दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार (8 अप्रैल) को कथित पत्रकार राणा अयूब ट्वीट मामले में अहम सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि हिंदू देवी-देवताओं और वीर सावरकर पर किए गए ट्वीट्स अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक हैं। जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की पीठ ने याचिका पर सुनवाई के दौरान राणा के पोस्ट्स को हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई को कहा। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स, दिल्ली पुलिस और राणा अय्यूब को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार (10 अप्रैल) को होगी।
‘अपमानजनक पोस्ट समाज में तनाव पैदा कर सकते हैं’
अदालत ने स्पष्ट किया ये पोस्ट अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक हैं, जो समाज में तनाव पैदा कर सकते हैं। ऐसे में इस गंभीर मामले पर तुरंत विचार करने की जरूरत है। इसके लिए केंद्र सरकार, एक्स और दिल्ली पुलिस को मिलकर काम करना होगा। राणा अयूब के अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक ट्वीट्स को देखते हुए यह कार्रवाई जरूरी है, जिसके लिए एक सक्षम कोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज की गई है।
भारतीय सेना के खिलाफ भी अपमानजनक टिप्पणियां की गईं
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह याचिका अमिता सचदेवा की ओर से दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि इन पोस्ट्स के माध्यम से न केवल हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया गया, बल्कि वीर सावरकर और भारतीय सेना के खिलाफ भी अपमानजनक टिप्पणियां की गई हैं। याचिका में मांग की गई है कि राणा अय्यूब के एक्स प्लेटफॉर्म पर किए गए विवादित पोस्ट तत्काल हटाए जाएं। याचिकाकर्ता का कहना है कि ये पोस्ट अपमानजनक, भड़काऊ और साम्प्रदायिक रूप से संवेदनशील हैं, जिससे लगातार धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं व सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो रहा है। बताया जा रहा है कि वर्ष 2013 से 2017 के बीच ये पोस्ट्स किए गए हैं। याचिकाकर्ता ने खुद को सनातन धर्म का अनुयायी बताते हुए पहले नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी और इन पोस्ट के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की थी। वहीं, इन ट्वीट्स के आधार पर अदालत के निर्देश पर राणा अय्यूब के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश भी दिया जा चुका है।

















