ईरानी मुल्ला शासन के द्वारा पकड़े गए तेल टैंकर के साथ ही भारतीय क्रू मेंबरों को भी पकड़ा गया था। जिन्हें स्वदेश वापस लाने के लिए भारत सरकार लगातार कोशिश कर रही है। MEA ने बताया कि ईरान से फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए इवैक्यूएशन फ्लाइट्स की तैयारी चल रही है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान में खामेनेई सरकार के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं, इंटरनेट बंद है और हजारों मौतें हो चुकी हैं।
क्या है घटनाक्रम
8 दिसंबर 2025 को दोपहर के समय वैलिएंट रोर नाम का टैंकर अंतरराष्ट्रीय जल में UAE के दिब्बा पोर्ट के पास से होकर खोर फक्कान जा रहा था। अचानक ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की नौसेना ने इसका पीछा शुरू किया। बिना किसी उकसावे के गोलीबारी की गई, जिससे जहाज को नुकसान पहुंचा और कुछ क्रू मेंबर्स घायल हुए। IRGC के जवान जहाज पर चढ़ गए, क्रू के साथ मारपीट की और उन्हें बंधक बना लिया। ईरान ने आरोप लगाया कि जहाज पर 60 लाख लीटर डीजल की तस्करी हो रही थी। लेकिन जहाज पर बहुत कम सल्फर वाला फ्यूल ऑयल (VLSFO) था।
क्रू ने सैंपल जांच रिपोर्ट दी, मगर ईरान ने उसे खारिज कर दिया और जहाज पर कब्जा कर लिया। जहाज को लूटा गया और बंदर-ए-जास्क पोर्ट पर ले जाया गया। 6 जनवरी 2026 को 10 क्रू मेंबर्स को बयान दर्ज कराने के नाम पर ले जाया गया, लेकिन उन्हें गिरफ्तार करके बंदर अब्बास जेल भेज दिया गया।
पकड़े गए जहाज और क्रू
जिस जहाज को ईरानी नौसेना ने पकड़ा है, उसका नाम MT Valiant Roar (टैंकर) है। ये टैंकर दुबई की कंपनी ग्लोरी इंटरनेशनल FZ LLC का है। इस टैंकर में कुल 18 क्रू मेंबर सवार थे। इसमें से 16 भारतीय, 1 श्रीलंकाई, 1 बांग्लादेशी व्यक्ति शामिल था।
ईरानी जेलों में बंद हैं सभी क्रू
10 भारतीय क्रू (जिनमें चीफ ऑफिसर अनिल कुमार सिंह, सेकंड इंजीनियर और कुछ जूनियर इंजीनियर शामिल हैं) बंदर अब्बास जेल में हैं। 6 जनवरी शाम को एक छोटी कॉल के बाद कोई संपर्क नहीं। बाकी 8 क्रू जहाज पर ही एक मैस रूम में बंद हैं, जहां IRGC के सशस्त्र जवान पहरा दे रहे हैं। फोन और डिवाइस छीन लिए गए हैं। सिर्फ कप्तान को रोज थोड़ी देर कॉल करने की इजाजत है। क्रू पानी, चावल और दाल पर गुजारा कर रहा है। राशन 2-3 दिन का बचा है। ईरान की तरफ से कोई औपचारिक गिरफ्तारी आदेश या वजह नहीं दी गई।
भारतीय नाविकों की रिहाई के लिए कोशिश
परिवारों ने दिसंबर में ही डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग से शिकायत की, फिर MEA और तेहरान में भारतीय दूतावास से मदद मांगी है। दूतावास ने बंदर अब्बास कांसुलेट से संपर्क करने को कहा, लेकिन कांसुलर एक्सेस नहीं दिया गया। परिवारों ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की, जिस पर कोर्ट ने केंद्र से स्टेटस रिपोर्ट मांगी। MEA ने कहा कि वह स्थिति से वाकिफ है और नाविकों की रिहाई के लिए कोशिश कर रहा है।
16 जनवरी 2026 को MEA ने बताया कि ईरान से फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए इवैक्यूएशन फ्लाइट्स की तैयारी चल रही है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान में खामेनेई सरकार के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं, इंटरनेट बंद है और हजारों मौतें हो चुकी हैं।

















