प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल के दौरे पर हैं। उन्होंने वहां की संसद में बहुत ही मजबूत भाषण संदेश दिया। ये सिर्फ भारत-इजरायल के रिश्तों की बात नहीं थी, बल्कि आतंकवाद, सुरक्षा और पूरे मिडिल ईस्ट की स्थिति पर भी साफ संदेश था। मोदी ने इजरायल के दर्द को अपना दर्द बताया और कहा कि दोनों देश अब पहले से ज्यादा करीब आ चुके हैं। भाषण में भावनाएं भी थीं और रणनीति भी, खासकर गाजा, कश्मीर जैसे मुद्दों के संदर्भ में इसका असर दूर तक जाएगा।
आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस
मोदी ने बहुत साफ शब्दों में कहा कि आतंकवाद को किसी भी बहाने जायज नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने हमास के 7 अक्टूबर के हमले को बर्बर बताया और कहा कि आम नागरिकों की हत्या कभी सही नहीं हो सकती। भारत ने भी दशकों से आतंक का सामना किया है, इसलिए इजरायल का दर्द हम समझते हैं। ये बात सिर्फ इजरायल के लिए नहीं, पूरी दुनिया के लिए थी कि आतंकवाद मानवता के खिलाफ है और इसके खिलाफ कोई समझौता नहीं।
कट्टरपंथ की जड़ें उखाड़ना जरूरी
दोनों देश लोकतंत्र हैं, खुले समाज हैं, लेकिन कट्टर सोच से बड़ा खतरा है। मोदी ने कहा कि आतंकवाद नफरत और बंद दिमाग वाली सोच से पैदा होता है। इसलिए साझेदारी सिर्फ हथियार या एजेंसियों तक नहीं, बल्कि विचारों के स्तर पर भी होनी चाहिए। कट्टरता को जड़ से खत्म करने की जरूरत है, ताकि हिंसा की वजह ही न बचे। ये बात कश्मीर जैसे मुद्दों पर भी लागू होती है, जहां पाकिस्तान समर्थित कट्टर ताकतें सक्रिय हैं।
डिफेंस में नया स्तर
भारत पहले से इजरायल से ड्रोन, मिसाइल डिफेंस और सर्विलांस सिस्टम लेता रहा है। अब बात आगे बढ़ गई है – अब मिलकर नई तकनीक और हथियार बनाएंगे। मोदी ने जोर दिया कि ये साझेदारी दोनों देशों की सुरक्षा को मजबूत करेगी। भारत के लिए ये चीन-पाकिस्तान जैसे चुनौतियों से निपटने में मददगार होगा, और इजरायल को एक बड़ा, भरोसेमंद पार्टनर मिलेगा।
इंटेलिजेंस और साइबर में गहरा तालमेल
आज की जंग ज्यादातर साइबर दुनिया में लड़ी जाती है। इजरायल साइबर सिक्योरिटी में दुनिया के टॉप पर है, और भारत डिजिटल पावर बन रहा है। दोनों मिलकर आतंकियों के नेटवर्क, फंडिंग और ऑनलाइन प्रोपगैंडा पर नकेल कस सकते हैं। ये काम ज्यादातर चुपचाप होता है, लेकिन इसका असर बहुत गहरा पड़ता है – चाहे गाजा हो या कश्मीर, कहीं भी।
मिडिल ईस्ट में भारत की भूमिका
मोदी ने साफ कहा कि भारत किसी एक तरफ नहीं खड़ा होगा, बल्कि शांति और संतुलन की बात करेगा। गाजा पीस इनिशिएटिव का समर्थन किया, जो यूएन सिक्योरिटी काउंसिल से मंजूर है। ये पहल क्षेत्र में लंबे समय तक टिकाऊ शांति ला सकती है, जिसमें फिलिस्तीन मुद्दे को भी संबोधित किया जाए। भारत के एनर्जी इंटरेस्ट और वहां रहने वाले लाखों भारतीयों की वजह से स्थिरता बहुत जरूरी है। ये भारत की नई कूटनीति है – दोस्ती मजबूत, लेकिन शांति पर फोकस।

















