कनाडा में दया या धंधा? : मृत्यु में चिकित्सीय सहायता पर हंगामा, मरने वालों के अंग प्रयोग किये जाने पर प्रश्न?
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कनाडा में दया या धंधा? : मृत्यु में चिकित्सीय सहायता पर हंगामा, मरने वालों के अंग प्रयोग किये जाने पर प्रश्न?

कनाडा की MAiD योजना पर बड़ा सवाल— क्या इच्छामृत्यु दया है या अंग तस्करी से जुड़ा खतरनाक सिस्टम? जानिए पूरा विवाद....

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by Shivam Dixit
Jan 28, 2026, 08:00 pm IST
in विश्व

कनाडा में दो मामलों को लेकर मेडिकल असिस्टेंस इन डाइंग योजना पर हंगामा मचा हुआ है। यह दो मामलों को लेकर चर्चा में है। एक महिला, जिसे उसकी इच्छा के खिलाफ मृत्यु दे दी गई, क्योंकि उसके पति ने उसकी देखभाल करने से इनकार कर दिया था और उसे शायद अस्पताल में चिकित्सीय सुविधा नहीं मिल सकती थी। इस पर उसके पति ने अनुरोध किया कि वह अपनी पत्नी के लिए मृत्यु की मांग करता है।

महिला की इच्छा के विरुद्ध दी गई मृत्यु

उसकी पत्नी बीमार थी और वृद्ध भी। हालांकि पहले उसकी पत्नी ने भी इसकी मांग की थी, परंतु फिर अपने धार्मिक विश्वासों के चलते उसने अपना अनुरोध वापस ले लिया था। जब अस्पताल ने चिकित्सीय मांग ठुकरा दी तो पत्नी की इच्छा न होते हुए भी पति ने असमर्थता व्यक्त की और उसकी पत्नी को मृत्यु दे दी गई।

26 वर्षीय युवक की मृत्यु और सार्वजनिक आक्रोश

इस घटना के साथ ही एक छब्बीस वर्षीय युवक की इस प्रकार की मृत्यु के बाद सोशल मीडिया से लेकर मीडिया में हंगामा मचा हुआ है। मीडिया में हेडलाइन ही यह आ रही है कि आदमी ने अपनी पत्नी को इच्छा मृत्यु के चलते मरवा दिया।

परिवार की अनुमति के बिना दी गई मृत्यु पर सवाल

इस युवक के परिवार में लोग इस घटना को लेकर क्रोधित हैं और लगातार यह प्रश्न उठा रहे हैं कि बिना परिवार की अनुमति के मृत्यु कैसे दी जा सकती है?

परिपक्व नाबालिगों तक MAiD के विस्तार की योजना

जब इस विषय में और अधिक खोजा गया तो और भी चौंकाने वाली सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। वर्ष 2025 में नवंबर में यह भी योजना बनाई गई थी कि “परिपक्व नाबालिगों” तक मेडिकल असिस्टेंस इन डाइंग का विस्तार कर दिया जाये।

सोशल मीडिया पर पुरानी घटनाओं की बाढ़

इन दो घटनाओं के बाद सोशल मीडिया पर अब लोग खुलकर पुरानी घटनाओं को भी साझा कर रहे हैं। पुराने समाचार साझा कर रहे हैं। 26 वर्षीय कियानों की माँ की अपील लोगों को भीतर तक परेशान कर रही है।

कियानो की बीमारी और माँ की पीड़ा

26 वर्षीय कियानो को डायबिटीज थी, डिप्रेशन था और उसे एक आँख से देखने में समस्या थी। परंतु वह गंभीर रूप से बीमार नहीं था। न ही उसे ऐसी बीमारी थी, जिसे ठीक न किया जा सके।

माँ का आरोप: सिस्टम ने मौत चुनी

उसकी माँ मर्शीला का कहना है कि न ही कोई सुरक्षा, न ही जीवन बचाने का प्रयास किया गया। बस जीवन को समाप्त कर दिया गया। कियानो की माँ ने कहा कि कोई भी बच्चा सिस्टम के कारण नहीं मरना चाहिए। उन्होनें कहा कि किसी भी अभिभावक को अपने बच्चे को इसलिए नहीं दफनाना चाहिए कि सिस्टम और डॉक्टर ने उसके लिए मौत चुनी है।

500 मौतें देने वाले डॉक्टर पर उठते सवाल

उस डॉक्टर पर भी लगातार प्रश्न उठ रहे हैं, जिसने अभी तक 500 लोगों को इस प्रकार की मौत दी है। लोगों का कहना है कि कनाडा को अपनी नीतियों में परिवर्तन करना होगा।

