खाड़ी संकट के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मौके का फायदा उठाते हुए आईडीएफ को 70 प्रतिशत से अधिक गाजा पट्टी पर कब्जा करने का आदेश दिया है। इजरायल के इस ऐलान के बाद युद्धविराम के टूटने का खतरा पैदा हो गया है। बड़ी बात ये है कि इजरायल का गाजा के 60 फीसदी हिस्से पर पहले से ही नियंत्रण है।
क्या है पूरा मामला
मामला कुछ यूं है कि पिछले साल अमेरिका की मध्यस्थता से इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम हुआ था। उसी दौरान इजरायल के कब्जे वाले क्षेत्रों के 53 फीसदी हिस्से पर सीधा नियंत्रण स्थापित कर लिया था। हालांकि, उसके बाद भी आईडीएफ रुकी नहीं। वह लगातार गाजा में आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई करती रही है। इसके साथ ही हमास के नियंत्रण वाले आधे हिस्से पर भी अपनी स्थिति को मजबूत करती रही। गाजा पट्टी के एक बड़े इलाके को आईडीएफ ने नो मेन्स लैंड घोषित कर दिया था। इजरायल ने स्पष्ट कहा है कि उसकी इजाजत के बिना वहां कोई नहीं जा सकता है।
युद्धविराम में भी हमला करता रहा है इजरायल
रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों पक्षों में युद्धविराम के 8 माह के दौरान इजरायल लगातार उन फिलिस्तीनियों पर गोलीबारी करती रही है, जो गाजा पट्टी को दो हिस्सों में बांटने वाली यलो लाइन की सीमा के भीतर आते हैं। इसके साथ ही पश्चिमी गाजा के अंदरूनी इलाकों में हवाई हमले किए हैं। बताया जाता है कि युद्धविराम होने बाद से अब तक 900 से अधिक फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है।
हमास पर लगातार बना रहे दबाव
कहा जा रहा है कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि गाजा पट्टी के 60 फीसदी इलाके पर हमारा नियंत्रण है और फिर भी हम हमास पर लगातार दबाव बना रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले से ही उनका 50 प्रतिशत नियंत्रण था और अब 70 फीसदी तक पहुंचाने का आदेश दिया गया है।
फिलिस्तीनियों को गाजा छोड़ने का आदेश
इजरायल के रक्षा मंत्री काट्ज ने बुधवार को अपना अंतिम लक्ष्य स्पष्ट करते हुए कहा कि फिलिस्तीनियों को गाजा छोड़ना होगा। वो इसे स्वैच्छिक पलायन कहते हैं। हालांकि, कुछ मानवाधिकार संगठन इसे जातीय सफाया कहते हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ता गाजा के अंदर रहने की स्थितियों को इतना अधिक जटिल बनाया जाएगा, कि लोगों को खुद ही उस स्थान को छोड़ना पड़ जाएगा।

















