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विशेष रिपोर्ट : अभेद्य द्वार, निर्णायक वार

सिलीगुड़ी कॉरिडोर केवल एक भौगोलिक गलियारा नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा, आपूर्ति और सामरिक एकता की जीवनरेखा है। बढ़ती घुसपैठ के बीच पश्चिम बंगाल सरकार के हालिया फैसले राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती देने वाले हैं

Written byलेफ्टिनेंट जनरल एम के दास,पीवीएसएम, बार टू एसएम, वीएसएम ( सेवानिवृत)लेफ्टिनेंट जनरल एम के दास,पीवीएसएम, बार टू एसएम, वीएसएम ( सेवानिवृत)
Jun 2, 2026, 08:26 pm IST
inविश्लेषण, पश्चिम बंगाल

अगर किसी को इस बात का प्रमाण चाहिए कि डबल इंजन भाजपा/एनडीए सरकार किस प्रकार काम करती है, तो पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के दो प्रमुख रणनीतिक निर्णयों पर नजर डालनी चाहिए। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारी जीत के बाद सत्ता संभालने के एक सप्ताह के भीतर ही राज्य सरकार ने सीमा पर बाड़ लगाने के लिए 75 एकड़ भूमि बीएसएफ को सौंपने का निर्णय लिया। यह भूमि आवंटन 27 किलोमीटर लंबी सीमा पर बाड़बंदी की प्रारंभिक आवश्यकता को पूरा करेगा। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण निर्णय सिलीगुड़ी कॉरिडोर में 120 एकड़ भूमि और सात महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग खंडों को केंद्र सरकार को हस्तांतरित करने का है। पहली बार मुख्यमंत्री बने श्री अधिकारी ने पश्चिम बंगाल से जुड़े सुरक्षा मुद्दों की गंभीर और व्यावहारिक समझ का परिचय दिया है।

संवेदनशील गलियारा

सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे ‘चिकन नेक’ भी कहा जाता है, पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी क्षेत्र के पास स्थित भूमि की एक संकरी पट्टी है। यह गलियारा लगभग 20-22 किलोमीटर चौड़ा और 60 किलोमीटर लंबा है, जो मुख्य रूप से जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जिलों में स्थित है। इसी भूभाग के माध्यम से सिक्किम सहित पूर्वोत्तर के आठों राज्य भारत की मुख्य भूमि से जुड़े हुए हैं।

यह कॉरिडोर अत्यंत संवेदनशील ‘चोक प्वाइंट’ है, क्योंकि इसके पश्चिम में नेपाल, उत्तर में भूटान, दक्षिण में बांग्लादेश और पूर्व में चीन की चुंबी घाटी स्थित है। कई मायनों में भारत के लिए सिलीगुड़ी कॉरिडोर वही महत्व रखता है, जो वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का है। यदि किसी सैन्य संघर्ष की स्थिति में यह गलियारा बाधित होता है, तो भारत के समक्ष उत्पन्न होने वाली सुरक्षा चुनौतियों की कल्पना सहज ही की जा सकती है। यह कॉरिडोर केवल सामरिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि चार करोड़ से अधिक आबादी वाले पूर्वोत्तर राज्यों के लिए रेल और सड़क मार्ग के माध्यम से जीवनरेखा का कार्य करता है। सैन्य आपूर्ति से लेकर नागरिक जरूरतों तक, सब कुछ इसी मार्ग पर निर्भर है।

घुसपैठ और जनसांख्यिकी

पश्चिम बंगाल में 15 वर्षों के तृणमूल कांग्रेस शासन के दौरान सिलीगुड़ी कॉरिडोर की उपेक्षा हुई, जिसके कारण सामरिक क्षेत्र के बुनियादी ढांचे की स्थिति लगातार खराब होती गई। सिक्किम की ओर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-10 सहित कई रणनीतिक सड़कों को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को हस्तांतरित करने में अनावश्यक देरी की गई।

इस क्षेत्र में बांग्लादेश से बड़े पैमाने पर अवैध घुसपैठ हुई है। सिलीगुड़ी शहर पूरे पूर्वोत्तर भारत का प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र है, इसलिए इसके आसपास अवैध बस्तियों का फैलाव भी तेजी से हुआ। उत्तर दिनाजपुर जैसे सीमावर्ती जिलों में बड़े जनसांख्यिक परिवर्तन देखने को मिले हैं, जो अब मुस्लिम बहुल क्षेत्र बन चुके हैं।
उत्तर बंगाल में आर्थिक विकास की धीमी गति ने इस क्षेत्र को शत्रुतापूर्ण एजेंसियों के ओवर ग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) के लिए उपजाऊ जमीन बना दिया है।

