अमेरिका से एक ऐसी सनसनीखेज रिपोर्ट जारी हुई है जिसने जिन्ना के देश और साथ ही विदेशों में भारत का अपमान करने वाले राहुल गांधी सहित भारत के विपक्षी दलों के झूठ की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। अमेरिका के फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के अंतर्गत जारी हुए इन दस्तावेजों ने खुलासा किया है कि मई 2025 में भारत के ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को अंदर तक झकझोर दिया था और उसे रुकवाने के लिए उसने अमेरिकी अधिकारियों के साथ 60 बार नाक रगड़ी थी।
इस अमेरिकी रिपोर्ट के अनुसार, हुआ यूं था कि पाकिस्तान ने आपरेशन सिंदूर को रुकवाने के लिए अमेरिका में अपने दूतावास कर्मियों के जरिए जबरदस्त लॉबिंग करने की कोशिश की थी। उसने ट्रंप प्रशासन के बड़े अधिकारियों, सांसदों, पेंटागन और विदेश विभाग के अधिकारियों से लगभग 60 बार संपर्क किया था और बैठकें की थीं।

फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत अमेरिका के न्याय विभाग में जमा किए गए इन दस्तावेजों से साफ होता है कि न्यूयार्क स्थित पाकिस्तानी दूतावास कर्मियों ने चार दिन चले ऑपरेशन सिंदूर के बाद तक ईमेल, फोन और आमने-सामने की बैठकें करके भारत को सीज़फायर के लिए राजी करवाने के लिए खूब मिन्नतें की थीं।
ऑपरेशन सिंदूर को रुकवाने की कोशिश में पाकिस्तान ने ट्रंप प्रशासन के अंदर जल्दी पहुंच बनाने के लिए लॉबिंग का काम करने वाली 6 कंपनियों को पैसा देकर इस काम पर जुटाया था, जिसके लिए कंगाल जिन्ना के देश ने 45 करोड़ रुपए तक खर्च कर दिए थे।
इसी से जुड़ते एक अलग खुलासे में, अमेरिका की एक और लॉबिंग फर्म, सिडली लॉ एलएलपी का कहना है कि उसने जिन्ना के देश को अमेरिका के साथ अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत करने में मदद की और भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान मदद दी थी।
यहां ध्यान दें कि भारत के सेकुलर विपक्षी दल के नेता राहुल गांधी ने खुद अपने ही देश पर उंगली उठाई थी और आपरेशन सिंदूर के विरोध में बयानबाजी की थी। राहुल गांधी विदेशों में भारत की उपलब्धियों के विरुद्ध यूं भी बोलने के लिए बदनाम हो चले हैं। भारत की संसद में कुछ अन्य विपक्षी सांसदों ने भी इस आपरेशन की ‘जरूरत’ और ‘टाइमिंग’ को लेकर आपत्तियां की थीं। ऐसे लोगों को भी अब अमेरिकी दस्तावेजों से अपनी भूल का एहसास हो जाना चाहिए।
भारत में मीडिया एक वर्ग भी इस नैरेटिव को गढ़ने में लगा रहा था कि भारत ने आपरेशन सिंदूर ‘अमेरिका के कहने पर रोका था’। अथवा, भारत ‘अमेरिका की धमकी’ से डर गया था। मीडिया के उस वर्ग में भी कांग्रेस के झूठे भारत विरोधी नैरेटिव को आगे बढ़ाने की होड़ लगी थी। कांग्रेस ने तब बयान दिया था कि ’10 मई, 2025 को अमेरिका के आपरेशन सिंदूर को रोकने की घोषणा से पहले कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं।’
उस दौरान कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट डाली थी। उस पोस्ट में उन्होंने लिखा था कि, ’10 मई को शाम 5:37 बजे, अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रूबियो ने ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के बारे में पहली सार्वजनिक घोषणा की।’ आगे उन्होंने था कहा कि ‘इस टाइमिंग की बारीकी से जांच होनी चाहिए।’
उल्लेखनीय है कि अभी पिछले दिनों ही जिन्ना के देश के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने स्वीकारा था कि भारत के हमलों में उनके एयरबेसों को नुकसान पहुंचा है। डार ने कहा था कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उसके नूर खान एयरबेस पर एक बड़ा ड्रोन हमला किया था। इस हमले में कई सैनिक घायल हुए और मिलिट्री इंस्टॉलेशन को नुकसान पहुंचा था। साल के आखिर में हुई उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया था कि भारत ने रावलपिंडी के चकलाला इलाके में स्थित नूर खान एयरबेस को निशाना बनाया था। 36 घंटे के अंदर भारत ने पाकिस्तान की तरफ 80 ड्रोन भेजे थे। इतना ही नहीं, खुद प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ कह चुके हैं कि आपरेशन सिंदूर के दौरान उन्हें बंकर में रहने की सलाह दी गई थी।

जम्मू कश्मरी में सेना की कमान संभाल चुके भारत के एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने भी खुलाया किया था कि आपरेशन सिंदूर से घबरा कर पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख असीम मुनीर खुद बंकर में जा छुपे थे। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने दावा किया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर एक बंकर में छुप गए थे और बाद में जनता की नजर से बचने के लिए खुद को फील्ड मार्शल के पद पर बैठा लिया। ढिल्लों ने कहा कि 10 मई 2025 को भारत ने सटीकता से 11 पाकिस्तानी एयरबेस पर हमला किया था, और पाकिस्तान का एयर डिफेंस एक भी मिसाइल को रोक नहीं पाया था।
















