K2K अर्थात कौर टू खान क्या है और क्यों राकेश धवन की फिल्म के पोस्टर को देखकर लोग इसे सिख केरल फाइल्स कह रहे हैं? इंस्टाग्राम पर राकेश धवन ने इस पंजाबी फिल्म का पोस्टर रिलीज किया है और सोशल मीडिया यूजर इसकी तारीफ कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर रिलीज किये गए इस पोस्टर में इसकी रिलीज की तारीख 28 अगस्त 2026 दी गई है।
इस पोस्टर को देखने से यह स्पष्ट हो जाता है कि यह फिल्म क्या कहना चाहती है। हालांकि कुछ लोग इसे भी प्रोपागैंडा फिल्म कह सकते हैं, मगर जब हम इस शब्द का इतिहास और वर्तमान देखेंगे तो पाएंगे कि यह शब्द न ही नया है और न ही विवादास्पद। हाँ, जो लोग वास्तविकता को नकारते हैं, उनके लिए अवश्य ही यह शब्द ऐसा है कि जिससे उन्हें नकारात्मकता आएगी। उन्हें यह लगेगा कि यह प्रोपोगैंडा है, मगर इसमें वे हिंदुओं को नहीं जोड़ सकते हैं।
क्या है कौर टू खान?
एक दिन पहले ही पीटीसी पंजाबी ने सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो के हवाले से यह समाचार दिया कि कैसे सिख लड़कियों को जबरन फुसला कर या ग्रूम करके उन्हें मुस्लिम बनाया जा रहा है। यह सब इंग्लैंड में हो रहा है। उस लड़की ने अपने वीडियो में दावा किया है कि यह साजिश पाकिस्तान से चलाई जा रही है और इसका नेटवर्क बहुत बड़ा है। इस वीडियो में लड़की का कहना है कि अलग-अलग धर्म की लड़कियों को फँसाने के लिए पैसे अलग-अलग हैं। इस वीडियो में युवती कई परिचित परंतु चौंकाने वाले खुलासे कर रही है।

युवती का कहना है कि यहाँ पर पाकिस्तानी यूके में सिख लड़कियों के बीच ग्रूमिंग गैंग चला रहे हैं। युवती साफ कह रही है कि वह किसी के प्रति नफरत फैलाने या भरने के लिए यह वीडियो नहीं बना रही है, बल्कि वह यह वीडियो इसलिए बना रही है कि जिससे कुछ लोगों की सच्चाई सामने आए।
सिख लड़कियों को फंसा रहे पाकिस्तानी
उसने आगे कहा कि सिख लड़कियों को पाकिस्तानी मुस्लिमों द्वारा प्यार के जाल में फँसाया जा रहा है और फिर उनका धर्म परिवर्तन किया जा रहा है। युवती साफ कह रही है कि कैसे यूके में ग्रूमिंग गैंग को कऔर से खान बनाने पर दस हजार पाउंड दिए जा रहे हैं। वह कह रही है कि पाकिस्तान मूल के ये गैंग्स जानबूझकर गैर मुस्लिम लड़कियों को अपने जाल में फांस रहे हैं।
पाकिस्तानियों की रणनीति
उसने बताया कि कैसे ग्रूमिंग गैंग पहले लड़की को चुनते हैं और उसके बाद भावनात्मक रूप से उससे जुड़ते हैं और फिर उसके बाद महंगी गाड़ियों और रेस्टोरेंट में लेकर जाते हैं। वे हर काम ऐसा करते हैं कि जिससे लड़कियां उनके झांसे में आ जाएं। और जब लड़कियां उनके झांसे में आ जाती हैं तो उसका धर्म परिवर्तन करा देते हैं। उसने यह भी बताया कि सिख लड़की को फँसाकर मुस्लिम बनाने पर युवक को दस हजार पाउंड मिलते हैं तो हिन्दू लड़की या ईसाई लड़की के धर्म परिवर्तन के लिए पाँच हजार पाउंड्स मिलते हैं।
इस युवती ने दावा किया कि ऐसे गैंग पहले लड़की चुनते हैं, और ऐसी लड़कियां चुनते हैं जो मानसिक और भावनात्मक रूप से कमजोर होती हैं। दूसरे देश से आई लड़कियां उनका निशाना होती हैं। लड़कियों को चुनने के बाद वे लड़कियों के धर्म के अनुसार वे अपना नाम रख लेते हैं और फिर उन्हें अपने प्यार के जाल में फँसाकर, धर्म परिवर्तन करवाते हैं।
काफी समय से इस गैंग का दावा किया जा रहा है
ऐसा नहीं है कि यह सब नया है। दरअसल काफी समय से इस षड्यन्त्र का दावा किया जा रहा है। वर्ष 2007 में भी डेली मेल की एक रिपोर्ट के अनुसार चरमपंथी मुस्लिम्स कॉलेज परिसर में हिन्दू और सिख लड़कियों को पहले डेट्स पर लेकर जाते हैं और फिर उन्हें तब तक डराते और धमकाते हैं, जब तक कि वे मतांतरित नहीं हो जाती हैं। उसमें लिखा था कि लड़कियों को मुस्लिम युवक सड़कों पर पीटते हैं। और यूनिवर्सिटी छोड़ने के लिए भी बाध्य करते हैं।
पिछले दिनों ही एक सिख लड़की को ऐसे ही गैंग से छुड़ाने के लिए सैकड़ों सिखों ने इंग्लैंड में लड़की को बंधक बनाने वाले के घर के बाहर प्रदर्शन किया था और बहुत कठिनाई से लड़की वापस मिली थी। ऐसी एक नहीं असंख्य लड़कियां हैं, जो कौर टू खान गैंग का हिस्सा बन रही हैं।
फिल्म को सिख केरल स्टोरी क्यों कहा जा रहा है?
इस फिल्म को सिख केरल स्टोरी इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इसमें भी गैर मुस्लिम लड़कियों के प्यार में फँसाकर मतांतरण के षड्यन्त्र को दिखाया जा रहा है। कम से कम पोस्टर यही कहता है। इसमें एक लड़की का आधा चेहरा पगड़ी वाला है तो आधा बुर्के में ढका हुआ है।

हालांकि इस पोस्टर के आते ही कुछ मुस्लिमों की ओर से इसका डिनायल भी आना शुरू हो गया है, अर्थात वे इसका मजाक उड़ाते हुए इससे इनकार कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि क्या बॉलीवुड पूरी तरह से पागल हो चुका है? कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि अब आजादी गैंग इस फिल्म को भी प्रोपोगैंडा मूवी कहेगा।
परंतु मूल प्रश्न अनुत्तरित ही रहेगा कि ऐसी पीड़िताओं के लिए आवाज क्यों नहीं उठाई जाती है और जो लोग उठाते हैं, उसे प्रोपोगैंडा क्यों कहा जाता है?












