गौरवमयी क्षण: राजस्थान के जैनेंद्र के. जैन को मिला प्रतिष्ठित 'वुल्फ पुरस्कार', यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय बने
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गौरवमयी क्षण: राजस्थान के जैनेंद्र के. जैन को मिला प्रतिष्ठित ‘वुल्फ पुरस्कार’, यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय बने

राजस्थान के सांभर में जन्मे विख्यात भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर जैनेंद्र के. जैन को भौतिकी का प्रतिष्ठित 'वुल्फ पुरस्कार' मिला है। वे यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय बने हैं।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Jun 20, 2026, 05:58 pm IST
inभारत, विश्व, राजस्थान
indian physicist jainendra k jain wins prestigious wolf prize in physics

मुंबई / जयपुर। भारतीय मेधा ने वैश्विक विज्ञान के मंच पर एक बार फिर इतिहास रच दिया है। राजस्थान की माटी में जन्मे विख्यात सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी (Theoretical Physicist) प्रोफेसर जैनेंद्र के. जैन को भौतिकी के क्षेत्र का अत्यंत प्रतिष्ठित ‘वुल्फ पुरस्कार’ (Wolf Prize) प्रदान किया गया है।

प्रो. जैन ने ‘कम्पोजिट फर्मियन्स’ (Composite Fermions) की क्रांतिकारी खोज करके क्वांटम पदार्थ (Quantum Matter) के रहस्यों के प्रति वैश्विक समझ को पूरी तरह बदल दिया था। वे इस सर्वोच्च सम्मान को प्राप्त करने वाले पहले भारतीय बन गए हैं, जो पूरे देश के लिए अत्यंत गर्व का विषय है।

इज़राइल के राष्ट्रपति ने नेसेट (संसद) में सौंपा सम्मान

यह ऐतिहासिक पुरस्कार बीती 18 जून को इज़राइल की संसद ‘नेसेट’ (Knesset) में आयोजित एक भव्य अंतरराष्ट्रीय समारोह के दौरान प्रदान किया गया। इज़राइल के राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग ने प्रो. जैनेंद्र के. जैन को यह गौरवमयी मेडल सौंपकर सम्मानित किया।

“इस सर्वोच्च सम्मान से मैं बहुत गौरवान्वित और विनम्र महसूस कर रहा हूँ। भौतिकी (Physics) ने मुझे जीवन में उससे कहीं अधिक दिया है, जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी, जब मैंने राजस्थान के एक सुदूर ग्रामीण इलाके में एक युवा लड़के के रूप में अपना यह सफर शुरू किया था। मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानता हूँ और अपने पूज्य शिक्षकों, होनहार छात्रों, सहयोगियों, परिवार और मित्रों के साथ-साथ उन सभी वैज्ञानिकों का आभारी हूँ, जिनके मूलभूत कार्यों ने मेरे शोध की मजबूत नींव रखी थी।” – प्रो. जैनेंद्र के. जैन

सांभर के धोरों से अमेरिका की पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी तक का सफर

प्रोफेसर जैनेंद्र के. जैन का जीवन और उनकी शैक्षणिक यात्रा देश के करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा का एक अप्रतिम स्रोत है। उनके जीवन के मुख्य पड़ावों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है:

जीवन / शैक्षणिक यात्राऐतिहासिक एवं शैक्षणिक विवरण
मूल जन्म स्थान एवं बचपनराजस्थान में थार मरुस्थल के किनारे बसे एक छोटे से ऐतिहासिक कस्बे सांभर (Sambhar) में पले-बढ़े।
उच्च शिक्षा (भारत)• बैचलर डिग्री: महाराजा कॉलेज, जयपुर
• मास्टर डिग्री: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), कानपुर
उच्च शिक्षा (विदेश)• PhD की डिग्री: स्टोनी ब्रुक यूनिवर्सिटी, न्यूयॉर्क (USA)
वर्तमान प्रतिष्ठित पदपेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी (USA) में इवान पुघ यूनिवर्सिटी प्रोफेसर और एबरली फैमिली चेयर इन फिजिक्स के पद पर कार्यरत।
भारतीय संस्थान की स्थापनाहाल ही में भारत में स्थापित ‘लोढ़ा थ्योरेटिकल फिजिक्स इंस्टीट्यूट’ (LTPI) के संस्थापक निदेशक।

