स्थापना दिवस पाञ्चजन्य@79 :“दूरसंचार क्षेत्र में भारत ने लगाई बड़ी छलांग”
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स्थापना दिवस पाञ्चजन्य@79 :“दूरसंचार क्षेत्र में भारत ने लगाई बड़ी छलांग”

‘बात भारत की’ सत्र में केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा ने विशेष बातचीत की। प्रस्तुत हैं उसके संपादित अंश:

Written byPanchjanyaPanchjanya
Feb 10, 2026, 04:08 pm IST
inसाक्षात्कार, पाञ्चजन्य इवेंट
केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया

केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया

भारत में संचार क्रांति की जो लंबी यात्रा रही है, आप उसे कैसे देखते हैं?
भारत में संचार क्रांति की यात्रा अपने-आप में ऐतिहासिक है। आज दूरसंचार केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व की सबसे बड़ी कनेक्टिविटी की कड़ी बन चुकी है। एक छोटे से मोबाइल डिब्बे के माध्यम से हम न केवल बातचीत करते हैं, बल्कि व्यवसाय, सूचना, शोध, नवाचार-सब कुछ इसी के जरिए व्यक्ति और दुनिया तक पहुंचते हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 2014 में यह संकल्प लिया था कि भारत में एक सुदृढ़, आधुनिक और कटिंग-एज अदृश्य हाईवे का निर्माण किया जाए। इसके परिणाम आज हमारे सामने हैं। 2014 में देश में लगभग 25 करोड़ इंटरनेट उपभोक्ता थे। आज यह संख्या 100 करोड़ से अधिक हो चुकी है। उस समय ब्रॉडबैंड (2 Mbps से अधिक) कनेक्शन मात्र 6 करोड़ थे, जो आज 10 वर्ष में बढ़कर 100 करोड़ से अधिक हो चुके हैं। देश की आबादी लगभग 140 करोड़ है और हम तेजी से परिपूर्णता की ओर बढ़ रहे हैं।

जब इस क्षेत्र की जिम्मेदारी आपको मिली, तो बड़ी चुनौतियां क्या नजर आईं? 6G को लेकर दुनिया में क्या स्थिति है?
देखिए, जब आपको कोई जिम्मेदारी मिलती है तो चुनौतियां उसके साथ आती हैं। मेरे सामने भी अनेक चुनौतियां रहीं। कुछ तो ऐसी चुनाैतियां थीं, जिन्हें देश ही नहीं दुनिया के लोग कहते थे कि ये असंभव ही है। लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दृढ़ संकल्प से उन कार्यों को भी करने में हमने सफलता पाई है। आज देश में मोबाइल उपयोगकर्ताओं की संख्या लगभग 120 करोड़ है। गांव-गांव, घर-घर मोबाइल और इंटरनेट पहुंच चुका है। देश में 8 लाख से अधिक मोबाइल टावर लगे हुए हैं। दुनिया में सबसे कम टैरिफ भारत में है। 2014 में कॉल दर 50 पैसे प्रति मिनट थी, जो आज घटकर 0.03 पैसे प्रति मिनट रह गई है, यानी लगभग मुफ्त। यह 97 प्रतिशत की गिरावट है। एक जीबी डेटा की कीमत 2014 में लगभग 270 रुपये प्रति GB थी, जो आज 8 रुपये 27 पैसे रह गई है, लगभग 95 प्रतिशत की कमी। यदि संचार का लोकतांत्रिकरण किसी ने देश में ही नहीं, दुनिया में किया है, तो वह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी हैं। यह कोई अतिशयोक्ति नहीं, बल्कि हकीकत है। इसी डिजिटल हाईवे के आधार पर आज आविष्कार और नवाचार हो रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और व्यापार की रीढ़ टेलीकॉम है। हमने मात्र 22 महीनें में 5G का विस्तार देश के 99 प्रतिशत जिलों तक कर दिया है। आज 120 करोड़ मोबाइल उपभोक्ताओं में से 40 करोड़ लोग 5G का प्रयोग करते हैं। भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा 5G बाजार बन चुका है। जिन क्षेत्रों में भारत का नामोनिशान नहीं होता था, एक तरीके से कहें तो हम फॉलोवर होते थे, आज भारत की उन क्षेत्रों में दमदार उपस्थिति है और हम नेतृत्व कर रहे हैं। 2023 में प्रधानमंत्री जी ने बी6जीए अलायंस का गठन किया। शुरुआत में इसके 16 सदस्य थे, जो आज बढ़कर 84 हो चुके हैं। इसमें निजी क्षेत्र, उद्यमी, वैज्ञानिक, स्टार्टअप आदि शामिल हैं। हमने 11 देशों के संगठनों के साथ एमओयू साइन किए हैं। हमारा लक्ष्य है कि 6G स्टैंडर्ड सेटिंग में भारत कम से कम 10 प्रतिशत पेटेंट योगदान दे। आज भारत फॉलोअर नहीं, बल्कि स्टैंडर्ड सेटिंग मोड में है विश्व के लिए। इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि इन दस वर्ष में प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में हम लोग उपकरण से आविष्कार के क्षेत्र में पहुंच चुके हैं। हमने संचार के क्षेत्र में छलांग लगाई है। अब भारत अग्रसर हो चुका है और टेलीकॉम के क्षेत्र में नेतृत्व कर रहा है।

संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से बातचीत करते वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा

ऑनलाइन कम्युनिकेशन के साथ फ्रॉड भी बढ़े हैं। जब बैंकिंग, परमिशन और निजी डेटा सब कुछ मोबाइल पर है, तो सुरक्षा की चुनौती को आप कैसे देखते हैं ?
यह बड़ा महत्वपूर्ण विषय है। जब कोई नई तकनीक आती है, तो उसका सकारात्मक उपयोग भी होता है और कुछ नकारात्मक तत्व उसका दुरुपयोग करने का प्रयास करते हैं। उपभोक्ता की सुरक्षा करना संचार विभाग की मूल जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से हमने कई फायरवॉल स्थापित किए हैं। उदाहरण के तौर पर ‘संचार साथी’ पोर्टल। यह डीओटी द्वारा विकसित एक सॉफ्टवेयर है, जिसकी सफलता जनभागीदारी पर निर्भर है। आज इस पोर्टल पर 20 करोड़ से अधिक हिट्स हो चुके हैं और एप 2 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। इसके माध्यम से यदि किसी ने आपके नाम पर या डेटा लेकर अनधिकृत मोबाइल कनेक्शन लिया है, तो उसकी जानकारी उपभोक्ता को मिल जाती है। तो इसके माध्यम से आपको भी मदद मिली, देश को भी मदद मिली और विभाग को भी मदद मिली। अब तक 1 करोड़ 92 लाख अनधिकृत कनेक्शन ब्लॉक किए जा चुके हैं। कुल मिलाकर लगभग 2 करोड़ कनेक्शन डिस्कनेक्ट किए गए हैं। व्हाट्सएप के माध्यम से होने वाले फ्रॉड में 27 लाख अकाउंट डिस्कनेक्ट किए गए हैं। हमने लगभग 1000 करोड़ रुपये के साढ़े आठ लाख मोबाइल फोन जो चोरी हुए थे,उन मोबाइल फोन को बरामद कर उपभोक्ताओं को वापस दिलाए हैं। विदेश से आने वाली स्पैम कॉल्स को रोकने के लिए सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है। जिससे रोजाना 1 करोड़ 35 लाख कॉल्स आती थीं जो घटकर केवल 1 लाख 35 हजार रह गई हैं। यानी 95 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज हुई है। इसके अतिरिक्त एक डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है, जिसमें 800-900 बैंक हैं। इसमें सभी राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेशों की पुलिस, एजेंसियां और गृह मंत्रालय शामिल है। इसके माध्यम से अब तक 1000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी रोकी जा चुकी है और बैंक खातों से 500 करोड़ रुपये की ठगी को समय रहते रोका गया है। आरबीआई ने भी गजट अधिसूचना के माध्यम से सभी बैंकों को एफआरआई सॉफ्टवेयर के उपयोग की सलाह दी है।

