भारतीय टीम ने पिछले टी-20 विश्व कप से लेकर इस बार सुपर-8 का पहला मैच दक्षिण अफ्रीका के हाथों हारने तक लगातार 12 मैच जीत खूब सुर्खियां बटोरीं। लेकिन विजय रथ पर सवार भारतीय टीम के साथ आज जो स्थिति है, ऐसी स्थिति आनी तय थी। भारतीय टीम ग्रुप दौर में टुकड़ों में बेहतर प्रदर्शन करते हुए टीम सुपर-8 में तो पहुंच गयी। लेकिन दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सुपर-8 में जो शर्मनाक हार भारत को झेलनी पड़ी, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब भारतीय टीम सेमीफाइनल में भी पहुंच पाएगी या नहीं, बता पाना मुश्किल है। अलबत्ता, भारतीय टीम अभी संकट की स्थिति में क्यों है, यह जरूर बताया जा सकता है।
भारी पड़ी रणनीतिक चूक
2024 में अजेय रहते हुए टी-20 विश्व विजेता बनी भारतीय टीम पर इस बार खिताब को बरकरार रखने का भारी दबाव है। घरेलू दर्शकों के सामने अपेक्षाओं के अनुरूप प्रदर्शन करने का दबाव सभी टीमों पर रहता है। इस दौरान भारतीय टीम ने एक मजबूत संयोजन तो तैयार कर लिया, लेकिन विश्व कप के शुरू होते ही टीम की रणनीतिक चूक भारी पड़ गयी। भारतीय टीम प्रबंधन ने 8 बल्लेबाजों व ऑलराउंडर सहित 3 विशेषज्ञ गेंदबाजों के साथ विश्व कप मुकाबलों में उतरने की रणनीति बनायी।
कागज पर वास्तव में भारतीय टीम एक सशक्त दावेदार नजर आयी। लेकिन पिछले कुछ महीनों से विदेशी स्पिनरों (विशेषकर ऑफ स्पिनर) के सामने भारतीय बल्लेबाज संघर्ष करते नजर आ रहे थे जिस पर टीम प्रबंधन ने मजबूती से काम नहीं किया था। इसके अलावा ओपनर अभिषेक शर्मा के फॉर्म में न होने का असर टीम के अन्य शीर्ष बल्लेबाजों पर बखूबी दिखा। कमजोर प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ भी भारत के शीर्षस्थ बल्लेबाज फॉर्म की तलाश में जूझते रहे। फिर भी टीम प्रबंधन ने विपक्षी टीमों के सामने एक सेट रणनीति के साथ टीम उतारने का फैसला किया और किसी तरह के रणनीतिक फेरबदल की हिम्मत नहीं दिखायी।
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सुपर-8 के महत्वपूर्ण मुकाबले में टीम में एक-दो परिवर्तन किया भी तो वो भारतीय टीम को कमजोर साबित करने वाला फैसला साबित हुआ। यही कारण है कि गत विजेता भारतीय टीम इस बार सेमीफाइनल में भी जगह बना पाएगी या नहीं, इसके लिए तमाम अगर-मगर की स्थितियों का सामना कर पड़ रहा है।
ताकत ही बनी कमजोरी
ओपनर अभिषेक शर्मा और ईशान किशन सहित तिलक वर्मा, कप्तान सूर्यकुमार यादव, शिवम दूबे, हार्दिक पांड्या, रिंकु सिंह व अक्षर पटेल जैसे धुआंधार बल्लेबाजों में किसी भी मैच का रुख पलटने का माद्दा है। लेकिन इस बार विशेषकर भारतीय बल्लेबाज टुकड़ों में बेहतर प्रदर्शन करते नजर आए। विश्व कप में किसी भी मैच में भारत के शीर्ष 8 में से कोई एक-दो बल्लेबाज ही अच्छी फॉर्म में नजर आए और कमजोर टीमों के सामने किसी तरह ग्रुप मैच जीतने में सफल रहे।
पाकिस्तान व दक्षिण अफ्रीका जैसी धुरंधर टीमों सहित नामीबिया व नीदरलैंड के सामने भी भारतीय ओपनर दो ओवर से ज्यादा विकेट पर नहीं टिक पाए। अभिषेक ने शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम को कई जीत दिलायी है, लेकिन इस बार सच यही है कि अस्वस्थता के बाद टीम में लौटे अभिषेक विश्व कप के शुरुआती तीन मैचों में वह खाता तक नहीं खोल पाए और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मात्र 15 रन बनाकर वापस पवेलियन लौट गए। यहां पर सवाल उठता है कि क्या अभिषेक का बल्ला चलेगा तभी टीम इंडिया जीतेगी?
