तक सभी सेंटर्स खाली कर दिए जाएं। लेकिन कम से कम 60 परिवारों ने मना कर दिया क्योंकि उनके पास जाने की कोई और जगह नहीं थी।
बालेन शाह के लिए चुनौती
बालेन शाह पिछले साल Gen-Z युवाओं के आंदोलन के समर्थन से सत्ता तक पहुंचे थे। उस समय उन्होंने युवाओं की आवाज को मजबूती दी थी। अब वही युवा उनकी नीतियों के खिलाफ खड़े हैं। इस बेदखली के कदम को कई लोग अमानवीय मान रहे हैं। युवा मानते हैं कि गरीबों को बिना छत दिए हटाना ठीक नहीं है। प्रदर्शनकारी ‘गरीबों पर अत्याचार बंद करो’, ‘मानवाधिकार का सम्मान करो’ और ‘आश्रय दो’ जैसे नारे लगा रहे हैं। प्रदर्शन अभी भी जारी है और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

