फिर इस प्रणाली को लेकर विवाद क्यों हुआ?
विवाद इस बात को लेकर था कि मोबाइल फोन में पहले से प्री-इंस्टॉल्ड ऐप्स होते हैं और हमने निर्माताओं से कहा कि इस ऐप को भी प्री-इंस्टॉल किया जाए। इस पर निजता को लेकर प्रश्न उठे। हमने स्पष्ट किया कि जब तक उपभोक्ता स्वयं रजिस्ट्रेशन नहीं करेगा, तब तक ऐप का उपयोग संभव नहीं है। सुविधा और निजता के बीच एक बारीक रेखा होती है। अंततः अंतिम निर्णय उपभोक्ता का ही होना चाहिए कि उसे लाभ कहां दिखता है और हानि कहां। मैं मानता हूं कि हमारा मंत्रालय जनता का सहभागी है।

टेलीकॉम क्षेत्र में आने वाले समय में क्या बदलाव देखने को मिलेंगे?
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते दस वर्ष में भारत ने दूरसंचार के क्षेत्र में अभूतपूर्व छलांग लगाई है। कनेक्टिविटी, किफायती दरें, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक स्टैंडर्ड सेटिंग—हर मोर्चे पर भारत ने अपनी स्थिति सुदृढ़ की है। देश ने न केवल 5G के तेजी से क्रियान्वयन में विश्व को चौंकाया, बल्कि 6G के लिए भी निर्णायक कदम उठाए हैं। निश्चित रूप से आने वाले दिनों में बदलाव ही बदलाव नजर आएंगे। जैसे-जैसे टेलीकॉम का विस्तार होगा, मानव जीवन में तकनीक का उपयोग बढ़ेगा। उदाहरण के लिए जैसे आने वाले समय में कृषि के क्षेत्र में। भविष्य में तकनीक यह बताएगी कि किस पौधे को कब पानी चाहिए और उसी समय स्प्रिंकलर स्वतः चालू हो जाएगा। इससे समय, परिश्रम, खर्च और पानी दोनों की बचत होगी। दूरदराज के इलाकों में जहां डॉक्टर नहीं पहुंच पाते, वहां तकनीक के सहारे मोबाइल के माध्यम से सलाह लेकर उचित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। ऐसे ही 6G आने के बाद शिक्षा के क्षेत्र में लाइव लेक्चर, ट्यूशन और प्रशिक्षण वास्तविक समय में संभव हो पाएगा। दुनिया भर की शिक्षण व्यवस्था का लाभ ले सकेंगे। कुल मिलाकर प्रत्येक क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन देखने को मिलेंगे।

आपके पास डाक विभाग का भी काम है। इसे आप किस रूप में देखते हैं?
मेरी जनसेवा की शुरुआत 2007 में डाक विभाग से हुई थी और तब से इसका एक भावनात्मक जुड़ाव है। देश में 1 लाख 65 हजार डाक घर हैं, जिन्हें आधुनिक बनाने की आवश्यकता है। आज 2 लाख 80 हजार डाकिया केवल चिट्ठियां ही नहीं, बल्कि बैंकिंग सेवाएं भी लेकर जाते हैं। जिन क्षेत्रों में बैंक नहीं पहुंचते, वहां डाक घर की पहुंच है। डाक विभाग में हमने चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर की नियुक्ति की है। 2023–24 में डाक विभाग का कुल राजस्व 12,800 करोड़ रुपये था। चालू वित्त वर्ष के नौ महीनों में ही 9 प्रतिशत की वृद्धि की है। आज डाक विभाग भारत सरकार का एक कॉस्ट सेंटर बन चुका है।

पूरा साक्षात्कार पढ़ने के लिए नीचे दिए क्यूआर कोड स्केन करें

Topics: भारत में संचार क्रांतिज्योतिरादित्य सिंधिया6G India Missionडिजिटल इंडियादूरसंचार और डेटासाइबर सुरक्षा5G विस्तारडाक विभागटेलीकॉम स्टैंडर्ड सेटिंगपाञ्चजन्य विशेषइंटरनेट उपभोक्तासंचार साथी पोर्टलसरकारी पहल और विभागमोदी सरकार के 10 वर्षMAIN. FEAUREDभविष्य की तकनीकDigital Highwayस्मार्ट कृषिPanchjanya@79टेली-मेडिसिन
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