बांग्लादेश के अंतरिम प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने 17 फरवरी 2026 को एक अलविदा भाषण दिया, जिसमें उन्होंने अपने 18 महीने के कार्यकाल की उपलब्धियों पर बात की। उनका ये भाषण उनकी उपलब्धियां कम भारत के खिलाफ घृणा से भरा रहा। यूनुस ने अपने भाषण में नेपाल, भूटान के साथ ही भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (सेवन सिस्टर्स) में आग लगाने की कोशिश की। जो देश अपना खुद का भला नहीं कर सकता है, उसके अंतरिम सलाहकार रहे यूनुस शुरू से ही सेवन सिस्टर्स को ग्रेटर बांग्लादेश से जोड़कर देखते रहे हैं।
बांग्लादेश अब ‘आज्ञाकारी’ नहीं रहा
अपने 25 मिनट के भाषण के दौरान यूनुस ने कहा कि आज का बांग्लादेश आत्मविश्वासी, सक्रिय और जिम्मेदार है। उन्होंने कहा, “बांग्लादेश अब किसी अन्य देश के निर्देशों या सलाह पर निर्भर नहीं है। हमारी विदेश नीति अब अधीनस्थ नहीं रही।” यह बात कई लोगों ने भारत की तरफ इशारा मानकर सुनी, क्योंकि पिछले कुछ समय में दिल्ली-ढाका रिश्ते काफी खराब हो गए थे और भारत विरोधी भावनाएं बढ़ी थीं।
भारत के पूर्वोत्तर पर गड़ाई नजर
यूनुस ने अपने भाषण में भारत के पूर्वोत्तर इलाके को ‘सेवन सिस्टर्स’ कहकर संबोधित किया, जो सात राज्य – अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा – के लिए इस्तेमाल होता है। उन्होंने भारत का नाम लिए बिना कहा, “बांग्लादेश इन सेवन सिस्टर स्टेट्स, नेपाल और भूटान के लिए बहुत बड़ी आर्थिक संभावनाएं खोल सकता है। हमारा खुला समुद्र सिर्फ सीमा नहीं है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था का द्वार है।” उन्होंने इस क्षेत्र को नेपाल, भूटान और सेवन सिस्टर्स के साथ जोड़कर एक उप क्षेत्रीय आर्थिक विजन पेश किया, जिसमें बांग्लादेश के बंदरगाहों को इनके लिए गेटवे बताया। यह बात पहले भी उन्होंने पिछले साल चीन की यात्रा में कही थी, जहां उन्होंने भारत के पूर्वोत्तर को ‘चारों तरफ से जमीन से घिरा’ बताया था और चीन से वहां ज्यादा सक्रियता की अपील की थी। उस समय भारत की तरफ से काफी सख्त प्रतिक्रिया आई थी, जिसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर और पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने नाराजगी जताई थी।
यूनुस कर रहे चीन की चापलूसी
अपने भाषण में यूनुस भाषण में चीन की भर-भरकर चापलूसी की। साथ ही ‘स्ट्रैटेजिक बैलेंस’ की जरूरत बताई और बीजिंग के साथ संबंधों को और मजबूत करने की बात की। उन्होंने कहा कि चीन के साथ सहयोग बढ़ा है और तेज नदी बहाली प्रोजेक्ट पर अच्छी प्रगति हुई है। साथ ही निलफामारी में 1,000 बेड वाला इंटरनेशनल हॉस्पिटल भी बन रहा है। तेज नदी प्रोजेक्ट भारत के लिए संवेदनशील है क्योंकि यह सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के पास है। जनवरी में यूनुस सरकार ने चीन के राजदूत और अधिकारियों को प्रोजेक्ट साइट विजिट करने की इजाजत दी थी, जिसे भारत ने अपनी संवेदनशीलताओं को नजरअंदाज करने वाला माना था।

















