ब्रिटेन में हाल ही में हुए एक सिख लड़की के साथ हुआ बलात्कार सुर्खियों में है और अब वह परत सामने आ रही है, जिस पर भारत में चर्चा कम होती है। वह है “कौर से खान” तक की यात्रा की कहानी! यह हैशटैग एक बार फिर से चर्चा में है, हाँ भारत में इस विषय पर चर्चा नहीं होगी! क्यों नहीं होती इसके कई और कारण हो सकते हैं। इसके ऐसे कारण हैं, जिनपर चर्चा करने से एक बहुत बड़ा वर्ग असहज हो जाता है।
वह कौन लोग हैं, जो अपनी ही बेटियों की पीड़ा पर चर्चा नहीं करना चाहते हैं? यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न है। हाल ही में जो सिख समुदाय की लड़की के साथ ब्रिटेन में हुआ है, वह पाकिस्तान में हो चुका है और अभी भी हो रहा है। एक नहीं बल्कि कई रिपोर्ट्स यह कहती हैं कि कैसे सिख समुदाय की लड़कियों के साथ पाकिस्तान में जबरन मतांतरण हो रहा है या फिर ब्रिटेन में मुस्लिम कट्टरपंथियों के हाथों सिख लड़कियां शिकार बन रही हैं, परंतु फिर भी सिखों के ही एक बहुत बड़े वर्ग द्वारा न ही ऐसी घटनाओं का विरोध सामने आता है और न ही बलात्कारियों के विरोध में कुछ कहा जाता है।
ब्रिटेन में जो घटना हाल ही में हुई है, उसको लेकर भारत में भी उन सिख लड़कियों के पक्ष में बहुत आवाजें दिखाई नहीं देती हैं। भारत के सोशल मीडिया हैंडल जो पूरी दुनिया में महिला अधिकारों को लेकर बातें करते रहते हैं, वे भी इन सिख लड़कियों के मामले में चुप्पी साधे हुए दिखाई दिए।
यह मामला जब बहुत हावी हुआ तो थोड़ा बहुत भारत में चर्चा में आया। परंतु “कौरटूखान” का ट्रेंड तो आज का नहीं है, बल्कि यह कई वर्षों से है और सैकड़ों सिख लड़कियां इसका शिकार हो चुकी हैं।
भारत में ऐसी पीड़ित महिलाओं के प्रति चुप्पी
ऐसा नहीं है कि इसी एक घटना को लेकर भारत का कथित लिबरल वर्ग या कहें पाकिस्तान प्रेमी वर्ग चुप है, वह तब भी चुप रहता है जब पाकिस्तान में सिख लड़कियों का अपहरण कन्वर्जन के लिए कर लिया जाता है। विभाजन के समय असंख्य सिख महिलाओं को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था और उन्होनें किस कारण कुओं में कूदकर आत्महत्या की थी, यह भी सभी जानते हैं, परंतु उस पीड़ा के विषय में भी बात करना आज सही नहीं समझा जाता है।
ब्रिटेन की घटना भी एक उदाहरण है और तमाम वर्षों से पाकिस्तान में धीरे-धीरे गायब होती सिख महिलाएं भी उदाहरण हैं। आखिर इस चुप्पी का अर्थ क्या है? आखिर इस चुप्पी की वजह क्या है?
कई वर्षों से ग्रूमिंग है समस्या :
सिख लड़कियों की ब्रिटेन में मुस्लिम युवाओं द्वारा ग्रूमिंग आज का विषय नहीं है। वर्ष 2013 में बीबीसी ने यह रिपोर्ट किया था कि कैसे सिख लड़कियों को मुस्लिम युवक निशाना बना रहे हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार सिख धार्मिक नेताओं ने यह आरोप लगाए थे कि 9 वर्ष तक की लड़कियों का शिकार मुस्लिम युवक कर रहे हैं। वे उन्हें ग्रूम करते हैं और फिर उन्हें कई तरह के अपराधों में धकेल देते हैं। इसमें सिखों के धार्मिक नेता कह रहे थे कि उन्होनें जो 24 घंटे की हेल्पलाइन जारी की थी, वह रुक नहीं रही है।
इसी मामले को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी साझा किया जा रहा है जिसमें एक सिख व्यक्ति यह बता रहे हैं कि कैसे एक मस्जिद के भीतर तीन सौ लड़कियां थीं, जो मौलवी के अनुसार “कौर टू खान” थीं। उस आयोजन में “केटूके” के बैनर लगे हुए थे।
When in majority!
#KaurToKhan pic.twitter.com/1hDH8Ycmiv— Sumit (@Sumit14896371) April 22, 2024
वर्ष 2007 की डेली मेल की एक रिपोर्ट के अनुसार चरमपंथी मुस्लिम्स कॉलेज परिसर में हिन्दू और सिख लड़कियों को पहले डेट्स पर लेकर जाते हैं और फिर उन्हें तब तक डराते और धमकाते हैं, जब तक कि वे मतांतरित नहीं हो जाती हैं। उसमें लिखा था कि लड़कियों को मुस्लिम युवक सड़कों पर पीटते हैं। और यूनिवर्सिटी छोड़ने के लिए बाध्य करते हैं।
Centre for Ethnicity & Racism Studies, School of Sociology and Social Policy, University of Leeds ने वर्ष 2007 में एक शोधपत्र प्रस्तुत किया था, जिसका शीर्षक था “‘Forced’ Conversions in the British Sikh Diaspora”।
और इसमें उस समय के तमाम मामलों की पड़ताल की गई थी। उस समय की मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला दिया गया था।
अब यह प्रश्न उठता है कि आखिर इतनी पुरानी समस्या, जिसके उदाहरण और मामले आज तक मिल रहे हैं, जो मॉडस ओपेरेंडी अभी तक है, उस पर उस वर्ग में चुप्पी क्यों है जो हिंदुओं से निरंतर सिखों को दूर कर रहा है और हिंदुओं के विरुद्ध सिख समुदाय में विष भर रहा है?

















