लखनऊ । उत्तर प्रदेश में गुमशुदा लोगों के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल किए गए विवरण को देखने के बाद कहा है कि प्रदेश के अपर मुख्य सचिव गृह एवं पुलिस महानिदेशक शपथ पत्र पर जवाब दाखिल करें। उच्च न्यायालय ने अपर मुख्य सचिव गृह एवं पुलिस महनिदेशक को 23 मार्च को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हाजिर होने के लिए कहा है।
23 मार्च को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए होगी पेशी
उच्च न्यायालय ने कहा है कि 23 मार्च को अगली सुनवाई में दोनों अधिकारी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालत के समक्ष उपस्थित होंगे। कोर्ट ने कहा है कि गुमशुदा लोगों की तलाश के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है ? गत दो साल में एक लाख गुम लोगों की तलाश की जा रही है मगर क्या कारण है कि सफलता नहीं मिल पा रही है ?
खंडपीठ का आदेश, याचिका की सुनवाई के दौरान निर्देश
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को यह आदेश लखनऊ के चिनहट निवासी विक्रमा प्रसाद की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ता ने जुलाई 2024 में याचिका दाखिल की थी। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि उनके गुम हुए बेटे की तलाश में तेजी लाने के लिए पुलिस को निर्देश दिए जाएं।
सरकार के शपथ पत्र पर कोर्ट की टिप्पणी
इस याचिका कि सुनवाई के दौरान गत 29 जनवरी को कोर्ट के आदेश पर अपर मुख्य सचिव, गृह ने अपने शपथ पत्र पर कहा कि 1 जनवरी 2024 से 18 जनवरी 2026 के बीच प्रदेश में करीब 1 लाख 8 हजार 300 गुमशुदा लोगों की शिकायतें दर्ज की गई। इनमें से 9 हजार गुमशुदा लोगों की तलाश की कार्रवाई शुरू की गई। कोर्ट ने इसे अचंभित करने वाला विवरण करार दिया। अगली सुनवाई अब 23 मार्च को होगी।

















