AI की ताकत से बदलेगा हर भारतीय का जीवन, दिल्ली समिट की इनसाइड स्टोरी जानिए
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AI की ताकत से बदलेगा हर भारतीय का जीवन, दिल्ली समिट की इनसाइड स्टोरी जानिए

तकनीक कभी रोजगार खत्म नहीं करती, बल्कि रोजगार का स्वरूप बदलती है। समस्या एआई नहीं है, बल्कि हमारी तैयारी है। यदि हम पुराने तरीकों से चिपके रहेंगे, तो पिछड़ जाएंगे। आज जरूरत है नई स्किल सीखने की, डिजिटल साक्षरता बढ़ाने की, तकनीक को समझने की, बदलाव को अपनाने की, जो व्यक्ति सीखना बंद कर देता है, वह आगे बढ़ना भी बंद कर देता है।

Written byMahak SinghMahak Singh
Feb 22, 2026, 05:02 pm IST
in भारत
एआई इम्पैक्ट समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

एआई इम्पैक्ट समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

जब भी मानव इतिहास में कोई बड़ा बदलाव आया है, तब समाज के सामने दो रास्ते खुले हैं- एक, डर का रास्ता और दूसरा, विकास का। जो समाज डर के रास्ते पर चला, वह पीछे रह गया, और जिसने विकास का रास्ता चुना, उसने भविष्य को गले लगाया। आज पूरी दुनिया एक बार फिर ऐसे ही मोड़ पर खड़ी है, जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नाम की तकनीक मानव जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रही है।

दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट इसी परिवर्तन का जीवंत उदाहरण बना। इस सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया और अपने संबोधन में उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत एआई को एक खतरे के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक अवसर के रूप में देखता है। यह केवल एक सम्मेलन नहीं था, बल्कि भारत के भविष्य की दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम था। भारत मंडपम में जब देश-विदेश से आए नेता, वैज्ञानिक, उद्योगपति, शोधकर्ता और युवा एकत्र हुए, तो वहां केवल भाषण नहीं हो रहे थे, बल्कि भविष्य की नींव रखी जा रही थी। चारों ओर उत्साह, जिज्ञासा और आत्मविश्वास का वातावरण था। युवाओं की भारी भागीदारी यह बताती है कि भारत का भविष्य जागरूक है, सजग है और बदलाव के लिए तैयार है। आज का युवा सिर्फ नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नई सोच और नए समाधान गढ़ने वाला निर्माता बन चुका है।

वैश्विक मंच पर भारत की सशक्त उपस्थिति- इस शिखर सम्मेलन में दुनिया के कई बड़े नेताओं की उपस्थिति भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाती है। फ्रांस, ब्राजील, श्रीलंका, भूटान, मॉरीशस, क्रोएशिया, सर्बिया, सेशेल्स, एस्टोनिया और फिनलैंड जैसे देशों के शीर्ष नेतृत्व का एक साथ मंच साझा करना यह बताता है कि भारत अब केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि तकनीकी नेतृत्व की ओर बढ़ता राष्ट्र है। यह सम्मेलन भारत की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें तकनीक को केवल व्यापार नहीं, बल्कि मानव कल्याण का माध्यम माना जाता है।

भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट देश और दुनिया की अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीकों का भव्य प्रदर्शन बना। इस समिट में लगभग 120 से अधिक विदेशी कंपनियों और 200 से अधिक भारतीय कंपनियों ने भाग लिया। अमेरिका, जापान, जर्मनी, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, इजराइल, सिंगापुर और यूएई जैसी प्रमुख तकनीकी देशों की कंपनियों ने अपने नवीनतम एआई समाधान प्रस्तुत किए, जबकि भारत की स्टार्टअप्स, बड़ी आईटी कंपनियों और शोध संस्थानों ने स्वदेशी नवाचारों की मजबूत झलक दिखाई।

समिट का मुख्य उद्देश्य एआई तकनीक के माध्यम से समाज, उद्योग और शासन में सकारात्मक बदलाव को बढ़ावा देना था। यहां प्रदर्शित उत्पादों और समाधानों में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, रक्षा, स्मार्ट सिटी, फैशन, मैन्युफैक्चरिंग और फाइनेंस जैसे अनेक क्षेत्रों से जुड़े अत्याधुनिक एआई टूल्स शामिल थे। मेडिकल सेक्टर में एआई आधारित डायग्नोस्टिक सिस्टम, कैंसर और हृदय रोगों की शुरुआती पहचान करने वाले स्मार्ट स्कैनर, रोबोटिक सर्जरी सिस्टम और टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म आकर्षण का केंद्र रहे। शिक्षा क्षेत्र में पर्सनलाइज्ड लर्निंग प्लेटफॉर्म, एआई ट्यूटर, स्मार्ट क्लासरूम सॉल्यूशन और ऑटोमैटिक असेसमेंट टूल्स प्रस्तुत किए गए, जो छात्रों की सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने में सहायक हैं।

