बांग्लादेश में मुहम्मद यूनुस की अगुवाई में लगातार इस्लामिक कट्टरपंथी हिन्दुओं पर हमले कर रहे हैं। ऐसा कोई दिन नहीं होता, जब किसी हिन्दू को निशाना न बनाया जाता हो। इस कट्टरता के खिलाफ लंदन हिन्दू एसोसिएशन ने जोरदार प्रदर्शन किया। ये प्रदर्शन ब्रिटिश संसद के बाहर किया गया। इसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए।
प्रदर्शन का आयोजन और माहौल
प्रदर्शन का आयोजन बांग्लादेश हिंदू एसोसिएशन (यूके) ने किया। इसमें भारतीय मूल के लोग (PIOs) और बांग्लादेशी मूल के हिंदू शामिल थे। पार्लियामेंट स्क्वायर के बाहर यह कार्यक्रम चला। एक डिजिटल वैन का इस्तेमाल किया गया, जिस पर बांग्लादेश में कथित हिंदू उत्पीड़न से जुड़ी तस्वीरें दिखाई जा रही थीं। प्रदर्शनकारी प्लेकार्ड लेकर आए थे, जिन पर लिखा था कि हिंदुओं की हत्या रुकनी चाहिए, मंदिरों की सुरक्षा हो, और कुछ खास मामलों में न्याय मिले। परिवारों के साथ छोटे बच्चे भी मौजूद थे। माहौल शांतिपूर्ण था, लेकिन मौसम खराब होने से लोग भीगते रहे।
लेबर सरकार से बड़ी मांग
प्रदर्शनकारियों ने यूके की लेबर सरकार से कई बातें मांगीं। सबसे बड़ी मांग थी कि प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रहे कथित नरसंहार की निंदा करें। उन्होंने ब्रिटिश सरकार से कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की हत्याएं रोकने के लिए जल्दी हस्तक्षेप करे, बोलने और पूजा की आजादी सुनिश्चित करे।
मुहम्मद यूनुस से नोबल पुरस्कार वापस लेने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश में इस्लामिक कट्टरता को बढ़ावा दे रहे मुहम्मद यूनुस को दिया गया नोबेल शांति पुरस्कार वापस लेने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने इस्कॉन संत चिन्मय प्रभु की बिना शर्त रिहाई हो। हिन्दू मंदिरों की सुरक्षा करने, दीपू चंद्र दास की हत्या के मामले में न्याय की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ब्रिटिश सरकार बांग्लादेश हाई कमीशन को अपना गुस्सा और विरोध दर्ज कराए, और बांग्लादेश सरकार पर दबाव बनाए ताकि हिंदुओं को बचाया जा सके। उनका मानना है कि सरकार अभी तक काफी नहीं कर रही, और और ज्यादा किया जा सकता है।
बांग्लादेश में 40 से घटकर 7 फीसदी रह गए हिन्दू
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि 1947 में बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) में हिंदू आबादी 30-40 फीसदी थी, जो अब घटकर सिर्फ 7 फीसदी रह गई है। अंतरिम सरकार के आने के बाद से कानून-व्यवस्था नहीं है, बोलने की आजादी नहीं है, और मानवाधिकारों का हनन हो रहा है। उन्होंने हाल की घटनाओं का जिक्र किया, जैसे दीपू चंद्र दास की लिंचिंग। एक महिला अनामिका देव ने अपनी कहानी सुनाई कि 2004 में उनके पिता की हत्या हुई थी, और हिंदुओं को न्याय नहीं मिला। उनका परिवार धमकियों का शिकार हुआ था।
किसने क्या कहा
लेबर पार्टी के बेसिंगस्टोक सांसद ल्यूक मर्फी प्रदर्शन में मौजूद थे। उन्होंने कहा कि लेबर सरकार इस मुद्दे पर जुटी हुई है और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए दबाव बनाती रहेगी। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र के लोग उनसे संपर्क कर रहे हैं, और वे विदेश कार्यालय व संसद में यह मुद्दा उठा चुके हैं। पूर्व लेबर सांसद विरेंद्र शर्मा ने कहा कि ब्रिटिश सरकार और सभी मानवाधिकार संगठनों को बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा करनी चाहिए। हत्याएं रुकनी चाहिए, ताकि लोग आजादी से बोल सकें और पूजा कर सकें।
उन्होंने कहा कि सरकार को बांग्लादेश हाई कमीशन को अपना विरोध जताना चाहिए और अब तक काफी नहीं किया गया है। बांग्लादेश हिंदू एसोसिएशन (यूके) के महासचिव अलक चंदा ने पूछा कि ब्रिटेन इस सरकार पर दबाव क्यों नहीं बना रहा। अनामिका देव ने दोहराया कि हिंदुओं को न्याय नहीं मिलता, और यह नरसंहार है। वे चाहती हैं कि ब्रिटेन बांग्लादेश पर दबाव डाले ताकि हिंदू बच सकें।

