बचपन का भीषण हादसा, ‘जयपुर फुट’ का सहारा और विज्ञान का विज़न

जब प्रो. जैनेंद्र केवल 12 वर्ष के थे, तब कोलकाता में उनके परिवार की कार एक ट्राम से टकरा गई थी। इस भीषण सड़क दुर्घटना में उनकी माँ का असमय निधन हो गया था और जैनेंद्र स्वयं गंभीर रूप से घायल हो गए थे। ऐसी विकट परिस्थिति में विख्यात चिकित्सक डॉ. पी.के. सेठी और कुशल कारीगर राम चंद्र शर्मा द्वारा भारत में ही विकसित किए गए विश्व प्रसिद्ध और कम लागत वाले ‘जयपुर फुट’ (Jaipur Foot) प्रोस्थेटिक (कृत्रिम अंग) ने उन्हें सहारा दिया। इसी स्वदेशी तकनीक की बदौलत वे फिर से चलने और अपनी पढ़ाई को अटूट हौसले के साथ जारी रखने में सक्षम हो सके।

कम उम्र में ही बच्चों की एक पत्रिका में महान भारतीय भौतिक विज्ञानी सत्येंद्र नाथ बोस और अल्बर्ट आइंस्टीन के बीच वैज्ञानिक संवाद की कहानी ने उनके बाल मन पर गहरी छाप छोड़ी थी। वर्ष 1981 में महज 21 वर्ष की आयु में वे पहली बार उच्च अनुसंधान के लिए अमेरिका रवाना हुए और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

क्या है ‘कम्पोजिट फर्मियन्स’ और वुल्फ पुरस्कार की महत्ता?

प्रो. जैन ने वर्ष 1989 में येल यूनिवर्सिटी में एक युवा पोस्टडॉक्टरल स्कॉलर के रूप में कार्य करते हुए इस पुरस्कार-विजेता विषय की खोज की थी। आज कई दशकों बाद, कम्पोजिट फर्मियन्स पर उनका यह अग्रणी शोध आधुनिक ‘कंडेंस्ड मैटर फिजिक्स’ (ठोस अवस्था भौतिकी) की एक केंद्रीय अवधारणा बन चुका है।

वुल्फ पुरस्कार की विशिष्टता

इज़राइल में वुल्फ फाउंडेशन द्वारा वर्ष 1978 से प्रतिवर्ष दिया जाने वाला यह पुरस्कार उन उत्कृष्ट भौतिक विज्ञानियों को ही सम्मानित करता है जिनकी खोजों ने मानव ज्ञान की सीमाओं को व्यापक विस्तार दिया हो। विज्ञान जगत में इसकी साख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वुल्फ पुरस्कार पाने वाले सत्ताइस (27) महान वैज्ञानिकों को बाद में दुनिया का सर्वोच्च ‘नोबेल पुरस्कार’ भी मिल चुका है।

अभूतपूर्व शैक्षणिक रिकॉर्ड और भारत के लिए विज़न LTPI

प्रो. जैनेंद्र के. जैन ने अब तक 250 से अधिक उच्च-स्तरीय साइंटिफिक आर्टिकल्स लिखे हैं। उनका प्रसिद्ध मोनोग्राफ ‘Composite Fermions’ वर्ष 2007 में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा प्रकाशित किया गया था।

प्राप्त अन्य राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सम्मान:

  • अमेरिकन फिजिकल सोसाइटी का प्रतिष्ठित ‘ओलिवर ई. बकली प्राइज़’।
  • आईआईटी कानपुर का गौरवमयी ‘डिस्टिंग्विश्ड एलुमनी अवॉर्ड’।
  • वे संयुक्त रूप से यूनाइटेड स्टेट्स नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, अमेरिकन एकेडमी ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेज और भारत की प्रतिष्ठित इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी (INSA) के फेलो चुने जा चुके हैं।

उनका विज़न अब लोढ़ा थ्योरेटिकल फिजिक्स इंस्टीट्यूट (LTPI) के माध्यम से अपनी मातृभूमि भारत तक फैला हुआ है। वे थ्योरेटिकल फिजिक्स में बुनियादी और उच्च स्तरीय रिसर्च के लिए भारत का पहला पूर्णतः प्राइवेट फंडिंग वाला एडवांस सेंटर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

वे उम्मीद जताते हैं कि LTPI देश में एक ऐसा अनूठा माहौल तैयार करेगा, जहाँ भारत के युवा वैज्ञानिक बड़े, मौलिक और महत्वाकांक्षी आइडियाज़ पर काम कर सकें, दुनिया भर के बेहतरीन रिसर्चर्स के साथ सीधे नेटवर्क में जुड़ सकें और फिजिक्स के सबसे गहरे व अनसुलझे सवालों पर स्वतंत्र विचार कर सकें।

Topics: President Isaac HerzogProfessor Jainendra K JainIndian Physicist Honouredrajasthan samacharIndia-Israel Relationsजैनेंद्र के जैन वुल्फ पुरस्कार भौतिकीJainendra K Jain Wolf Prize PhysicsComposite Fermions Quantum MatterLodha Theoretical Physics InstituteIsrael Knesset Award
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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