कृषि क्षेत्र के लिए एआई आधारित फसल निगरानी ड्रोन, स्मार्ट सिंचाई प्रणाली, मौसम पूर्वानुमान मॉडल और कीट पहचान तकनीक ने किसानों के लिए नई संभावनाएं खोलीं। फैशन और कपड़ा उद्योग में वर्चुअल ट्रायल रूम, एआई डिजाइन टूल्स और सप्लाई चेन ऑप्टिमाइजेशन सिस्टम ने भविष्य की झलक दिखाई। इसके अलावा, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के लिए ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, फेस रिकग्निशन आधारित सुरक्षा समाधान, ऊर्जा प्रबंधन सॉफ्टवेयर और कचरा प्रबंधन के लिए एआई मॉडल भी प्रदर्शित किए गए। फाइनेंस सेक्टर में फ्रॉड डिटेक्शन, ऑटोमेटेड लोन प्रोसेसिंग और स्मार्ट कस्टमर सपोर्ट चैटबॉट्स ने लोगों का ध्यान खींचा।

एआई केवल मशीन नहीं, एक नई सोच- अक्सर जब लोग एआई का नाम सुनते हैं, तो उनके मन में रोबोट, मशीनें और ऑटोमेशन की तस्वीर उभरती है। लेकिन वास्तव में एआई इससे कहीं अधिक है। यह एक ऐसी सोच है, जो डेटा, गणना और अनुभव के आधार पर निर्णय लेने में सहायता करती है। एआई आज डॉक्टरों को बीमारियों की पहचान में मदद कर रहा है, किसानों को फसल सुधार के उपाय सुझा रहा है, छात्रों को व्यक्तिगत शिक्षा उपलब्ध करा रहा है, व्यापारियों को बेहतर निर्णय लेने में सहायता कर रहा है, सरकार को योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ाने में मदद कर रहा है, यह कहना गलत नहीं होगा कि एआई मानव क्षमताओं का विस्तार बन चुका है।

मेडिकल क्षेत्र में एआई की क्रांति- स्वास्थ्य के क्षेत्र में एआई ने जो बदलाव किए हैं, वे किसी चमत्कार से कम नहीं हैं। आज एआई की मदद से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की शुरुआती पहचान संभव हो रही है, एक्स-रे और एमआरआई रिपोर्ट का विश्लेषण पहले से अधिक सटीक हो रहा है, दवाओं की खोज की प्रक्रिया तेज हो गई है। जहाँ पहले एक नई दवा बनाने में वर्षों लग जाते थे, वहीं अब एआई की मदद से यह काम महीनों में संभव हो रहा है। इससे न केवल इलाज सस्ता होगा, बल्कि अधिक लोगों तक पहुंचेगा।

कपड़ों और फैशन की दुनिया में तकनीकी बदलाव- फैशन और कपड़ा उद्योग में भी एआई ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। आज एआई लोगों की पसंद का विश्लेषण कर ट्रेंड्स का अनुमान लगाता है, वर्चुअल ट्रायल की सुविधा देता है, डिजाइनरों को नए पैटर्न और रंग संयोजन सुझाता है, कपड़ा उत्पादन में बर्बादी कम करता है। इससे न केवल उद्योग को लाभ हो रहा है, बल्कि उपभोक्ताओं को भी बेहतर गुणवत्ता और उचित मूल्य पर उत्पाद मिल रहे हैं।

कृषि में एआई- भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहाँ करोड़ों परिवार खेती पर निर्भर हैं। एआई ने कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं। आज एआई आधारित तकनीकें- मिट्टी की गुणवत्ता का विश्लेषण करती हैं, मौसम का पूर्वानुमान देती हैं, कीटों और बीमारियों की पहचान करती हैं, सिंचाई को स्मार्ट बनाती हैं। इससे किसानों को सही समय पर सही निर्णय लेने में मदद मिलती है, जिससे उत्पादन बढ़ता है और नुकसान कम होता है। शिक्षा के क्षेत्र में एआई ने सीखने के तरीके को ही बदल दिया है। अब हर छात्र को उसकी क्षमता और गति के अनुसार शिक्षा मिल सकती है। एआई आधारित प्लेटफॉर्म- कमजोर छात्रों को अतिरिक्त सहायता देते हैं, तेज सीखने वाले छात्रों को चुनौतीपूर्ण सामग्री उपलब्ध कराते हैं, शिक्षकों को छात्रों की प्रगति समझने में मदद करते हैं। इससे शिक्षा केवल परीक्षा केंद्रित न रहकर ज्ञान और कौशल विकास केंद्रित बनती जा रही है।

क्या एआई नौकरियाँ छीन लेगा- सबसे बड़ा सवाल यही है क्या एआई लोगों की नौकरियाँ खा जाएगा? यह डर नया नहीं है। जब कंप्यूटर आए थे, मशीनें-फैक्ट्रियों में लगी थीं, ऑटोमेशन शुरू हुआ था, तब भी यही कहा गया था कि लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। जब कंप्यूटर कार्यालयों में आया, तो कहा गया कि टाइपिस्ट, बाबू, क्लर्क सब बेरोजगार हो जाएंगे। लेकिन सच्चाई यह है कि नई नौकरियाँ पैदा हुईं, आईटी सेक्टर का जन्म हुआ, लाखों युवाओं को रोजगार मिला। आज भारत की आईटी इंडस्ट्री दुनिया की सबसे बड़ी इंडस्ट्री में से एक है। तकनीक कभी रोजगार खत्म नहीं करती, बल्कि रोजगार का स्वरूप बदलती है। एआई के आने से डेटा साइंटिस्ट,  एआई इंजीनियर, मशीन लर्निंग विशेषज्ञ, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट, डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल जैसे नए करियर विकल्प पैदा हुए हैं। जो लोग खुद को समय के साथ अपडेट करते हैं, उनके लिए तकनीक वरदान बन जाती है।

समस्या एआई नहीं है, बल्कि हमारी तैयारी है। यदि हम पुराने तरीकों से चिपके रहेंगे, तो पिछड़ जाएंगे। आज जरूरत है नई स्किल सीखने की, डिजिटल साक्षरता बढ़ाने की, तकनीक को समझने की, बदलाव को अपनाने की, जो व्यक्ति सीखना बंद कर देता है, वह आगे बढ़ना भी बंद कर देता है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कहा कि एआई को डेमोक्रेटाइज करना होगा, यानी इसे आम लोगों तक पहुंचाना होगा। उनका मानना है कि एआई का लाभ केवल कुछ कंपनियों या देशों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। भारत का दृष्टिकोण है- एआई सबके लिए हो, एआई से ग्रामीण और शहरी भारत के बीच संतुलन बने, यही सोच भारत को एक मानवीय तकनीकी शक्ति बनाती है।

आज दुनिया में एआई के दुरुपयोग को लेकर चिंता बढ़ रही है- डेटा चोरी, फेक न्यूज, डीपफेक, साइबर अपराध। भारत इस पर विशेष जोर देता है कि एआई का विकास नैतिक मूल्यों के साथ हो। तकनीक को मानवता का सेवक बनाना ही भारत की प्राथमिकता है। भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका युवा वर्ग है। आज भारत का युवा नए स्टार्टअप शुरू कर रहा है, रिसर्च में आगे बढ़ रहा है, वैश्विक कंपनियों में नेतृत्व कर रहा है, युवाओं की यही ऊर्जा भारत को एआई युग का नेता बना सकती है। एआई का सबसे बड़ा लाभ तब होगा, जब यह गांवों तक पहुंचेगा। कल्पना कीजिए किसान मोबाइल से फसल की बीमारी पहचान सके, गांव का बच्चा ऑनलाइन उच्च गुणवत्ता की शिक्षा पा सके, दूरदराज इलाके में रहने वाला व्यक्ति टेलीमेडिसिन से इलाज करवा सके, यह सब एआई के माध्यम से संभव है।

महिलाएं और एआई- आई महिलाओं के लिए भी नए अवसर लेकर आया है। आज महिलाएं टेक्नोलॉजी स्टार्टअप चला रही हैं, एआई रिसर्च में आगे हैं, डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए आत्मनिर्भर बन रही हैं, यह तकनीक महिला सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बन सकती है। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के माध्यम से भारत ने दुनिया को संदेश दिया कि तकनीक का उद्देश्य केवल मुनाफा नहीं, बल्कि मानव कल्याण होना चाहिए। भारत चाहता है कि एआई मानवता को जोड़ने का माध्यम बने, न कि विभाजन का। भविष्य की तैयारी आज से भविष्य अचानक नहीं आता, वह आज के फैसलों से बनता है। यदि हम आज बच्चों को तकनीकी शिक्षा देंगे, युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देंगे, किसानों को डिजिटल साधनों से जोड़ेंगे, छोटे व्यापारियों को टेक्नोलॉजी से सशक्त बनाएंगे, तो आने वाला भारत दुनिया की सबसे बड़ी तकनीकी शक्ति बन सकता है।

दिल्ली एआई समिट2026 में भाग लेने वाली प्रमुख भारतीय कंपनियाँ- इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, विप्रो, जोहो, जियो, एयरटेल।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भाग लेने वाली प्रमुख विदेशी कंपनियाँ- माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, ओपनएआई, अमेजन वेब सर्विसेज, मेटा।

Topics: AI in MedicalPM ModiIndia's Digital FutureaiIndia AI Impact Summit 2026AI Startup IndiaAI Summit Delhi 2026PM Narendra Modi AI SpeechAI and India FutureImpact of AI on EmploymentAI Technology in AgricultureAI in Education
Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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