माँ को बच्चे और करियर के बीच चुनना नहीं पड़ेगा: दिल्ली हाईकोर्ट ने अमेरिका जाने की दी इजाजत
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माँ को बच्चे और करियर के बीच चुनना नहीं पड़ेगा: दिल्ली हाईकोर्ट ने अमेरिका जाने की दी इजाजत

दिल्ली हाईकोर्ट ने माँ ट्विंकल विनायक को नाबालिग बेटे के साथ अमेरिका जाकर पोस्ट-ग्रेजुएट कोर्स पूरा करने की इजाजत दी। जस्टिस सौरभ बनर्जी बोले- माँ को बच्चे और करियर में से एक नहीं चुनना पड़ेगा। शर्तों के साथ फैसला।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Feb 7, 2026, 11:52 am IST
in दिल्ली
Delhi High court Arvind Kejriwal Delhi liquor scam

प्रतीकात्मक तस्वीर

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक माँ को अमेरिका जाने की इजाजत दे दी है, ताकि वो अपना पोस्ट-ग्रेजुएट कोर्स पूरा कर सके और अपने नाबालिग बेटे को साथ ले जा सके। ये फैसला 5 फरवरी 2026 को आया, जिसमें जस्टिस सौरभ बनर्जी ने कहा कि माँ को बच्चे और करियर के बीच चुनना नहीं पड़ना चाहिए।

क्या है पूरा मामला

माँ का नाम ट्विंकल विनायक है और पिता विशाल वर्मा। दोनों की शादी 2014 में हुई थी और 2017 में एक बेटा हुआ। मई 2019 में दोनों अलग हो गए, तब से बच्चा माँ के साथ ही रह रहा है। जनवरी 2023 में फैमिली कोर्ट ने पिता को विजिटेशन राइट्स दिए थे, जिन्हें बाद में हाईकोर्ट ने थोड़ा बदला। जुलाई 2024 में माँ बिना कोर्ट की पहले से इजाजत लिए बच्चे को लेकर अमेरिका चली गईं, क्योंकि उन्हें वर्जीनिया के मैरीमाउंट यूनिवर्सिटी में पब्लिक हेल्थ एजुकेशन एंड प्रमोशन में मास्टर्स प्रोग्राम (MS) मिल गया था।

ये कोर्स अगस्त 2024 से अगस्त 2027 तक चलना है। पिता ने हेबियस कॉर्पस पिटीशन दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट के अगस्त 2025 के आदेश के बाद माँ ने हाईकोर्ट में अप्लिकेशन डाली कि उन्हें बच्चे के साथ अमेरिका वापस जाने की परमिशन मिले कोर्स पूरा करने के लिए।

माँ का बयान

माँ की तरफ से एडवोकेट डॉ. स्वाति जिंदल गर्ग ने कहा कि ये कोर्स उनकी करियर ग्रोथ के लिए बहुत जरूरी है, जिससे वो आर्थिक रूप से मजबूत होंगी और बच्चे को बेहतर जिंदगी दे पाएंगी। उन्होंने बताया कि पहला सेमेस्टर पूरा कर लिया है और GPA भी अच्छा है। उनके माता-पिता ने अपनी प्रॉपर्टी बेचकर फाइनेंशियल सपोर्ट किया है। माँ की ओर से कई पुराने केसों का हवाला दिया, जैसे विवेक सिंह बनाम रोमानी सिंह, जिसमें कहा गया कि माँ नैचुरल गार्जियन है और बच्चे के डेवलपमेंट के लिए उसकी मौजूदगी जरूरी है।

पिता का बयान

पिता की तरफ से एडवोकेट उदित गुप्ता ने कहा कि ये आवेदन पिता के विजिटेशन राइट्स को खत्म करने की कोशिश है। बच्चे का कल्याण माँ के करियर से ऊपर होना चाहिए। बच्चा भारत में स्थिर माहौल से उखड़ जाएगा और कोर्ट की जूरिस्डिक्शन कमजोर हो जाएगी। उन्होंने रोसी जैकब और शिल्पा अग्रवाल जैसे केसों का जिक्र किया। पिता को डर था कि माँ शायद वापस न आएं और वो बेटे से हमेशा के लिए अलग हो जाएं।

कोर्ट का बैलेंसिंग फैसला

कोर्ट ने बच्चे के कल्याण और माँ के पर्सनल डेवलपमेंट के अधिकार को बैलेंस किया। आर्टिकल 21 के तहत जीवन का अधिकार सिर्फ जिंदा रहना नहीं, बल्कि पर्सनल ग्रोथ और अच्छे फैसले लेने की आजादी भी है। जस्टिस बनर्जी ने कहा कि माँ प्राइमरी केयरगिवर है, बच्चे की जिम्मेदारी उसकी है, इसलिए उसे शिक्षा या सेल्फ-एडवांसमेंट छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। इससे माँ की गरिमा, आर्थिक इंडिपेंडेंस और कल्याण मजबूत होता है, जो आखिरकार बच्चे के लिए भी अच्छा माहौल बनाता है।

कोर्ट ने माना कि माँ का अमेरिका जाना बोनाफाइड और समझदारी वाला फैसला है। बच्चे को कोई बड़ा नुकसान नहीं दिखा। माँ ने पहले कोर्ट के सामने आने का वादा निभाया, जिससे उनकी क्रेडिबिलिटी साबित हुई। पुराने केस विक्रम वीर वोहरा का हवाला देते हुए कहा कि हर इंसान को अपनी पूरी क्षमता दिखाने का हक है और माँ को बच्चे-करियर में से एक चुनने नहीं कहा जा सकता।

मां को मिली राहत

कोर्ट ने माँ के आवेदन को मंजूर कर लिया है। उन्हें बच्चे के साथ अमेरिका जाने और कोर्स पूरा करने की इजाजत मिल गई है। लेकिन कई शर्तें भी रखी हैं:

  • माँ को अमेरिका में एफिडेविट दाखिल करना होगा कि वो एड्रेस नहीं बदलेगी बिना बताए।
  • पिता को वीकेंड पर 30 मिनट और बुधवार को 10-15 मिनट वीडियो कॉल का अधिकार।
  • बच्चा भारत में समर वेकेशन में 2 महीने और विंटर में 10 दिन रहेगा, जिसमें पिता को हफ्ते में दो 4 घंटे की मीटिंग और वीकेंड पर ओवरनाइट विजिट मिलेगा।
  • कोर्स पूरा होने के बाद माँ कोई नया कोर्स या जॉब शुरू किए बिना भारत वापस आएगी।
  • फाइनेंशियल डिटेल्स और पिता के आईटीआर भी देने होंगे।
  • FRRO और इमीग्रेशन ब्यूरो को ऑर्डर की जानकारी दी जाएगी ताकि ट्रैवल आसान हो।

 

Topics: mother's welfare and personal developmentDelhi High Courtदिल्ली हाईकोर्टअनुच्छेद 21Article 21ट्विंकल विनायकविशाल वर्मामां का कल्याण और व्यवक्तिगत विकासTwinkle VinayakVishal Verma
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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