74 देशों की नौसेनाएं आईं एक साथ! विशाखापत्तनम में रक्षा मंत्री का बड़ा ऐलान
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74 देशों की नौसेनाएं आईं एक साथ! विशाखापत्तनम में रक्षा मंत्री का बड़ा ऐलान

राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम में बहुराष्ट्रीय समुद्री अभ्यास ‘मिलन’ का उद्घाटन किया। 74 देशों की नौसेनाएं समुद्री सुरक्षा, UNCLOS आधारित व्यवस्था और इंडो-पैसिफिक सहयोग को मजबूत करने के लिए एक मंच पर आईं। दिनेश के त्रिपाठी ने इसे ‘मैरीटाइम महाकुंभ’ बताया।

Written byएजेंसीएजेंसी
Feb 19, 2026, 04:52 pm IST
in भारत, रक्षा, आंध्र प्रदेश

नई दिल्ली (हि.स.) । विशाखापत्तनम के पूर्वी तट पर चल रहे बहुराष्ट्रीय समुद्री अभ्यास ‘मिलन’ में 74 देशों की नौसेनाएं हिस्सा ले रही हैं, ताकि समुद्री जुड़ाव, सामूहिक सुरक्षा और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था को मजबूत किया जा सके। अभ्यास का औपचारिक उद्घाटन करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यूएन कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ सीज के कानूनी ढांचे को एक बड़े ग्लोबल नेवल आर्किटेक्चर के जरिए और मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय नियमों और नेविगेशन की आजादी पर आधारित समुद्री व्यवस्था बनाना चाहता है।

समुद्री सुरक्षा और वैश्विक सहयोग पर जोर

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत एक भरोसेमंद विश्व-मित्र है, इस क्षेत्र में एक कंस्ट्रक्टिव और भरोसेमंद भूमिका निभाता रहेगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे समुद्र में उभरती हुई मुश्किल और आपस में जुड़ी चुनौतियों से असरदार तरीके से निपटें और आपसी सम्मान और लेन-देन की भावना से काम करें। समय के साथ इंटरनेशनल शांति बनाने में नौसेना की भूमिका और बढ़ी है। पिछले कुछ दशकों में तेजी से आर्थिक विकास हुआ है, जिससे इंटरनेशनल व्यापार और ट्रांसपोर्ट में भारी बढ़ोतरी हुई है। रक्षा मंत्री ने कहा कि हमारे पानी को उन खतरनाक आतंकवादी गतिविधियों से बचाने की जरूरत है, जो इन इलाकों में पैर पसार रही हैं।

पुराने और नए समुद्री खतरों का जिक्र

राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि पुराने खतरे, पाइरेसी, समुद्री आतंकवाद, गैर-कानूनी मछली पकड़ना, ट्रैफिकिंग, साइबर कमजोरियां और जरूरी सप्लाई चेन में रुकावट जैसी नई चुनौतियों के साथ मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि क्लाइमेट चेंज प्राकृतिक आपदाओं को बढ़ा रहा है, जिससे मानवीय और आपदा राहत ऑपरेशन ज्यादा बार-बार और मुश्किल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी नेवी, चाहे कितनी भी काबिल क्यों न हो, अकेले इन चुनौतियों का सामना नहीं कर सकती। उन्होंने एक सुरक्षित और ज्यादा सुरक्षित भविष्य पक्का करने के लिए नौसेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।

आसियान देशों के साथ बैठक और ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’

रक्षा मंत्री ने विशाखापत्तनम में नौ आसियान सदस्य देशों के नौसेना प्रमुखों और नौसेना प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत की। बैठक में भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और सभी क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए आपसी और समग्र तरक्की के विजन पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि यह एक्सरसाइज 1995 में चार विदेशी नेवी के साथ शुरू हुई थी, जो अब 74 देशों के साथ होने वाले अपने अब तक के सबसे बड़े एडिशन तक पहुंच गई है। उन्होंने इंडो-पैसिफिक साझेदारों के बीच भरोसा और ऑपरेशनल जानकारी बढ़ाने में चीफ्स का कॉन्क्लेव और इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू के महत्व पर जोर दिया। चर्चा में मिलन के चल रहे बंदरगाह चरण पर भी बात हुई, जिसमें एंटी-सबमरीन वारफेयर, एयर डिफेंस और सर्च-एंड-रेस्क्यू ऑपरेशन जैसे मुश्किल समुद्री ड्रिल पर फोकस किया गया।

नौसेना प्रमुख का ‘मैरीटाइम महाकुंभ’ वाला बयान

नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने बहुराष्ट्रीय समुद्री अभ्यास ‘मिलन’ की तुलना एक मैरीटाइम महाकुंभ से की, जिसमें दुनिया भर के मैरीटाइम प्रोफेशनल्स एक साथ आते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत जैसा मैरीटाइम देश साफ तौर पर मानता है कि आज की मैरीटाइम चुनौतियां आपस में जुड़ी हुई, जिन्हें सहयोग और साझेदारी से सुलझाया जा सकता है। एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि मिलन के दौरान नौसेनाएं मुश्किल समुद्री युद्धाभ्यास, ड्रिल और एक्सरसाइज, प्रोफेशनल बातचीत और अच्छी बातचीत में शामिल होंगी। उन्होंने कहा कि आपसी समझ, भरोसा और इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने के साथ-साथ ये बातचीत एक-दूसरे के अनुभव और विशेषज्ञता से सीखने में भी मदद करेंगी।

Topics: इंडो-पैसिफिक सुरक्षाइंटरनेशनल फ्लीट रिव्यूMilan naval exercise VisakhapatnamRajnath Singh navy statement74 countries naval drill IndiaIndo-Pacific maritime securityAdmiral Dinesh K Tripathi MILAN newsमिलन नौसैनिक अभ्यासविशाखापत्तनम न्यूजUNCLOSराजनाथ सिंहआसियान नौसेना प्रमुख बैठकभारतीय नौसेनादिनेश के त्रिपाठी
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