मीडिया रिपोर्ट्स और इच्छामृत्यु की वास्तविकता

मीडिया के अनुसार मृत्यु के निकट पहुंचे लोग भी मरने मे सहायता नहीं चाहते हैं, बल्कि वे अकेलेपन से दूर होना चाहते हैं। वे दर्द से आराम चाहते हैं। परंतु दर्द से आराम का अर्थ मौत नहीं है।

MAiD और ऑर्गन हार्वेस्टिंग का खुलासा

इसी बीच एक और समाचार का लिंक आया है, जिसमें और भी हैरान करने वाला पहलू है। नवंबर 2025 में slaynews ने यह समाचार प्रकाशित किया था कि कनाडा सरकार की जो असिस्टिड सूइसाइड की व्यवस्था है, उसके कारण ऑर्गन हार्वेस्टिंग इंडस्ट्री में योगदान हो रहा है।

लिवर ट्रांसप्लांट में MAiD से प्राप्त अंगों का उपयोग

इसमें एक अध्ययन का हवाला दिया है। उस अध्ययन के अनुसार यह पता चला है कि देश के “मेडिकल असिस्टेंस इन डाइंग” (MAiD) प्रोग्राम के तहत मारे गए लोगों से लिए गए अंगों का अब लिवर ट्रांसप्लांट में इस्तेमाल किया जा रहा है, और इसके नतीजे रेगुलर डोनेशन जैसे ही हैं।

Journal of Hepatology की रिपोर्ट

https://www.journal-of-hepatology.eu में प्रकाशित इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से लिखा है कि “मेडिकल असिस्टेंस इन डाइंग” के माध्यम से मारे हुए लोगों के जो अंग प्राप्त हो रहे हैं, वे स्वस्थ जनों के अंगों के जैसे ही हैं।

लिबरल समर्थन और आलोचकों की निंदा

इस रिपोर्ट का स्वागत जहां लिबरल्स ने किया था तो वहीं आलोचकों ने इसकी निंदा की थी। अक्टूबर 2025 में ही यह समाचार था कि कनाडा में ऑर्गन हार्वेस्टिंग में इच्छा मृत्यु के एजेंडे के बढ़ने के साथ ही वृद्धि हुई है।

गरीबों को मरने के लिए प्रेरित करने का आरोप

इसमें लिखा था कि सिस्टम गरीब लोगों को मरने के लिए प्रेरित कर रहा है और अंग लेने वाले स्वस्थ लोगों के लाभ के लिए काम कर रहा है।

MAiD और अंग दान की सप्लाई चेन

जैसे-जैसे कनाडाई सरकार अपने इच्छामृत्यु कार्यक्रम का विस्तार कर रही है, MAiD प्रोग्राम से अंग दान सप्लाई चेन में तेज़ी आ रही है।

दिल ट्रांसप्लांट का अंतरराष्ट्रीय मामला

नेशनल पोस्ट के हवाले से रिपोर्ट किया गया था कि एक 38 वर्षीय ऐसे ही इच्छा मृत्यु पाए हुए कनाडाई नागरिक का दिल एक 59 वर्षीय अमेरिकी नागरिक के दिल में लगाया गया था, जिसका दिल फेल हो चुका था।

फेडरल डेटा और अंग दान की संख्या

हालांकि दिल ट्रांसप्लांट का यह पहला मामला था, मगर फेडरल डेटा के अनुसार “2016 से कनाडा में कम से कम 155 लोगों ने डॉक्टर द्वारा दिए गए जानलेवा इंजेक्शन के बाद अपने अंग और टिशू दान किए हैं।”

मृत व्यक्ति की सहमति पर विवाद

यह और भी विवादास्पद है कि कैसे मरने वाला अपने अंगों को दान करने की बात कर सकता है? या अनुमति दे सकता है?

दो-स्तरीय सिस्टम का खतरा

जैसे-जैसे यह चलन बढ़ रहा है, आलोचक चेता रहे हैं कि असिस्टेड डेथ और ऑर्गन डोनेशन के कॉम्बिनेशन से एक बहुत ज़्यादा फ़ायदेमंद दो-स्तरीय सिस्टम बनने का खतरा है, जहाँ कमज़ोर लोगों को स्वस्थ लोगों को फ़ायदा पहुँचाने के लिए “अपनी मर्ज़ी से” मौत चुनने के लिए मजबूर किया जाएगा।

जीवन समर्थकों की चेतावनी

जीवन का समर्थन करने वाले यह कह रहे हैं कि यह दया नहीं है, बल्कि यह चीज़ों को बेचने जैसा है।

विकसित देशों में कथित दया के नाम पर कुकृत्य

यह और भी अचंभित करने वाला पहलू है कि कथित विकसित देशों में इस प्रकार का सुनियोजित कुकृत्य कथित दया के नाम पर हो रहा है, जिसमें इंसानों को दया के नाम पर मारा जा रहा है, उनके अंगों को बेचा जा रहा है परंतु मीडिया में किसी भी प्रकार का कोई भी विमर्श नहीं है!

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