पाञ्चजन्य के 79वें स्थापना वर्ष के अवसर पर आयोजित “बात भारत की” में केंद्रीय संचार और पूर्वोत्तर मामलों के मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा से बात की। उन्होंने खुद को गौरवान्वित बताते हुए कहा कि पाञ्चजन्य मेरे परिवार का अभिन्न अंग है।
दूरसंचार के मुद्दे पर बात करते हुए इसे विश्व का सबसे बड़ा कनेक्टिविटी की कड़ी बन गया है। ये एक प्रकार का अदृश्य हाईवे है। आंकड़ों के अनुसार, 2014 में देश में 25 करोड़ इंटरनेट कनेक्शन थे, लेकिन ये आज 100 करोड़ से अधिक है। ब्रॉडबैंड के कनेक्शन केवल 6 करोड़ थे, लेकिन ये आज 100 करोड़ से अधिक हो गए हैं और वो भी केवल 10 साल में। मोबाइल की कनेक्टिविटी करीब 120 करोड़ की हो गई है। इंटरनेट सर्विस की पहुंच आज गांव-गांव है।
इसके साथ ही ये दुनिया का सबसे सस्ती व्यवस्था है। इंटरनेट हाई वे का लोकतांत्रिकीकरण अगर किसी ने किया है तो वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है। इसके अलावा 120 करोड़ मोबाइल यूजर में से करीब 30 करोड़ लोग आज 5जी का इस्तेमाल कर रहे हैं। 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने B6G अलायंस गठित किया था। इसमें 16 सदस्य थे। आज उसके सदस्य 84 हो गए हैं।
टेक्नॉलॉजी बढ़ने के साथ ही ऑनलाइन फ्रॉड की चुनौतियां भी बढ़ी हैं, उससे कैसे निपटेंगे?
भारत में तकनीक की पेनिट्रेशन हो चुकी है। 2030 तक भारत में 100 करोड़ 5जी यूजर होने का अनुमान है। रही बात उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने की तो ये संचार विभाग की जिम्मेदारी है और इसके लिए कई फायरवॉल स्थापित की है। जैसे कि ‘संचार साथी’। ये एक सॉफ्टवेयर है, जिसे डीओटी ने बनाया है। अब ये सफल उतना ही होगी, जितना जनता इसका इस्तेमाल करेगी। इस पर अब तक 20 करोड़ हिट्स हो चुके हैं। संचार साथी करता ये है कि अगर कोई व्यक्ति आपका डेटा लेकर कोई मोबाइल कनेक्शन लेता है तो ये आपको तुरंत बता देता है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस एप की मदद से एक करोड़ 92 लाख लोगों को ब्लॉक करके डिसेबल किया गया है। ये वो लोग हैं, जिन्होंने आपका डेटा चोरी किया होता है। इसके अलावा करीब 1000 करोड़ के मोबाइल को रिकवर करके उपभोक्ता को वापस दिलाया है।
बैंकों के लिए सरकार एक सॉफ्टवेयर लेकर आई है, जिसका नाम फाइनैंशियल फ्रॉड रिस्क इंडीकेटर है। जहां फ्रॉड की शिकायत पर आपका पैसा वापस दिलाया जाता है। इसके तहत करीब 500 करोड़ रुपए के फ्रॉड्स को अब तक रोका गया है। आरबीआई ने सभी बैंकों को एफआरआई के सॉफ्टवेयर को इस्तेमाल करने के लिए गैजेट भी निकाला है।
इस पर कोई विवाद तो नहीं है ?
इस पर विवाद इस बात का था कि जैसे आपके मोबाइल पर कई सारे प्री इंस्टाल्ड एप हैं। हमने ये कहा कि कंपनियां इस ऐप को भी प्री इंस्टाल कर दें, तो इसका काफी विरोध हुआ कि लोगों की निजता का क्या होगा। लेकिन ये समझने वाली बात है कि जब तक आप एप को खोलकर उस पर रजिस्टर नहीं करेंगे तो आप उसका इस्तेमाल ही नहीं कर पाएंगे।

















