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अ​र्थव्यवस्था : टैरिफ तूफान में भारत की मजबूती

अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था तेज गति से बढ़ रही है। मजबूत घरेलू मांग, घटती महंगाई, बढ़ता एफडीआई, निर्यात विविधीकरण और जीएसटी सुधारों ने इस प्रगति को गति दी है

Written byराजीव उपाध्यायराजीव उपाध्याय
Jan 25, 2026, 05:51 pm IST
inभारत

अमेरिका के टैरिफ की मार और वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी अन्तर्निहित क्षमता के बूते लगातार आगे बढ़ रही है। भारत की जीडीपी 2025-26 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत और दूसरी दूसरी तिमाही में 8.2 प्रतिशत की दर से बढ़ी। इसमें घरेलू मांग की भूमिका महत्वपूर्ण रही। मजबूत घरेलू मांग ने निर्यात पर 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ को नजरअंदाज किया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास कहते हैं, ‘‘भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार बाधाओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और इसके दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बने रहने की उम्मीद है।’’

टैरिफ का तूफान

ट्रंप प्रशासन ने अगस्त 2025 में भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत ‘पारस्परिक’ टैरिफ लगाया, जो रूसी तेल खरीद पर दोगुना होकर 50 प्रतिशत हो गया। इससे अमेरिका के बाजार में 66 प्रतिशत भारतीय निर्यात पर असर पड़ा। फिर भी, दिसंबर 2025 में अमेरिका को होने वाला निर्यात 22.6 प्रतिशत बढ़कर 6.98 अरब डॉलर हो गया, जबकि कुल मर्चेंडाइज निर्यात सालाना आधार पर 1.8 प्रतिशत बढ़कर 38.5 अरब डॉलर हो गया। इन विपरीत परिस्थितियों में भारतीय निर्यातकों ने स्पेन (150 प्रतिशत की बढ़ोतरी), चीन और बांग्लादेश पर ध्यान देते हुए निर्यात को बढ़ाया है। भारत अब यूके, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ हुए मुक्त व्यापार से 2026 में निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि के लिए तैयार है।

ग्रोथ इंजन की गूंज

व्यापार की दिक्कतों के बाद भी भारतीय अर्थव्यवस्था अप्रैल-जून 2025 की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि 7.8 प्रतिशत थी, जो दूसरी तिमाही में बढ़कर 8.2 प्रतिशत हो गई। जीडीपी के विकास में कृषि, विनिर्माण और सेवाओं के साथ-साथ सालाना आधार पर 5 प्रतिशत से अधिक के कैपेक्स के बढ़ने का योगदान रहा है। विश्व मुद्रा बैंक (आईएमफ) ने अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक ऑउटलुक रिपोर्ट में भारत में 2025-26 के लिए विकास अनुमान को 0.7 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। यह साल की तीसरी तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन और चौथी तिमाही में मजबूत गति को दर्शाता है। 2026 और 2027 में वृद्धि 6.4 प्रतिशत तक होने का अनुमान है, क्योंकि चक्रीय और अस्थायी कारक कम हो जाएंगे। वहीं, शक्तिकांत दास 2025-26 के लिए 7.4 प्रतिशत का अनुमान लगाते हैं।
पिछले कुछ समय में विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रवाह में तेजी आई है। वित्त वर्ष 2024-25 में 81 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया, जो पिछले साल की तुलना में 14 प्रतिशत अधिक रहा। इसमें अधिकतर निवेश आईटी, विनिर्माण, डेटा सेंटर में हुए।

महंगाई घटी, खपत बढ़ी

रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में खुदरा महंगाई दर 2.6 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दी है। अर्थव्यस्था में कोर दबाव पहले की तुलना में और भी कम हुआ है। शक्तिकांत दास कहते हैं, ‘‘अक्तूबर 2025 में हेडलाइन खुदरा महंगाई दर रिकॉर्ड निचले स्तर (0.25 प्रतिशत) पर आ गई।’’ आईएमएफ ने उनकी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, ‘‘2025 में खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में कमी के कारण काफी गिरावट के बाद भारत में महंगाई लक्षित स्तर के निकट वापस आने की उम्मीद है।’’ पिछले दिनों आईएमएफ की प्रवक्ता जूली कोजाक ने कहा था कि भारत वैश्विक विकास को मदद देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि ‘हमने भारत में जो देखा है, उससे साफ है कि भारत दुनिया के लिए एक प्रमुख विकास इंजन है।

