यरूशलम से सिंध तक : पहले इतिहास, 3000 वर्ष मिटाए नहीं जा सकते, समझिए इज़राइल-फिलिस्तीन की कहानी
September 22, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम विश्व

यरूशलम से सिंध तक : पहले इतिहास, 3000 वर्ष मिटाए नहीं जा सकते, समझिए इज़राइल-फिलिस्तीन की कहानी

इज़राइल-फिलिस्तीन विवाद को समझने के लिए तीन हजार वर्ष पुराने यहूदी संबंधों, अरब-इस्लामी इतिहास, 1948 में इज़राइल की स्थापना और आधुनिक राजनीतिक घटनाओं को साथ देखना जरूरी है। जानिए कैसे ऐतिहासिक जटिलता को नजरअंदाज करना संघर्ष को बढ़ाता है।

Written byसुबोध मिश्रासुबोध मिश्रा — edited by Shivam Dixit
Feb 20, 2026, 08:56 pm IST
inविश्व

इज़राइल-फिलिस्तीन और मध्य-पूर्व से जुड़े मुद्दों पर सार्वजनिक बहस अक्सर लंबे और जटिल इतिहास को एक ही कहानी में सीमित कर देती है। अक्सर यह कहा जाता है कि यहूदी लोग केवल द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इस क्षेत्र में आए और इसलिए उनका इस भूमि से कोई ऐतिहासिक संबंध नहीं है। लेकिन ऐतिहासिक तथ्य कहीं अधिक बहुस्तरीय और जटिल तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।

प्राचीन काल से यहूदी समुदाय की उपस्थिति

ऐतिहासिक रूप से इज़राइल या फिलिस्तीन कहे जाने वाले क्षेत्र में यहूदी समुदाय लगभग तीन हजार वर्षों से मौजूद रहा है। यरूशलम प्राचीन काल से यहूदी धर्म का केंद्रीय धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा है। रोमन, बीजान्टिन, अरब, ओटोमन — अनेक साम्राज्यों के शासन और निर्वासन के बावजूद यरूशलम, हेब्रोन, सफ़ेद और तिबेरियास जैसे शहरों में यहूदी समुदाय निरंतर मौजूद रहा।

7वीं शताब्दी के बाद अरब समुदायों की जड़ें

साथ ही, 7वीं शताब्दी में इस्लाम के उदय और विस्तार के बाद अरब मुस्लिम और ईसाई समुदायों ने भी इस क्षेत्र में गहरी जड़ें जमाईं। समय के साथ यह भूमि अनेक धर्मों और संस्कृतियों का साझा निवास स्थान बन गई। यरूशलम यहूदियों, ईसाइयों और मुसलमानों — तीनों के लिए पवित्र है।

द्वितीय विश्व युद्ध, होलोकॉस्ट और 1948 में इज़राइल की स्थापना

द्वितीय विश्व युद्ध और होलोकॉस्ट के बाद बड़ी संख्या में यहूदी शरणार्थी इस क्षेत्र में आए और 1948 में आधुनिक इज़राइल राज्य की स्थापना हुई। इस प्रक्रिया ने जनसांख्यिकीय और राजनीतिक परिस्थितियों को गहराई से प्रभावित किया और फिलिस्तीनी अरब समुदाय के विस्थापन और पीड़ा का कारण भी बनी। इसलिए वर्तमान संघर्ष प्राचीन ऐतिहासिक संबंधों और आधुनिक राजनीतिक घटनाओं दोनों का परिणाम है।

दोनों समुदायों के ऐतिहासिक संबंधों को स्वीकार करने की आवश्यकता

यह कहना कि यहूदियों का इस भूमि से कोई संबंध नहीं है, इतिहास को नकारना है। उसी प्रकार फिलिस्तीनी समुदाय के ऐतिहासिक और भावनात्मक संबंधों को नकारना भी वास्तविकता का सरलीकरण है। स्थायी शांति किसी एक समुदाय के अस्तित्व को अस्वीकार करने से नहीं आ सकती।

भारतीय संदर्भ में इतिहास की कालक्रमिक समझ

भारतीय संदर्भ में भी इतिहास की कालक्रमिक समझ आवश्यक है। भारतीय उपमहाद्वीप पर पहला प्रमुख इस्लामी सैन्य आक्रमण 711–712 ईस्वी में हुआ, जब मुहम्मद बिन क़ासिम ने सिंध पर आक्रमण किया और स्थानीय शासक राजा दाहिर को पराजित किया। यह घटना उस समय हुई जब भारतीय उपमहाद्वीप में सनातन परंपराएँ, वैदिक दर्शन, बौद्ध और जैन विचारधाराएँ, समृद्ध व्यापारिक नेटवर्क और विकसित सांस्कृतिक संरचनाएँ पहले से विद्यमान थीं।

