शिमला (हि.स.) । पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने महान क्रांतिकारी विनायक दामोदर सावरकर को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देने की जोरदार वकालत की है। उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद वीर सावरकर को सम्मानित करने की चर्चा फिर से शुरू हुई है और इतने बड़े क्रांतिकारी देशभक्त को आज तक उचित सम्मान न मिलना भारत का दुर्भाग्य है।
तीन भाइयों का एक साथ स्वतंत्रता संग्राम में योगदान
शांता कुमार ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि विश्व इतिहास में यह अनूठा उदाहरण है कि एक ही मां के तीनों पुत्र स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हुए और काला पानी की सजा भुगती। उन्होंने बताया कि सावरकर ने न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी स्वतंत्रता आंदोलन को संगठित किया।
फ्रांस तट तक तैरकर पहुंचने का साहसिक प्रसंग
गिरफ्तारी के बाद जब उन्हें समुद्री जहाज से भारत लाया जा रहा था, तब उन्होंने जहाज के शौचालय से निकलकर समुद्र में छलांग लगा दी और लगभग 11 किलोमीटर तैरकर फ्रांस के तट तक पहुंचे। वहां उन्होंने फ्रांस सरकार से राजनीतिक शरण की मांग की, किंतु बाद में उन्हें अंग्रेजों के हवाले कर दिया गया।
सेल्युलर जेल की अमानवीय यातनाएं
उन्होंने अंडमान की सेल्युलर जेल में दी जाने वाली कठोर यातनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कैदियों को प्रतिदिन बैलों की तरह कोल्हू में जोतकर तेल निकालना पड़ता था। एक अवसर पर सावरकर को वहां अपने छोटे भाई से मिलने का संयोग मिला, जहां बातचीत की भी अनुमति नहीं थी।
मां का अद्वितीय बलिदान और पारिवारिक त्याग
बाद में ज्ञात हुआ कि उनका तीसरा भाई भी स्वतंत्रता संग्राम के कारण जेल में बंद था। शांता कुमार ने कहा कि घर पर मां अकेली थीं और तीनों बेटों ने राष्ट्रहित में अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया, यह बलिदान विश्व इतिहास में अद्वितीय है।
राष्ट्रसेवा के लिए मां का आशीर्वाद
उन्होंने एक भावनात्मक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि जब तीसरे पुत्र ने भी स्वतंत्रता संग्राम के मार्ग पर चलने के लिए मां से आशीर्वाद मांगा, तो मां ने भारी मन से उसे भी राष्ट्रसेवा के लिए विदा किया। शांता कुमार ने कहा कि ऐसे त्याग और समर्पण का उदाहरण विश्व इतिहास में दुर्लभ है।
शांता कुमार के निजी अनुभव
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने अपने निजी अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें दिल्ली के रामलीला मैदान में सावरकर का भाषण सुनने का अवसर मिला था तथा बाद में मुंबई में उनसे भेंट भी की थी। उन्होंने कहा कि सावरकर ने उनकी पुस्तक के लिए आशीर्वाद दिया था, जिसे वे अपना सौभाग्य मानते हैं।
केंद्र सरकार से शीघ्र निर्णय की अपील
शांता कुमार ने कहा कि यदि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भी भारत वीर सावरकर को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित नहीं करता है, तो यह देश के 140 करोड़ नागरिकों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण होगा। उन्होंने केंद्र सरकार से इस विषय पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।

















