नई दिल्ली (हि.स.) । उच्चतम न्यायालय ने नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) की कक्षा 8 में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का एक अध्याय वाली किताब पर रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस मामले में गहरी साजिश रची गई है। इस साजिश के लिए जिम्मेदार लोगों को कानून का सामना करना पड़ेगा।
कोर्ट की अवमानना का नोटिस जारी
कोर्ट ने स्कूल, शिक्षा विभाग और एनसीईआरटी के डायरेक्टर डॉ. दिनेश प्रसाद सकलानी को कोर्ट की अवमानना का नोटिस जारी किया। कोर्ट ने नोटिस जारी कर पूछा कि ये बताएं कि कक्षा 8 के इस अध्याय के लिए कौन लोग जिम्मेदार हैं। कोर्ट ने एनसीईआरटी और केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वो ये सुनिश्चित करें कि इस किताब की सभी प्रतियों को हर जगह हटाया जाए ताकि वो आम लोगों तक नहीं पहुंच सके।
अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश
कोर्ट ने एनसीईआरटी और केंद्र सरकार को इस आदेश की अनुपालन संबंधी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि इस किताब का ऑनलाइन या फिजिकल किसी भी तरह से प्रचार-प्रसार करना कोर्ट के आदेश की अवमानना माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की किताब एक सोची समझी साजिश के तहत न्यायपालिका को बदनाम करने की नीयत से प्रकाशित की गई है।
कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने जताई चिंता
वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने 25 फरवरी को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस मामले को मेंशन करते हुए चिंता जताई थी। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा था कि किसी भी व्यक्ति को न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

