भारत का परतदार और बहुआयामी इतिहास

भारत का इतिहास भी परतदार है — प्राचीन सभ्यताओं से लेकर मध्यकालीन राजवंशों और औपनिवेशिक शासन तक। किसी भी कालखंड को पूर्णतः मूल और किसी अन्य को पूर्णतः बाहरी बताना ऐतिहासिक जटिलता को नज़रअंदाज़ करना है।

राजनीतिक व्याख्याओं से परे इतिहास की स्वीकार्यता

चाहे पश्चिम एशिया हो या दक्षिण एशिया — इतिहास को राजनीतिक नारे या विस्तारवादी व्याख्याओं के माध्यम से पुनर्परिभाषित करने का प्रयास अक्सर संघर्ष को गहरा करता है। स्थायी समाधान तभी संभव है जब यह स्वीकार किया जाए कि समाज सदियों से बहुस्तरीय, विविध और परस्पर जुड़े रहे हैं।

शांति और स्थिरता के लिए तथ्य आधारित संवाद

अंततः स्थिरता और शांति उसी समाज में संभव है जो अपने इतिहास की जटिलता को स्वीकार करे, सभी समुदायों की गरिमा और अधिकारों का सम्मान करे, और भावनात्मक सरलीकरण के बजाय तथ्यों पर आधारित संवाद को प्राथमिकता दे।

Topics: भू-राजनीति विश्लेषणisraelPalestinejerusalemholocaustArab conquest of Sindhमध्य-पूर्व राजनीतिइज़राइल फिलिस्तीन संघर्षपश्चिम एशिया इतिहासभारतीय इतिहास परिप्रेक्ष्यधार्मिक इतिहास
सुबोध मिश्रा
सुबोध मिश्रा
वरिष्ठ पत्रकार (हिंदुस्तान टाइम्स और पीटीआई ) [Read more]
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

AI generated image

मक्का समझौता: आज ईरान के खिलाफ सुरक्षा कवच, कल किसके खिलाफ बड़ा रणनीतिक खेल?

'अंतिम दर्शन' के लिए तेहरान की ग्रेंड मोसल्ला मस्जिद में रखे खामेनेई और मारे गए परिवार के अन्य सदस्यों के ताबूत

खामेनेई के जनाजे की आड़ में क्या Iran दे रहा दुनिया को मजहबी-राजनीतिक संकेत! हमास और हिज्बुल्लाह के नेता भी पहुंचे ईरान

Israel Iran war

इजरायल के PM नेतन्याहू की चेतावनी: बोले- फिर करेंगे ईरान पर सैन्य हमला…ट्रंप की टेंशन बढ़ी

G7 Summit में सब Iran-Izrael में उलझे थे, इधर भारत ने चला ये दांव -Parakh With Hitesh Shankar

इजरायल ने लेबनान पर फिर किए भीषण हमले, 18 की मौत; ईरान-US समझौते में अब आगे क्या होगा?

छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा इज़राइल में लगाई जाएगी

इजरायल में लगेगी छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा, भारत के लिए गर्व का क्षण

Load More

ताज़ा समाचार

देहरादून में अवैध मजार को किया गया ध्वस्त

देहरादून में सड़क किनारे बनी अवैध मजार ध्वस्त

प्रतीकात्मक चित्र

थाईलैंड : बौद्ध भिक्षुओं को मारा, बौद्ध मंदिर जलाए और अब मुस्लिम अलगाववादियों ने खाई कसम ‘कयामत तक लड़ेंगे’

हामिद अंसारी, पूर्व उपराष्ट्रपति

विवादों के घेरे में हामिद अंसारी: गजनवी से लेकर ‘हिंदू दक्षिणपंथ’ तक के बयानों पर हंगामा

परिंदु भगत (काकू भाई) प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता ‘साबरमती संवाद’ के दौरान पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर से बातचीत

‘ऐसे शुरू हुआ गुजरात में संघ कार्य’

कल का मौसम: 22 सितंबर को 18 राज्यों में ‘मूसलाधार बारिश’, IMD का बड़ा अपडेट; 80 की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

22 सितंबर का पंचांग

22 सितंबर को है परिवर्तिनी एकादशी, जानें कब तक रहेगी एकादशी तिथि और पूजा का शुभ समय

BRICS Summit 2026: भारत ने कैसे बढ़ाया अपना कद?

आज का सोना-चांदी भाव

Gold Silver Rate Today: सोना-चांदी के दाम में गिरावट, जानें आज का ताजा भाव

सोमनाथ मंदिर-BJP कार्यालय को बम से उड़ाने की धमकी, ईमेल में लिखे- खालिस्तान जिंदाबाद के नारे; पुलिस ने शुरू की जांच

“जन्म के आधार पर भेदभाव की हिंदू संस्कृति में जगह नहीं” : सरकार्यवाह Dattatreya Hosabale Ji

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies