NCERT की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब में न्यायपालिका पर एक विवादित अध्याय था। उसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और बहुत सारे लंबित केसों जैसी बातें लिखी गई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने इसे बच्चों के दिमाग में न्यायपालिका की बुरी तस्वीर बनाने वाला माना और फरवरी 2026 में पूरी किताब पर रोक लगा दी। अब उसी अध्याय को लिखने वाले तीनों शिक्षाविद अपना पक्ष रखने को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं।
क्या था विवादित अध्याय
यह अध्याय NCERT की नई किताब “Exploring Society: India and Beyond” के भाग 2 में था। इसमें न्यायपालिका की भूमिका बताते हुए भ्रष्टाचार और भारी बकाया मामलों का जिक्र किया गया था। कोर्ट ने कहा कि यह अध्याय न्यायपालिका को “लहूलुहान” कर रहा है और कक्षा 8 के बच्चों के मन में नकारात्मक सोच डाल रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई
26 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने किताब के प्रकाशन, दोबारा छपाई और डिजिटल प्रसार पर पूरी पाबंदी लगा दी। 11 मार्च 2026 को कोर्ट ने तीनों लेखकों पर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि या तो इन लोगों को भारतीय न्यायपालिका की सही जानकारी नहीं है, या उन्होंने जानबूझकर तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया। कोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों, विश्वविद्यालयों और सरकारी फंड वाली संस्थाओं को आदेश दिया कि ये तीनों अब किसी भी सरकारी या सार्वजनिक प्रोजेक्ट में शामिल न किए जाएं।
तीनों शिक्षाविद कौन हैं
इस अध्याय को बनाने वाली टीम की अगुवाई प्रोफेसर मिशेल डैनिनो ने की थी। वे पाठ्यपुस्तक विकास दल के चेयरपर्सन थे। उनके साथ सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्न कुमार टीम के सदस्य थे। आलोक प्रसन्न कुमार पहले वकील रह चुके हैं और सुप्रीम कोर्ट में भी पेश हो चुके हैं। ये तीनों CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के सामने पहुंचे। उन्होंने याचिका दायर की और कहा कि अध्याय किसी एक व्यक्ति का नहीं था, बल्कि पूरी टीम की सामूहिक प्रक्रिया से तैयार हुआ। किसी एक को अकेले दोषी ठहराना ठीक नहीं।
उनकी तरफ से वरिष्ठ वकीलों ने दलील दी। गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि ये अस्थायी या अविश्वसनीय लोग नहीं हैं, बल्कि काफी विश्वसनीय शिक्षाविद हैं। उन्होंने पूरी प्रक्रिया कोर्ट को दिखाने की बात कही। अरविंद दातार ने प्रोफेसर डैनिनो की तरफ से स्पष्टीकरण दिया। जे साई दीपक ने सुपर्णा दिवाकर की तरफ से कहा कि यह सामूहिक काम था, किसी एक की राय का एकाधिकार नहीं था। तीनों ने व्यक्तिगत हलफनामा भी दाखिल किए। कोर्ट ने उनकी याचिका रिकॉर्ड पर ले ली और दो हफ्ते बाद सुनवाई तय कर दी।
NCERT और सरकार की तरफ से
NCERT के डायरेक्टर प्रोफेसर दिनेश प्रसाद सकलानी ने बिना शर्त माफी मांगी। कोर्ट ने केंद्र को एक हाई-लेवल कमिटी बनाने को कहा था, जिसमें पूर्व जज इंदु मल्होत्रा, पूर्व अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल और गढ़वाल विश्वविद्यालय के वीसी प्रकाश सिंह शामिल हैं। यह कमिटी कक्षा 8 और ऊपर के लिए कानून संबंधी पाठ्यक्रम दोबारा तैयार करेगी। NCERT ने 2 अप्रैल को अपनी राष्ट्रीय पाठ्यक्रम समिति का भी पुनर्गठन किया।