टी-20 विश्व कप के शीर्ष 10 बल्लेबाजों की सूची में सिर्फ सूर्यकुमार यादव (5 मैच, 180 रन, सातवां स्थान) और ईशान किशन (5 मैचों में 176 रन, नौवां स्थान) का शामिल हो पाना उस भारतीय टीम की दयनीय स्थिति को दर्शाता है जिसकी सबसे बड़ी ताकत उसकी बल्लेबाजी रही हो। हां, ऑलराउंडर के तौर पर टीम में शामिल शिवम दूबे (5 मैचों में 158 रन) ने अपने बल्ले से जरूर कुछ हद तक संघर्ष क्षमता दिखायी। लेकिन तिलक वर्मा, हार्दिक पांड्या, रिंकू सिंह और अक्षर पटेल का टीम प्रबंधन उचित ढंग से उपयोग नहीं कर पाया।
आलेख लिखे जाने तक बल्लेबाजों के अनिश्चित प्रदर्शन और सही रणनीति के अभाव में भारतीय टीम की नैया डगमग करते हुए पार पा रही है। एक विश्व विजेता टीम से टुकड़ों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद नहीं की जा सकती है और इस आधार पर विश्व कप ट्रॉफी बरकरार रखने की उम्मीद तो कतई नहीं की जा सकती है।
स्पिनर बने जी का जंजाल
भारतीय टीम को पिछले करीबन दो वर्षों से स्पिनरों के खिलाफ जूझते हुए देखा गया है। टर्निंग पिच चाहे विदेश की हो या घरेलू मैदानों पर, हर जगह भारत की सबसे बड़ी ताकत यानि बल्लेबाजी लड़खड़ाती नजर आयी। न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका ने पिछले ही वर्ष टेस्ट सीरीज में अपने स्पिनरों के दम पर भारतीय टीम का सूपड़ा साफ करते हुए साबित कर दिया था कि अब भारतीय टीम में स्पिनरों को झेलने का माद्दा नहीं रह गया।
यह बात सुनने में थोड़ा अटपटा लग सकता है, लेकिन मैच के परिणाम चीख-चीख कर बताते हैं कि भारतीय बल्लेबाज क्वालिटी स्पिन गेंदबाजी के आगे घुटने टेकते नजर आए हैं। उसके बावजूद भारतीय रणनीतिकारों ने विश्व कप के करीबन हरेक मैच में शीर्ष तीन बाएं हाथ के बल्लेबाजों को खिलाया और हर मैच में विपक्षी स्पिनरों ने पहले ही ओवर में विकेट झटकते हुए साबित कर दिया कि प्रतिभा की धनी टीम सटीक रणनीति के बिना मैच नहीं जीत सकती।
इस बार भी टी-20 विश्व कप में अभिषेक शर्मा ऑफ स्पिनर सलमान आगा (पाकिस्तान) और आर्यन दत्त (नीदरलैंड) के खिलाफ खाता खोले बिना पहले ही ओवर में आउट हुए, जबकि दक्षिण अफ्रीका कप्तान एडेन मार्करम (पार्ट टाइम ऑफ ब्रेक गेंदबाज) ने भारतीय बल्लेबाजों की कमजोरी का फायदा उठाते हुए पारी का पहला ओवर डाला और ईशान किशन को शून्य पर आउट कर दिया।
इसी तरह पाकिस्तान के सैम अयूब हों या आर्यन दत्त या फिर केशव महाराज, सभी स्पिनरों ने कप्तान सूर्या सहित तिलक वर्मा, हार्दिक या शिवम को खूब परेशान किया। भारतीय बल्लेबाजों का विश्व कप में स्पिनरों के खिलाफ दयनीय आंकड़े का अंदाजा इस बॉक्स से लगाया जा सकता है।-
परेशानी का सबब
- 5 मैचों में स्पिनर्स के 46 ओवर खेले
- इनमें कुल 344 रन जोड़े
- ऑफ स्पिनर्स की 108 गेंदें खेलीं
- 6.20 की स्ट्राइक रेट से रन जुटाए
मैच जीतने के लिए उठाने होंगे कदम
- शीर्ष 3 बल्लेबाजों में एक दाएं हाथ के बल्लेबाज को शामिल करें
- पारी की आक्रामक की जगह सतर्क शुरुआत करें
- बेहतरीन ऑलराउंडर अक्सर पटेल का सही उपयोग करें
- विशेषज्ञ गेंदबाजों पर पूरा भरोसा जताएं

















