NCERT की कक्षा 8 की किताब में न्याय व्यवस्था में भ्रष्टाचार का जिक्र करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट लगातार एक्शन में है। इसी क्रम में शीर्ष अदालत ने बच्चों के सामने जजों की छवि को खराब करने का दोषी ठहराते हुए तीन शिक्षाविदों पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया है।
क्या है पूरा मामला ?
मामला एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक के एक चैप्टर “समाज में न्यायपालिका की भूमिका” से जुड़ा है। इस चैप्टर में ज्यूडिशियरी में भ्रष्टाचार और केसों के पेंडिंग होने जैसी बातें लिखी गई थीं। कोर्ट का तर्क है कि ये 13-14 साल के बच्चों के दिमाग पर नकारात्मक छवि डाल रहा है। कोर्ट ने इसे बच्चों पर गलत असर डालने वाला बताया और कहा कि या तो इन लेखकों को न्यायपालिका की सही जानकारी नहीं थी, या जानबूझकर गलत तरीके से तथ्यों को पेश किया गया।
कौन है तीनों शिक्षाविद
जिन तीन शिक्षाविदों पर आजीवन प्रतिबंध लगाया गया है उनमें प्रोफेसर मिशेल डैनिनो (पाठ्यपुस्तक विकास टीम के अध्यक्ष) के साथ ही सदस्य सुपर्णा दिवाकर, आलोक प्रसन्ना कुमार शामिल हैं। इन्हीं शिक्षाविदों ने NCERT की तरफ से ये चैप्टर तैयार किया था। कोर्ट ने कहा कि ऐसे लोगों को बच्चों की किताबें बनाने या करिकुलम में कोई रोल नहीं देना चाहिए।
कोर्ट ने क्या दिया फैसला?
सुप्रीम कोर्ट के द्वारा इन तीनों पर आजीवन प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से अब इन्हें कभी भी सरकारी या सरकारी फंड वाली किसी भी संस्था, यूनिवर्सिटी, परियोजना में कोई काम नहीं मिलेगा। शीर्ष अदालत ने केंद्र, राज्य सरकारें, यूनिवर्सिटीज़ और पब्लिक इंस्टीट्यूशंस को सख्ती से कहा गया कि इनको कोई जिम्मेदारी न दें, खासकर पब्लिक फंड से जुड़ी। हालांकि, कोर्ट ने ये भी कहा है कि अगर ये लोग कोर्ट में सफाई देते हैं तो आदेशों में बदलाव पर विचार संभव है।
न्यायपालिका में भ्रष्टाचार वाले मुद्दे पर कोर्ट के गुस्से को इस तरह से समझा जा सकता है कि अदालत ने केंद्र सरकार को ये आदेश दिया है कि सोशल मीडिया पर न्यायिक भ्रष्टाचार वाले चैप्टर का बचाव करने वाले संबंधित कंटेंट को शेयर कर न्यायपालिका को बदनाम करने वालों की डिटेल्स निकाल कर वो कोर्ट को दे, ताकि ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सके।
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NCERT और सरकार की तरफ से क्या हुआ?
NCERT के डायरेक्टर दिनेश प्रसाद सकलानी और स्कूल एजुकेशन सेक्रेटरी संजय कुमार ने कोर्ट में बिना शर्त माफी मांगी थी। परिषद ने कहा कि ये एक बड़ी गलती थी और आगे ऐसी चीजें रोकने के लिए कदम उठाए जाएंगे। NCERT ने कहा कि अब इन तीनों को किसी भी NCERT एक्टिविटी में नहीं लिया जाएगा।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को भरोसा दिया कि पुराने चैप्टर की कोई भी बात नई किताब में नहीं आएगी।
कोर्ट ने करिकुलम के लिए क्या कहा?
कोर्ट ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया कि एक कमिटी बनाई जाए, जिसमें पूर्व जज, बड़े अकादमिक और लॉ के एक्सपर्ट शामिल हों। ये कमिटी क्लास 8 और ऊपर की क्लासेस के लिए लीगल स्टडीज का करिकुलम फाइनल करेगी। नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी, भोपाल को भी इसमें जोड़ा जाए। नई चैप्टर तब तक नहीं आएगी, जब तक इस कमिटी की मंजूरी न हो।