युद्ध या संघर्ष की स्थिति में पूर्वोत्तर राज्यों की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों को अवरुद्ध करना शत्रु के लिए कठिन नहीं होगा। अगस्त 2024 में बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के हटने के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताएं कई गुना बढ़ गई हैं। अंतरिम मोहम्मद यूनुस सरकार के दौर में पाकिस्तान ने बांग्लादेश के साथ सैन्य संबंध पुनः सक्रिय किए हैं। पाकिस्तान की आईएसआई ने बांग्लादेश में कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी को संरक्षण दिया है। फरवरी में हुए चुनावों में भारत की सीमा से लगे क्षेत्रों में जमात समर्थित उम्मीदवारों की सफलता ने भी चिंता बढ़ाई है।

आगे की चुनौती

बांग्लादेश की विकास परियोजनाओं में चीन की गहरी मौजूदगी पहले से ही चिंता का विषय रही है। भारतीय सीमा से मात्र 15 किलोमीटर दूर स्थित लालमोनिरहाट हवाई पट्टी को पुनर्जीवित करने की चीनी कोशिशें भारत के लिए गंभीर संकेत हैं। इसके अतिरिक्त अमेरिका द्वारा सेंट मार्टिन द्वीप को पट्टे पर लेने की चर्चाओं ने भी क्षेत्रीय सामरिक समीकरणों को और जटिल बना दिया है।

इन घटनाक्रमों के बीच डोकलाम का अनुभव भारत के लिए महत्वपूर्ण सबक है। 2017 में जब चीन ने डोकलाम क्षेत्र में सड़क निर्माण का प्रयास किया, तब भारतीय सेना ने भूटान सरकार के अनुरोध पर हस्तक्षेप किया और चीनी विस्तारवाद को रोक दिया। भारतीय सेना की दृढ़ता के कारण चीन को पीछे हटना पड़ा। यदि उस समय चीन को बढ़त मिल जाती, तो सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर उसका दबाव कहीं अधिक बढ़ सकता था।
डोकलाम गतिरोध के बाद चीन लगातार नेपाल और भूटान को अपने प्रभाव में लेने की कोशिश कर रहा है। उसका अंतिम उद्देश्य सिलीगुड़ी कॉरिडोर के आसपास रणनीतिक दबदबा बनाना है।

ऐसी परिस्थिति में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा लिए गए त्वरित निर्णय स्वागत योग्य हैं। केंद्र सरकार के नियंत्रण में इस क्षेत्र में आवश्यक बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास संभव होगा। राष्ट्रीय राजमार्गों, रेलवे संपर्कों तथा महत्वपूर्ण पुलों को बेहतर सुरक्षा कवच मिलेगा। वैकल्पिक मार्गों का विकास भी किया जा सकेगा, जिससे किसी एक मार्ग के बाधित होने पर भी आपूर्ति शृंखला प्रभावित न हो।

बीएसएफ को पर्याप्त भूमि उपलब्ध कराने से स्मार्ट बॉर्डर फेंसिंग को गति मिलेगी और बांग्लादेश से होने वाली अवैध घुसपैठ पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। सबसे महत्वपूर्ण यह कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर में अवैध घुसपैठियों की पहचान, हिरासत और निर्वासन – “डिटेक्ट, डिटेन एंड डिपोर्ट” – की प्रक्रिया को अब केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय का लाभ मिलेगा।

जनसांख्यिकीय बदलाव का होगा अध्ययन

अवैध घुसपैठ और उससे उत्पन्न हो रहे जनसांख्यिकीय असंतुलन के अध्ययन के लिए केंद्र सरकार ने गृह मंत्रालय के अंतर्गत एक उच्चस्तरीय समिति (हाई लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंज) का गठन किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में इस विषय पर विशेष तंत्र बनाने की घोषणा की थी। समिति का उद्देश्य देशभर में हो रहे “अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय परिवर्तनों” के कारणों, प्रभावों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ने वाले असर का वैज्ञानिक अध्ययन करना है। समिति अवैध घुसपैठ, सीमा पार गतिविधियों, सामाजिक-सांस्कृतिक बदलाव और संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति का विश्लेषण करेगी। सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर इसकी अध्यक्षता कर रहे हैं। समिति में जनगणना, आंतरिक सुरक्षा, प्रशासन और अर्थव्यवस्था से जुड़े विशेषज्ञ भी शामिल हैं। गृह मंत्री अमित शाह का कहना है कि यह अध्ययन राष्ट्रीय संप्रभुता, कानून-व्यवस्था और सामाजिक संतुलन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Topics: क्षेत्रीय सुरक्षाबाड़बंदीचोक प्वाइंट चुंबी घाटीआतंकवादभौगोलिक गलियाराबांग्लादेशी घुसपैठियेघुसपैठराष्ट्रीय सुरक्षाअवैध घुसपैठपाञ्चजन्य विशेषSiliguri Corridorचिकन नेक
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