दरअसल, जीएसटी सुधारों ने अर्थव्यवस्था को बल दिया है। इसके कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को सीधे तौर पर लगभग 50,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि उपलब्ध हुई है। इसके कारण ग्रामीण मांग, ऑटो बिक्री, डिजिटल लेन-देन ने निजी खपत को बढ़ावा दिया है। ये क्षेत्र भारत की 60 प्रतिशत जीडीपी के चालक हैं। अर्थव्यवस्था में इस सकारात्मक परिवर्तन ने टैरिफ के कारण निर्यात में होने वाली गिरावट से बचाया है।

भविष्य की दिशा

भारत ने सुधार के कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया है, जिनमें आईबीसी और जीएसटी जैसे सुधारों के कारण निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। खास बात यह है कि आईएमएफ के 7.3 प्रतिशत अनुमान के विपरीत आईएमएफ ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में जीडीपी विकास की दर सिर्फ 3.3 प्रतिशत अनुमानित की है। हालांकि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच 2026-27 में भारतीय अर्थव्यवस्था में विकास दर में नरमी की संभावना है। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आईएमएफ ने 2026-27 में 6.4 प्रतिशत विकास दर का अनुमान किया है। वहीं, भारतीय स्टेट बैंक के आर्थिक अनुसंधान विभाग ने 7.5 प्रतिशत या इससे अधिक, जबकि एशियाई विकास बैंक ने 7.2 प्रतिशत और रेटिंग एजेंसी फिच ने 7.4 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया है। अमेरिका द्वारा थोपे गए टैरिफ के कारण निर्यात प्रभावित हो रहा है, जिसके कारण व्यापार घाटा बढ़ रहा है। यदि इन परिस्थितियों में तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो तेजी से गिरते रुपये पर दबाव का खतरा है। हालांकि नीति आयोग के सीईओ ने चेतावनी दी है कि टैरिफ किसी भी देश की रक्षा नहीं करता है और भारत को अपने भले के लिए टैरिफ कम करने की ज़रूरत है।

नीतियों को अर्थव्यवस्था में विकास की गति और बढ़ाने के उद्देश्य बनाने की आवश्यकता है। भारत ने जीएसटी व श्रम सहित कई क्षेत्रों में गुणात्मक सुधार किया है। फिर अभी बहुत से क्षेत्र हैं, जिनमें सुधार की आवश्यकता है। इनमें प्रमुख हैं लालफीताशाही कम करना, निर्यात बाजारों में विविधता (अफ्रीका, आसियान आदि) तथा ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देना। डेमोग्राफिक डिविडेंड और सुधार भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में ग्रोथ पोल के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखते हैं।

वर्तमान वैश्विक अनिश्चितताओं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ और ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत किसी भी प्रकार की लापरवाही भारत को बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है। टैरिफ भारत के लिए नकारात्मक तो हैं, किंतु यह हमें सिखाते भी हैं कि किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए बाजारों का विविधीकरण सबसे आवश्यक है। भारत का लचीलापन ही वह रणनीति है, जो इन विपरीत परिस्थितियों में काम आ रही है और भविष्य में भी काम आएंगी। भारत ने पिछले छह महीने में यूके, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (इएफटीए) ब्लॉक व ओमान के साथ मुक्त व्यापार समझौता किया है। यदि ये सभी समझौते सकारात्मक परिणाम देना प्रारंभ करते हैं तो वित्त वर्ष 2025-2026 में अर्थव्यवस्था में 7.5 प्रतिशत की दर से विकास अवश्यंभावी है।

Topics: भारत का पलटवारअमेरिकी चुनौतीबाजार विविधीकरणमुक्त व्यापार समझौतेपाञ्चजन्य विशेष GST सुधारGDP growthट्रंप प्रशासनराजीव उपाध्यायmain. FEATUREDअर्थव्यवस्था की मजबूतीटैरिफ का तूफान
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